इनसान पर्यावरण का दुश्मन, ऐसे करें संरक्षण

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रितेश कुमार झा

इनसान पर्यावरण का दुश्मन: आज विश्व पर्यावरण दिवस है। हर साल की तरह इस साल भी पर्यावरण दिवस पर कई सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। पर्यावरण को बचाने के लिए संकल्प लिए जाएंगे। ऐसा करके हम अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर लेंगे। लेकिन हकीकत कुछ और है। साल दर साल पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। ये कहना गलत नहीं होगा कि 21वीं सदी पर्यावरण के संरक्षण की नहीं बल्कि ‘विनाश’ की सदी है! इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार अगर कोई है तो वो इंसान खुद है। इंसान खुद ही पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन है।

हमें पर्यावरण प्रदूषण की चिंता तो सताती है लेकिन जिन चीजों से पर्यावरण प्रदूषित होता है वो चीजें हमें सबसे ज्यादा प्यारी भी बनी हुई हैं। इसका एक उदाहरण देखिए जिन सेमिनारों में पर्यावरण प्रदूषण पर चर्चा होती है उन्हीं सेमिनारों में प्लास्टिक के बोतलबंद पानी का इस्तेमाल किया जाता है। यह अपने आप में एक तरह का विरोधाभास है। पर्यावरण के संरक्षण के लिए बड़ी-बड़ी बहसों की जगह अगर हम अपनी छोटी-छोटी आदतों में बदलाव ले आएं तो हमारे जिस अस्तित्व पर पर्यावरण के दूषित होने से खतरा मंडरा रहा है वो अस्तित्व लंबे वक्त तक बचा रहेगा।

इनसान पर्यावरण का दुश्मन : प्लास्टिक को कहें ना

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अगर धरती को बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले प्लास्टिक को ना कह दें। उस पॉलीथीन का बहिष्कार करना चाहिए जो रोजमर्रा के सामान खरीदते वक्त हमारे या आपके हाथों में दिख जाती है।

इनसान पर्यावरण का दुश्मन: डिस्पोजेबल प्लेट का करें त्याग

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हम या आप अगर खाने में डिस्पोजल प्लेट का उपयोग करते हैं तो उसे फौरन त्याग दें। उसकी जगह स्टील या चिनी मिट्टी की थाली में खाना खाएं। दरअसल, प्लास्टिक के डिस्पोजेबल लंच आइटम पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन हम घर में होने वाले कार्यक्रम से लेकर ऑफिस पार्टी तक में प्लास्टिक के प्लेट से लेकर गिलास तक का इस्तेमाल करते हैं। टिश्यू पेपर और प्लास्टिक रैपर का उपयोग सामान्य हो गया है। खाते हैं तो प्लास्टिक की थाली में न खाएं। इसी तरह प्लास्टिक थैली की जगह घर से कपड़े या जूट की थैली मार्केट सामान के लिए ले जाएं।

इनसान पर्यावरण का दुश्मन: बायोडिग्रेडेबल नहीं है प्लास्टिक

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हम यह भूल जाते हैं कि प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं है। प्लास्टिक को जलाना और जमीन के अंदर दबाना दोनों ही घातक है। यह न पानी में गलता है और न ही जमीन के अंदर और जमीन के बाहर खत्म होता है। पॉलीथीन में पालीयूरोथेन नामक रसायन पाया जाता है। इस रसायन को किसी भी तरह से नष्ट नहीं किया जा सकता है। प्लास्टिक को जलाने पर वायुमंडल दूषित होता है। पॉलीथीन को अगर जमीन के भीतर दबाया जाता है तो यह जहरीली गैस में तब्दील हो जाता है। जमीन के अंदर गर्मी पाकर यह गैस विस्फोट भी कर सकती है। यह कहा जाता है कि प्लास्टिक इतना खतरनाक है कि इसे नष्ट होने में सवा लाख साल तक लग सकते हैं।

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हमें संकल्पबद्ध होना होगा

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जाने-अनजाने हम खुद ही पर्यावरण के दुश्मन कैसे साबित हो रहे हैं। हम अपनी रोजमर्रा की आदतों के जरिए पर्यावरण को खूब नुकसान पहुंचाते हैं। जिस कार से हम अपने घर से निलकते हैं और जो एसी हमें रात को ठंडी हवा देता है उसके जरिए भी पर्यावरण प्रदूषित होता है। हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि लोग कार की जगह पैदल चलें और गर्मी से बचने के लिए एसी नहीं लगाएं। लेकिन जो छोटी-छोटी चीजें हम कर सकते हैं उनके जरिए पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए हमें संकल्पबद्ध होना चाहिए।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट का करें इस्तेमाल

इधन को बचाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। जब बेहद जरूरत हो तभी अपनी कार निकालें।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को रखें टर्न ऑफ

अपने इलेक्ट्रोनिक डिवाइस को टर्न ऑफ करके रखें। अक्सर हमारी आदत होती है कि घरों में लैपटॉप या फिर कंप्यूटर को यो ही खुला छोड़ देते हैं। लेकिन हम यह नहीं जानते कि इसके जरिए भी पर्यावरण प्रदूषित होता है। फोन चार्ज करने के बाद स्विच ऑफ कर दें। अगर आपका काम खत्म हो गया तो लाइट, फैन और एसी बंद कर दें।

मिट्टी के गमलों का करें इस्तेमालhttp://indiamoods.com

अगर आप घर में गमले लगा रहे हैं तो प्लास्टिक की जगह मिट्टी के गमले का इस्तेमाल करें। अक्सर मार्केट में प्लास्टिक के रंग-बिरंगे गमले मिलते हैं और हम उन्हें खरीद कर ले आते हैं और उनमें पौधे लगा देते हैं जो हमारी/आपकी और पर्यावरण दोनों की सेहत के लिए खतरनाक है।

पानी बचाएं

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पर्यावरण के संरक्षण के लिए यह भी जरूरी है कि हम और आप अपने घरों में जो पानी की बर्बादी करते हैं फौरन उस पर रोक लगाएं। अपनी जरूरत के हिसाब से ही पानी लें। नहाते और कपड़े धोते वक्त ज्यादा पानी न बहाए। अक्सर लोग बेवजह पानी की बर्बादी करते हैं। जबकि देश के कई हिस्सों में पानी कि किल्लत बनी रहती है। पानी के लिए लंबी-लंबी कतारे लगी रहती हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए अपने नहाने के वक्त में कमी करें। बाल्टी में पानी भरकर नहाएं और शावर का इस्तेमाल कम ही करें।

ब्रश करते वक्त बेवजह पानी न बहाएं

दांत धोते वक्त और दाड़ी बनाते वक्त बेवजह सिंक में पानी न बहने दें और नल को बंद रखें। अगर पानी का पाइप लीक कर रहा है तो उसे फौरन सही करवा लें।

पानी को रिसाइकिल करें

अपने घर पर पानी को रिसाइकल करें। आपको बता दें कि घरों तक पानी पहुंचाने के लिए बिजली की सबसे ज्यादा खपत होती है। क्योंकि पानी घर-घर तक पहुंचाने के लिए वाटर पंप का इस्तेमाल होता है और नदियों से पानी आपकी दहलीज तक आता है। पानी का संरक्षण करेंगे तो पर्यावरण भी संरक्षित रहेगा।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी रिसाइकल कराएं

कंप्यूटर और लैपटॉप जैसे उपकरणों को खराब होने पर ऐसे ही न फेंके बल्कि रिसाइकल के लिए दे दें। ताकि इन चीजों को फिर से काम में लाया जा सके। नहीं तो ये चीजें वायु प्रदूषण को बढ़ाएगी।