किचन गार्डन में हर्ब्स कैसे उगाएं

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अपने किचन गार्डन में हर्ब्स और वेजीटेबल उगाने का आइडिया बुरा नहीं है। समस्या तब होती है जब हमें उन्हें लगाने का सही तरीका पता नहीं होता। यहां हम आपको बता रहे हैं कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप बिना किसी की मदद से खुद अपना किचन गार्डन तैयार कर सकते हैं।

पुदीना

कैसे उगाएं: पुदीने के एक छोटे से गुच्छे को नीचे से लगभग दो इंच की लंबाई में काट लें। अब निचले हिस्से की पत्तियों को हटा लें और गांठ यानी पत्ती वाली जगह के नीचे से काट लें। अब तने को पानी के गिलास में रख लें। इसे तब तक हवा व रोशनी में रखें, जब तक इनमें जड़ें आने लगें। ऐसा होने में लगभग दो सप्ताह का समय लगता है। जैसे ही जड़ें निकलने लगती हैं, उन्हें लगभग 10 इंच गहरे गमले में रेतीली मिट्टी में बो दें। मिट्टी में नमी बनाए रखें। बहुत अधिक पानी न डालें। इस पौधे को हर रोज 5 से 6 घंटे की सूरज की रोशनी में रखना जरूरी है।

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इस्तेमाल: पुदीने की खुश्बू और फ्लेवर चटनी, शीतल पेय व सलाद में खासे पसंद किए जाते हैं। पुदीने का रस अपाचन और मरोड़ में लाभ पहुंचाता है। 2012 में बायोशिमी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पुदीने में मौजूद एक तत्व प्रोस्टेट कैंसर को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। पुदीना त्वचा के लिए फायदेमंद है। त्वचा के संक्रमण में भी इससे राहत मिलती है। इसीलिए इसे क्लिंजर व टोनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

तुलसी

कैसे उगाएं: तुलसी के बीजों को छोटी सी मटकी में मिट्टी में एक चौथाई इंच गहरे दबा दें। इस मिट्टी में रेत, सामान्य मिट्टी व खाद मिली होनी चाहिए। जब तक बीज फूटने न लगे, तब तक मिट्टी में नमी का बने रहना जरूरी है। इसमें पांच दिन से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। अब जैसे-जैसे दो से तीन पत्तियों के जोड़े बनते रहें, इन्हें 6 से 8 इंच के कंटेनर में बोएं। मिट्टी में नमी बनाए रखें। हर दिन पौधे को एक से दो घंटे की धूप दें।

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इस्तेमाल: आयुर्वेदिक दवाओं में तुलसी का काफी इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुरता होती है। साथ ही इससे रक्त में ग्लूकोज व शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है। उबलते हुए पानी में तुलसी की तीन से चार पत्तियां डाल कर इसकी भाप भी ले सकते हैं, जिससे श्वसन संबंधी संक्रमण को दूर करने में मदद मिलती है। तुलसी के रस का घर में छिड़काव करने से मक्खी व मच्छर दूर रहते हैं। ब्रिटेन में वर्ष 2009 में ब्रिटिश फार्मास्युटिकल कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए एक अध्ययन के अनुसार तुलसी से सूजन व जलन को 73% तक कम किया जा सकता है।

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लेमनग्रास

कैसे लगाएं: लेमनग्रास के डंठल को जार में एक इंच पानी डाल कर रखें। दो-तीन दिनों के भीतर जड़ों में स्प्राउट्स निकलेंगे। इन्हें हल्की मिट्टी में दबा दें। इनमें खूब पानी दें, पर मिट्टी पूरी तरह पानी में डूबी नहीं होनी चाहिए।

lemongrass trees
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उपयोग में लाएं: थाई और वियतनामी व्यंजनों में इस फ्लेवर का काफी इस्तेमाल किया जाता है। अनीता अग्रवाल के अनुसार, ‘ऐसे लोग जिन्हें कब्ज रहता है, वे चाय में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।’ लेमनग्रास की चाय पाचक ग्रंथि की सफाई करती है, जिससे मधुमेह होने की स्थिति में रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। वर्ष 2011 में प्रकाशित जर्नल ऑफ एथनोफार्मेकोलॉजी के अनुसार लेमनग्रास से तनाव को कम करने में भी मदद मिलती है।

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मेथी

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कैसे उगाएं: छोटे पौधे के रूप में इसे उगाने के लिए केवल पांच से छह दिन का समय लगता है। इसके बीजों को रुई और ऊन के गोले में फैला कर इन्हें रोशनी में रखें, पर सीधे सूरज की धूप इन पर नहीं पड़नी चाहिए। पानी सूखने के बाद ही इन पर पानी का छिड़काव करें।

इस्तेमाल: मेथी से ग्लिसमिक इंडेक्स काबू में रहता है और यह सूजन व जलन को भी कम करता है। ग्लिसमिक इंडेक्स भोजन में मौजूद विभिन्न तरह के काबरेहाइड्रेट के रक्त शर्करा पर होने वाले असर का मापक है। सरसों और मेथी को पीस कर पट्टी पर इसका लेप करके आर्थराइटिस में दर्द वाले जोड़ पर लगाने से आराम मिलता है। प्रसव के बाद महिलाओं के लिए मेथी का सेवन जरूरी बताया जाता है। इसमें मौजूद डायोज्गेनिन माताओं में अधिक दूध बनाता है। जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार मेथी की हर्बल चाय पीने से मांओं में अधिक दूध बनता है। कढ़ी, दाल, परांठा आदि भारतीय व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया ही जाता है।’

सरसों

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कैसे उगाएं: मेथी की तरह ही समान प्रकिया सरसों के लिए अपनाएं।
इस्तेमाल: सरसों की पत्तियों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स, विटामिन, मिनरल व फाइबर प्रचुरता में होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं। सरसों के स्प्राउट्स का सेवन ऑस्टिओपरोसिस और एनीमिया में राहत पहुंचाता है। हृदय रोगों, अस्थमा, आंत व प्रोस्टेट कैंसर में भी राहत मिलती है।’ जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार इससे एल्जाइमर्स रोग होने की आशंका भी कम हो जाती है।

सौंफ

कैसे उगाएं: बीजों को दस इंच गहरे गमले में मिट्टी में दबाएं। इस गमले को पॉलीथीन से ढंक दें। जैसे ही अंकुरण होने लगे, गमले को रोशनी में रख दें। पानी का छिड़काव मिट्टी सूखने पर ही करें।

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इस्तेमाल: सौंफ में मौजूद आयरन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। पाचन दुरुस्त रखने वाले इन्जाइम्स बाहर निकलते हैं। इससे पीरियड सिस्टम ठीक होता है।

धनिया

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कैसे उगाएं: सौंफ की तरह ही यही प्रक्रिया धनिये के साथ अपनाएं।
इस्तेमाल: धनिये को शीतल गुणों के कारण जाना जाता है। यह मधुमेह में भी लाभकारी है और कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। धनिये के एंटीसेप्टिक गुण मुंह के छाले व अल्सर में फायदा पहुंचाते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स आंखों के लिए लाभकारी हैं। यह रूमेटॉयड आर्थराइटिस के लिए उपयोगी सूजन को भी कम रखने में यह असरकारी है। ताजगी से भरपूर यह औषधि चीजों के फ्लेवर को भी बढ़ा देती है। आप इसे किसी भी सब्जी, सूप, दही, चावल में इस्तेमाल कर सकते हैं।