सरकार ने 5 अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा छीनी

Srinagar: All Parties Hurriyat Conference Chairman Mirwiaz Umar Farooq with senior Hurriyat leader Bilal Gani Lone and Abdul
Srinagar: All Parties Hurriyat Conference Chairman Mirwiaz Umar Farooq with senior Hurriyat leader Bilal Gani Lone and Abdul Gani Bhat addressing a press conference at Hurriyat headquarters in Srinagar on Saturday. PTI Photo(PTI12_29_2012_000139B) *** Local Caption ***

पुलवामा हमले के बाद अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा छीन ली गई है। गृह मंत्रालय के आदेश के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हुर्रियत और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, अब्दुल गनी बट्ट, बिलाल लोन, फजल हक कुरैशी, शब्बीर शाह की सरकारी सुरक्षा वापस ले ली है। इसके अलावा इन्हें मिल रही सारी सरकारी सुविधाएं छीन ली गई हैं। मीरवाइज उमर फारूक ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का चेयरमैन है। बता दें कि काफी समय से इनकी सुरक्षा छीन लेने की मांग हो रही थी।

गिलानी का नाम नहीं

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हालांकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन के इस आदेश में पाकिस्तान परस्त और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का नाम नहीं है। प्रशासन के इस फैसले के बाद आज शाम तक पाकिस्तान और आतंक परस्त इन नेताओं को दी गई सारी सुरक्षा, सारी सरकारी सुविधाएं वापस ले ली जाएंगी। सरकार के इस निर्णय के बाद अब किसी भी अलगाववादी नेता को किसी भी वजह से सरकारी खर्चे पर किसी तरह की सुरक्षा या सुविधा मुहैया नहीं कराई जाएगी।

10 साल पहले दी गई थी  सुरक्षा

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रिपोर्ट के मुताबिक हुर्रियत के इन अलगाववादी नेताओं को राज्य सरकार ने लगभग 10 साल पहले सुरक्षा मुहैया कराई थी, जब ये नेता घाटी में कथित तौर पर आतंकियों के निशाने पर आए थे। भारत सरकार इन अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। गृह मंत्री ने 15 फरवरी को ही कहा था कि इन नेताओं की सुरक्षा वापस ली जाएगी। सिंह ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में कुछ तत्वों का आईएसआई और आतंकी संगठनों से नाता है, इनकी सुरक्षा की समीक्षा होनी चाहिए।

छिन गई कारें, बख्तरबंद

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जम्मू-कश्मीर प्रशासन के इस आदेश के बाद इन्हें राज्य सरकार की ओर से मिली गाड़ियां, कारें वापस ले ली जाएंगी. सरकारी सूत्रों ने कहा कि पुलिस इस बात की समीक्षा करेगी कि क्या इन पांच अलगाववादी नेताओं के अलावा किसी दूसरे अलगाववादी नेता को सरकारी सुरक्षा मिली है, अगर समीक्षा में ऐसे किसी भी नेता का नाम आता है तो उसकी भी सुरक्षा और सरकारी सुविधा वापस ली जाएगी।

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