राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की 10 बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट
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अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय लेते हुए मध्यस्थता के जरिए हल निकालने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने यह 10 बड़ी बातें कही है..

Ayodhya dispute

1.  राम जन्मभूमि मस्जिद विवाद पर मध्यस्थता पर फैसला सुनाते समय चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि कोर्ट की निगरानी में मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय रहेगी।
2-  फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सी.पी.सी के नियम-8 के तहत हमें मामले को मध्यस्थता के लिए रेफर करने का अधिकार है, जो हम कर रहे हैं।

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3-  कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता की प्रकिया की शुरुआत चार सप्ताह में शुरू होनी चाहिए और आठ सप्ताह के अंदर इसे पूरा कर लिया जाना चाहिए।

4- शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार फैज़ाबाद में मध्यस्थों को सभी सुविधाएं प्रदान करे।

5 –  मध्यस्थ आवश्यकतानुसार और अधिक कानूनी सहायता ले सकते हैं।

6-  सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बुधवार को इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों को सुना था।

7-  निर्मोही अखाड़ा के अलावा अन्य हिन्दू संगठनों ने इस विवाद को मध्यस्थता के लिये भेजने के शीर्ष अदालत के सुझाव का विरोध किया था, जबकि मुस्लिम संगठनों ने इस विचार का समर्थन किया था।

8- सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद 2.77 एकड़ भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपील पर सुनवाई के दौरान मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया था।

9- संविधान की पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

10- मामले में निर्मोही अखाड़ा जैसे हिंदू संगठनों ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों – न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ, न्यायमूर्ति ए के पटनायक और न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी के नाम मध्यस्थ के तौर पर सुझाए जबकि स्वामी चक्रपाणी धड़े के हिंदू महासभा ने पूर्व प्रधान न्यायाधीशों – न्यायमूर्ति जे एस खेहर और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ए के पटनायक का नाम प्रस्तावित किया।