Himachal Pradesh’s Caste Equation- 25 फीसदी दलित, कांग्रेस के वोट बैंक के ज़रिये ‘आप’ का मिशन शिमला

Himachal Pradesh's Caste Equation
Himachal Pradesh's Caste Equation

Himachal Pradesh’s Caste Equation-हिमाचल प्रदेश मैं अगला हफ्ता खूब गहमा गहमी वाला होने जा रहा है .एक तरफ बीजेपी अध्यक्ष जप नड्डा काँगड़ा दौरे पर हैं तो वहीँ पंजाब मैं परचम लहराने वाली आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल भी ज़मीं तलाशने के लिए काँगड़ा मैं डेरा डालने वाले हैं .
काँगड़ा प्रदेश की राजनीती का सेंटर है यहाँ की 15 विधानसभा सीट्स के ज़रिये आम आदमी पार्टी हिमाचल मैं बीजेपी के गढ़ मैं सेंध लगाने की फ़िराक़ मैं है. किसी गैर ठाकुर या गैर ब्राह्मण कैंडिडेट के अलावा आप असंतुष्टों के ज़रिये कांग्रेस और बीजेपी दोनों के खेमे मैं सेंध लगाने की तयारी कर रही है.

25 फीसदी दलित आबादी है

हिमाचल प्रदेश में 25 फीसदी दलित आबादी है और 18 पर्सेंट ब्राह्मण हैं। इसके अलावा ओबीसी मतदाताओं की संख्या भी 14 फीसदी के करीब है। ऐसे में गैर-ठाकुर चेहरे के नाम पर भी आम आदमी पार्टी मजबूती से एंट्री कर सकती है। सूबे में कुल 68 सीटें हैं, जिनमें से 17 सीटें दलित समुदाय के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा किन्नौर, लाहुल स्पीति और भरमौर सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हैं। बैजनाथ विधानसभा सीट अनुसूचित जाती के लिए आरक्षित है और यही आम आदमी पार्टी के चुनावी अभियान के शुरुआत का केंद्र होगा.

Jp Nadda himachal tour
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Himachal Pradesh’s Caste Equation-आम आदमी पार्टी की महत्वाकांक्षाएं बढ़ गई

पंजाब में बंपर जीत हासिल करने के बाद से आम आदमी पार्टी की महत्वाकांक्षाएं बढ़ गई हैं। उसकी ओर से फिलहाल गुजरात और हिमाचल प्रदेश पर फोकस किया जा रहा है। दोनों ही राज्यों में इसी साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। खासतौर पर हिमाचल को लेकर आम आदमी पार्टी काफी उत्साहित है क्योंकि यह पंजाब से सटा हुआ सूबा है। यही नहीं सांस्कृतिक तौर पर हिमाचल का बड़ा क्षेत्र पंजाब के प्रभाव में रहा है। ऐसे में आम आदमी पार्टी इस राज्य में तीसरा विकल्प बनकर मजबूती से उभरने की तैयारी में है। यहां अब तक कांग्रेस और भाजपा ही बारी-बारी से शासन करती रही हैं।

हिमाचल के पहाड़ों पर सफलता की चढ़ाई चढ़ पाएगी?


हालांकि अहम सवाल यह है कि पंजाब के मैदानों में छाने वाली ‘आप’ हिमाचल के पहाड़ों पर कैसे सफलता की चढ़ाई चढ़ पाएगी। हिमाचल की राजनीति को समझने वाले कहते हैं कि अभी यहां आम आदमी पार्टी को इंतजार करना होगा, लेकिन पंजाब से सटे ऊना और कांगड़ा जैसे जिलों में जरूर उसका प्रभाव दिख सकता है। इसके अलावा बड़ी बात यह है कि आम आदमी पार्टी की एंट्री इस बार भाजपा के लिए वरदान जैसी हो सकती है। हर 5 साल में सत्ता परिवर्तन करने वाले हिमाचल में आप की एंट्री से भाजपा का मिशन रिपीट सफल हो सकता है।
इसकी वजह यह है कि देश भर में आम आदमी पार्टी को कांग्रेस का ही वोट टूटकर मिलता रहा है। ऐसे में हिमाचल में भी ऐसा होने की प्रबल संभावना है और यह स्थिति भाजपा के लिए फलदायी होगी।


Himachal Pradesh’s Caste Equation-क्या है हिमाचल का जातीय समीकरण?

दरअसल हिमाचल के सुदूर इलाकों तक आप के लिए पहुंच बना पाना थोड़ा कठिन होगा। इसके अलावा पंजाब की तरह यहां उसके पास अभी लोकप्रिय चेहरों का भी अभाव दिखता है। फिर भी एक ऐसा पहलू है, जिसके जरिए आम आदमी पार्टी मजबूती से दस्तक दे सकती है। यह है जातिगत समीकरण। हिमाचल में अब तक कुल 6 मुख्यमंत्री हुए हैं। इनमें से शांताकुमार ब्राह्मण थे और बाकी 5 मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार, ठाकुर राम लाल, वीरभद्र सिंह, प्रेमकुमार धूमल और अब जयराम ठाकुर सभी क्षत्रिय बिरादरी से आते हैं। आबादी के लिहाज से बात करें तो भले ही ठाकुरों की आबादी 35 फीसदी है, जो राज्य में सबसे ज्यादा है। लेकिन दलित और ओबीसी के प्रतिनिधित्व के नाम पर आम आदमी पार्टी बढ़त बना सकती है।

BY-Nirosha Singh