निज़ाम के निराले शौक, निरंकुश शासन और दौलत की दास्तां….

lastnizammirosmanali-1
lastnizammirosmanali-1

निज़ाम के निराले शौक थे.भारत विभाजन के दौरान हैदराबाद के 7वें निज़ाम ने 1948 में जो फंड लंदन के एक बैंक में जमा कराया था वह अब भारत का होगा। पाकिस्तान इस पर दावा कर रहा था जिसे ब्रिटेन के एक हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। मामला 70 साल पुराना है। कोर्ट का कहना है कि इस रकम पर भारत और निजाम के उत्तराधिकारियों का हक है । 3 अरब से ज्यादा की यह राशि अब भारत का समर्थन करने वाले निज़ाम के 120 वंशजों की है। जो इस पर दावा कर रहे हैं। सवाल यह है कि 120 दावेदारों में यह दौलत कैसे बंटेगी?

राॅयल कोर्ट ऑफ जस्टिस के न्यायमूर्ति मार्क्स स्मिथ ने हाल ही में फैसला सुनाया कि हैदराबाद के सातवें निज़ाम की संपत्ति पाकिस्तान को नहीं मिलेगी। यूके हाईकोर्ट ने निर्णय किया कि पाकिस्तान, बैंक में जमा तीन करोड़ 50 लाख पौंड निज़ाम हैदराबाद के वंशजों को वापिस करे। 2013 से पाकिस्तान सरकार ने ब्रिटिश उच्च अदालत में अर्जी डाल रखी थी कि यह संपत्ति उनकी है। अदालती प्रक्रिया का यह पार्ट-टू है।

निज़ाम के निराले शौक, अब वंशजों की तादाद 120 के पार

mir-osman-ali-khan
mir-osman-ali-khan

हैदराबाद रियासत का भारतीय संघ में विलय से ठीक पहले 10 लाख 7 हज़ार 940 पौंड 1948 से ब्रिटेन के नेटवेस्ट बैंक पीएलसी में जमा है जो अब बढ़कर 35 मिलियन पौंड (रुपये में लगभग 306 करोड़) हो चुका है। इस रकम के साथ-साथ निज़ाम हैदराबाद के वंशजों की संख्या भी बढ़कर 120 हो गई है। इन सबको इस धन में से अपना शेयर चाहिए। हिस्सा नहीं मिला तो क़ानूनी जंग लड़ने की धमकी दी जा रही है।

निज़ाम के निराले शौक, कई किस्से

nizam wife
nizam wife

हैदराबाद निज़ाम के किस्से आधुनिक इतिहास में हम सबने पढ़े हैं। हैदराबाद के अगर किसी सबसे चर्चित निज़ाम की बात करें तो सबसे पहला नाम आता है मीर उस्मान अली खान का। जिनके बारे में कई तरह के किस्से आज भी सुनाए जाते हैं। कहते हैं मीर उस्मान के पास बेहिसाब दौलत थी। आज भी इनके वंशज उस दौलत की वजह से शानो शौकत भरी जिंदगी जी रहे हैं।

हैदराबाद निज़ाम के मीर साहब फोर्ब्स की सूची में 5वें नंबर पर रह चुके हैं

nizam wives
nizam wives

हैदराबाद के निजाम मीर साहब को 2008 में फोर्ब्स ने दुनिया के दौलतमंद लोगों में से एक माना। फोर्ब्स के मुताबिक वो दुनिया के पांचवे दौलतमंद शख्स हैं। उस वक्त बिल गेट्स को 20वें नंबर पर थे।

mahboob ali pasha
mahboob ali pasha

निज़ाम की संपत्ति का मामला ‘स्टेट एंड टेरीटरी कोर्ट’, जिसे हम अपने यहां हाईकोर्ट कहते हैं, वहीं तक पार हुआ है। अभी सुप्रीमकोर्ट में इसे चुनौती देना बाक़ी है। सिर्फ़ हाईकोर्ट तक फैसला पाने में 64 साल लगे हैं। इन सात दशकों में निज़ाम हैदराबाद की संपत्ति के 120 हकदार पैदा हो गये। निज़ाम की पूरी वंशावली की चर्चा की जाए तो अखबार को पूरा पन्ना छोटा पड़ जाएगा।

निज़ाम के निराले शौक-7वें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान से शुरू हुआ किस्सा

nizam sword
nizam sword

रकम का यह किस्सा सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान के समय से शुरू होता है। उस समय देश का विभाजन हो चुका था और उन्हें अपनी रियासत के विलय का डर सताने लगा था। उस डर की वजह से निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान पाकिस्तान से असलहे मंगाने लगे।

संपत्ति के छीने जाने का डर

nizam
nizam

दूसरा डर संपत्ति के छीने जाने का था, उसी सिलसिले में रियासत के वित्त व विदेश मंत्री नवाब मोइन नवाज़ जंग ने लंदन स्थित पाक उच्चायुक्त हबीब इब्राहिम रहीमतुल्ला के माध्यम से 10 लाख 7 हज़ार 940 स्टर्लिंग पौंड ब्रिटेन के नेटवेस्ट बैंक पीएलसी में जमा करा दिये। बैंक में यह दर्ज कराया गया था कि यह रकम निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान की ओर से जमा कराई जा रही है। उसके कुछ महीनों बाद 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद का विलय भारतीय गणराज्य में हो चुका था। https://www.indiamoods.com/2376-2/

1954 में सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान ने बैंक से मांगी संपत्ति

fund sharing nizam
fund sharing nizam

कुछ साल गुज़रने के बाद निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान ने बयान दिया कि ब्रिटिश बैंक में वह रकम बिना उनकी सहमति के जमा की गयी थी। 1954 में सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान ने दावा किया कि उनकी संपत्ति बैंक वापिस करे। मामला लोअर-अपर व डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पहुंचा। निचली अदालत को लगा कि पाकिस्तान संप्रभु देश है और उसे साॅवरिन इम्युनिटी (संप्रभु उन्मुक्ति) मिलनी चाहिए। उस आधार पर रकम को बैंक में फ्रीज कर देने का कोर्ट का आदेश हुआ। बैंक में जमा रकम पाकिस्तान को भी नहीं मिली। 2013 तक यह केस मृत जैसा ही था।

कोर्ट के बाहर समझौता नहीं हुआ

India-won-Hyderabad-Nizam-case-against-Pakistan
India-won-Hyderabad-Nizam-case-against-Pakistan

कुछ लोग यह बताते हैं कि निज़ाम के वंशजों से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की लंदन में कोई सीक्रेट डील हुई थी। सातवें निज़ाम के पोते नवाब नज़फ अली ने स्वीकार किया था कि 2008 में पाकिस्तान से ‘आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट’ का प्रयास हमने किया था। इससे अलग, हैदराबाद के स्वयं घोषित आठवें निज़ाम मुकर्रम जाह और उनके छोटे भाई मुफ्फ़खम जाह ने 2009 के शुरू में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उस समय के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से इस विषय पर सहयोग चाहा था।

1930 से 1940 में मीर ओस्मान दुनिया के सबसे दौलतमंद इंसान

methode_sundaytimes_prod
methode_sundaytimes_prod

कहते हैं आजादी से पहले 1930 से 1940 के दरम्यान मीर ओस्मान अली खान दुनिया के सबसे दौलतमंद इंसान थे। शौकीन मिजाज मीर ओस्मान अली पेपरवेट के तौर पर 158 कैरेट हीरे का इस्तेमाल किया करते थे। जिसकी कीमत करीब चार अरब रुपए थी।

नौकरों की फौज थी

Mahbub_Ali_Khan_Asaf_Jah_VI_Nizam_of_Hyderabad
Mahbub_Ali_Khan_Asaf_Jah_VI_Nizam_of_Hyderabad

कहा जाता है कि मीर ओस्मान अली के पास नौकरों की फौज हुआ करती थी। 1967 में जब उनकी मौत हुई तो नवाब साहब के पास 14 हजार से अधिक तीमारदार हुआ करते थे। तीन हजार तो बस महल की आंतरिक सुरक्षा में लगाए गए थे। इसके अलावा 28 कर्मचारियों की फौज पानी पिलाने का काम कर रहे थे। कई लोगों को नवाब साहब की सुपारी तोड़ने के लिए रखा गया था।

हालांकि हैदराबाद के किंग कोटी पैलेस में 1967 को जब मीर ओस्मान अली दुनिया से अलविदा हो रहे थे। उस वक्त तक उनकी शाही सत्ता खत्म हो चुकी थी। बावजूद इसके उन्हें रॉयल अंदाज में ही विदा किया गया था।