Importance of opening the five senses-इन्द्रियों को जगाने के लिए क्यों ज़रूरी है गरम तेल की मसाज

Importance of opening the five senses
Importance of opening the five senses

Importance of opening the five senses-आयुर्वेद के सिद्दांतों के मुताबिक इंसान की पांच इंद्रियां होती हैं- नेत्र, नाक, जीभ, कान और त्वचा । यही इंद्रियां हमें बताती हैं कि हमारे आसपास क्या हो रहा है। हमारी सुरक्षा से लेकर हमें आने वाले खतरे के बारे में भी अवगत कराती हैं हमारी इन्द्रियां। आयुर्वेद प्रकृति के नियमों पर आधारित है। आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य बताया गया है- स्वास्थ्य रक्षणम् आतुरस्य रोगप्रशमनम् च।” यानी स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा रोगी मनुष्य के रोग को दूर करना। आयुर्वेद में बीमार पड़ने से पहले ही अपनी देखभाल करने की सलाह दी जाती है। इसके लिये पंचकर्म, पंचमहाभूत, त्रिदोष जैसे सिद्धांत भी मौजूद हैं। इन सबका संबंध हमारी पांच इंद्रियों से है।


five sense organs

सभी मनुष्यों के अंदर समान रूप से पांच इंद्रियां होती है हालांकि छठी इंद्री ( sixth sense) होने की बातें भी कही जाती है, जिसे हम पूर्वाभास भी कहते हैं।

1 – स्पर्श (Sense of touch)
2 – जीभ-रसना (Sense of taste)
3 – सूंघना (Sense of smelling)
4 – नेत्र (आंख) (Sense of seeing)
5 – कान- (Sense of hearing)

आयुर्वेद में वैसे तो हर मनुष्य को पांचों इंद्रियों पर काबू रखने की सलाह दी जाती है। लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिये इंद्रियों पर काबू पाने और इन्हें जगाने का खास महत्व है। इसके पीछे कई तर्क हैं जिनमें अहम है कि माता और शिशु की सेहत और रोग प्रतिरोधक शक्ति बनी रहे। इसे इस तरह से समझ सकते हैं——

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । (O Gods, with our ears may we hear what is auspicious.)
भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः (O Holy ones, with our eyes may we see what is auspicious.
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः (With firm limbs making adoration with our bodies)
व्यशेम देवहितं यदायूः (May we attain the life granted to us by the Divine!)

Importance of opening the five senses

आयुर्वेद इस बात की पुरज़ोर वकालत करता है कि हमें सबसे पहले यह पता होना चाहिए कि हमारी इन्द्रियां हमसे चाहती क्या हैं? मसलन आपको अलग-अलग चीजें खआने का मन है या मधुर संगीत सुनने का या आप चीजों को ज्यादा बेहतरी से सूघ पा रहे हैं? आयुर्वेद के मुताबिक अगर आप जान जाते हैं कि पांच इंद्रियों में से सबसे मजबूत कौन सी है तो आप शरीर की बाकी इन्द्रियों के साथ भी अच्छी तरह से तालमेल बिठा सकते हैं।

Cleaning The Senses in Ayurveda-इंद्रियों की सफाई क्यों है ज़रूरी, क्या कहता है आयुर्वेद

how to explore each of them

Taste Different Food- सबसे पहले बात आती है जीभ की। इस इंद्री को जगाने के लिये अलग-अलग तरह के भोजन का स्वाद लें। सादे खाने की जगह कड़वा, तेज मसालेदार खाएं।
2- गाजर, सेब, शतावरी, स्ट्रॉबेरी, बाजरा, क्विन्नू, टोफू, बादाम, इलायची, केयेन, करी पाउडर, हल्दी के अलावा चमेली और पुदीना चाय का इस्तेमाल करें।

 HEAD TO TOE WARM OIL MASSAGE

1. खुद को सिर से पैर तक गर्म तेल मालिश दें। आयुर्वेद में इसे अभ्यंगा कहा जाता है और यह आपके वात, पित्त, वायु-कफ दोषों को बैलेंस करने का काम करता है।
2. शरीर के ऊपर यानी स्किन में जड़ी बूटी के साथ गर्म तेल को रगड़ने से सूखी त्वचा को पोषण मिलेगा। नर्वस सिस्टम दुरुस्त होता है। गर्म तेल की मालिश से तनाव कम होता है और रक्त संचार सुधरता है। थोड़ी देर आरम कर लें ताकी शरीर के अंदर रोमछिद्रों के ज़रिये तेल का ये पोषण पहुंचे।
3. मसाज के लिये आप किसी सुगंधित या आयुर्वेदिक अरोमाथैरेपी का इस्तेमाल कर सकते हैं । यकीन मानिये मसाज का एक अच्छा सेशन आपकी इस इंद्री को जगाने का काम करता है। जैसा कि आयुर्वेद में बताया गया है कि मसाज के कई तरीके हैं, आप अपनी पसंद के मुताबिक इसे चुन सकते हैं।

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Importance of opening the five senses-Aromatherapy

  • 1. नेचर की हीलिंग पावर को फील करते हुए आप अच्छे और खुशुबूदार तेलों को सूंघ सकते हैं। आयुर्वेद में सुगंधित फूलों को सूंघना भी उत्तम माना गया है।
  • 2. अरोमा ऑयल को नहाने के वक्त अपने पानी में डालें। लंबी सांसें भरिये, फिर देखिये किस यात्रा पर ले जाते हैं ये कुदरत के ये खजाने।
    3. ये प्रक्रिया नाड़ी जगाने का काम करती है। आपकी कल्पनाओं को उड़ान देती है। परम खुशी की प्राप्ति कराती है तो समझ लीजिये आपकी ये इंद्री जाग गई।
  • सर्दियों के मौसम में नीलगिरी, पुदीना, पिनेन पाइन, पेपरमिंट और रोजमैरी, टी ट्री की सुगंध लें।( eucalyptus, peppermint, pinon pine, rosemary, and tea tree)
  • मसाज के लिये दालचीनी, अदरक तुलसी और ऑरिगैनो युक्त तेल फायदेमंद रहता है।

अगर आपको किसी फूल से एलर्जी है तो ज़रा संभलकर रहिये। क्योंकि यह किसी तरह के संक्रमण का कारण भी बन सकता है। इसके स्थान पर किसी तेल का ही इस्तेमाल करें। खासकर अरोमा ऑयल सर्वोत्तम माना जाता है।

surround yourself with color of happiness


यहां हम बात करेंगे चौथी इंद्री यानि नेत्र को जगाने की। हम अक्सर महसूसकरते हैं कि कोई रंग हमें खूब भाता है जबकि कुछ रंग हमें फीके लगते हैं। अगर आपको नहीं समझ आता कि कौन सा रंग किस महीने अच्छा लग रहा है तो इसमें बदलाव करें। सफेद की जगह काला पहनें, नीले की जगह हरा।
1.सर्दियों में गहरे लाल, पीले और चटख रंग हमारे मन और आत्मा को सुकून देते हैं।
2.सर्दी गर्मी और स्प्रिंग, सीजन कोई भी हो रंगों के साथ एक्सपेरिमेंट करते रहें। इनका अपने मूड और इमोशन पर असर देखें और उसी के अनुसार फिर अपनी ड्रैस चुनें।
3. खासकर प्रेगनेंट महिलाओं को मूड स्विंग के दौरान कलर्स को बरा-बार बदलने का मन करता है। तो सोच समझकर अपने मन को सुनकर ही अपने परिधान पहनें, इससे आपको आंतरिक सुकून मिलेगा।

Importance of opening the five senses-listen good music

संगीत सुनना सबसे सूदिंग माना जाता है। बस यह पता होना चाहिए कि पसंद क्या है?
1. किस तरह का संगीत आपके कानों को सुकून दे रहा है? कौन सी आवाज़ आपको भा रही है।
2. आपको बस अपने मू़ड को नोटिस करना होगा कि क्या जब संगीत बदलता है तो आपकी भावनात्मक स्थिति भी बदलती है?
3. जितना हो सके अच्छा और रोमांटिक संगीत सुनें।
4. ऐसा एक दो महीने लगातार करें फिर आप देखेंगे कि आपकी पसंद क्या बन रही है। बस जैसे ही आप यह जान गए आपकी यह इंद्री मानो जागृत हो गई।
अपनी इंद्रियों को खोजें, इन्हें पहचाने और फिर इनमें बेहतर संतुलन बनाएं ताकी आप हमेशा स्वस्थ रहें।

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