साधना की फिल्में और हेलेन का डांस, जानिये कैसा था बॉलीवुड की इस अदाकारा का सफर और कैसे बीता अंतिम वक्त

Sadhana Nayyar

साधना की फिल्में और उनमें हेलेन की कमाल की भूमिकाएं..दरअसल साधना की ज़्यादातर फिल्मों में हेलन नाचती -गाती दिखती थीं….या कहें कि हेलेन ने जिन गीतों पर अपनी कमर मटकायी है उसमें अधिकांश गीत साधना की फिल्मों के ही हैं। उनमें भी जिस गीत पर हेलन आज भी नाचना चाहती है वह साधना की इसी फिल्म ‘इन्तकाम’ का कैबरे गीत ‘आ… जाने जां मेरा यह हुस्न जवां’ पर हेलेन का कैबरे आज के सारे साल्सा जैसे डांसेज को फेल करता है। यह गाना हर युग की डांस पार्टियों का इनसिगनिया है, जिसे कोरियोग्राफ किया था पी.एल. राज ने।

साधना की फिल्में और उनके गानों पर हेलेन का कैबरे…याद करें इंतकाम

https://youtu.be/WQHvDm9b9iI

हेलेन का कमाल

इस गीत को संगीत देने वाले कोई और नहीं बल्कि लक्ष्मीकांत प्यारे लाल थे जबकि वाद्यों की जुगलबंदी सुनकर कभी-कभी आर.डी. बर्मन का भ्रम होता है। इस गाने को आशा भोसले ने नहीं लता मंगेशकर ने गाया था। शुरू-शुरू में इस गाने को गाने के लिए वह तैयार नहीं थीं। उनके मुताबिक यह गाना संगीत की परिभाषाओं में हल्का गीत है। लेकिन उसके बाद उन्होंने कैबरे पर सुर लगाना शुरू कर दिया।

https://youtu.be/s_GV9MPuj80

साधना की फिल्में और हेलेन…‘केसे रहूं चुप’

इसी फिल्म का एक और गाना शराबी आवाज़ में गाकर उन्होंने खुद को फिल्मफेयर नोमिनेशन का हिस्सा बना लिया। ‘केसे रहूं चुप’ जो शराबी की हिचकी वाली आवाज है, लता मंगेशकर का प्रयोग गजब का है। इसके अतिरिक्त ‘हम तुम्हारे लिये’, ‘गीत तेरे साज का’ भी काफी मकबूल हुए। इसके सभी गीतों को कलमबद्ध किया था राजेंद्र कृष्ण ने।

अपने ज़माने की मशहूर अदाकार साधना एक ज़माने में सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री थी लेकिन आखिरी वक्त में वह तंगहाली में थीं। साधना बेहद खूबसूरत थीं और उन्हें बॉलीवुड के एक स्पेशल हेयर कट साधना कट देने के लिये जाना जाता है। ये स्टाइल इतना मशहूर हुआ कि 60 और 70 के दशक में तो हर लड़की साधना की तरह हेयर स्टाइल रखना चाहती थीं। बीच में वह बीमार हो गई और विदेश इलाज कराने गई थीं…

https://youtu.be/5eNqwidOf34

साधना ने फैशन जगत को दिया था नया हेयर कट –साधना कट

https://youtu.be/gpTtZYmp3So

1969 में रिलीज उनकी फिल्म इंतकाम ने काफी कमाई की। देश में ही उसने 1.7 करोड़ और विदेश में 3.5 करोड़ रुपये कमाये। उस जमाने में करोड़ की कमाई करना टेढ़ी खीर थी लेकिन इस फिल्म ने साधना की शानदार वापसी की। जिस साधना ने जमाने को ‘साधना कट’ दिया, चूड़ीदार कौर कुर्ते का रिवाज दिया, उसी साधना की मौत बड़े ही दर्दनाक हालात में हुई। बताया जाता है कि उन्हें कैंसर था।

साधना की फिल्में हैं यादगार, 1955 में पहली बार साधना को मिला ब्रेक–फिल्म थी श्री 420

साधना को पहला ब्रेक 1955 में आई फिल्म ‘श्री 420’ से मिला। फिल्म हिट रही और इसमें साधना के काम को भी नोटिस किया गया। ‘लव इन शिमला’, ‘प्रेम पत्र’, ‘एक मुसाफिर एक हसीना’, ‘वो कौन थी’ और ‘मेरा साया’ जैसी कई ऐसी फिल्में रहीं जिनमें साधना के काम को काफी सराहा गया और वो सुपरहिट भी रहीं।

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आखिरी वक्त में अकेली थीं, कैंसर से पीड़ित थीं

https://youtu.be/gpTtZYmp3So

माया के ढेर पर बैठी साधना, आशा भोसले के फ्लैट पर किरायेदार के रूप में रहती थीं। उन्हें अंतिम समय में कैंसर रोगियों के लिए रणवीर कपूर के साथ देखा गया था एक फैशन शो में। इससे पहले वह गुमनामी के अंधेरों में जी रही थीं। वह अपने दर्शकों के बीच उसी पुरानी इमेज के साथ जिंदा रहना चाहती थी, इसलिए उन्होंने कभी किसी फोटोग्राफर को अपनी तस्वीर नहीं लेने दी।

इन दोस्तों ने दिया था साथ

अंतिम समय तक वह नंदा, वहीदा रहमान व आशा पारेख जैसे दोस्तों के साथ संपर्क में थीं। चलते-चलते फ्लैश बैक के पाठकों को बता दूं कि साधना अपने जमाने की उन तमाम हीरोइनों की अपेक्षा सबसे ऊंची फीस वसूलती थी। यानी सबसे महंगी हीरोइन लेकिन उनकी फिल्में प्रोड्यूसरों के लिए कमाई की गारंटी थीं। ले्किन आखिरी वक्त में शायद वे बेहद तंगी और तकलीफ में थीं…