बच्चों को दें खुशमिजाज़ी की विरासत, ताकी मुस्कुराता रहे बचपन

Happy-Kids-Eating
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बच्चों को दें खुशमिजाज़ी की सीख और माहौल भी ताकी हंसता मुस्कुराता बचपन उन्हें पॉज़िटिव सोच से भरे। एक रिसर्च के मुताबिक खुशी में बाहरी फैक्टर महज 10 फीसदी भूमिका निभाते हैं, जबकि 90 फीसदी खुशी खुद इंसान पर निर्भर है। अहम बात यह कि आप कितने खुश हैं, यह इस पर भी निर्भर करता है कि आपके पैरंट्स कितने खुशमिजाज़ थे।

दरअसल, खुशी की जो 90 फीसदी निर्भरता अपने आप पर है, उसका 50 फीसदी हमें अपने पैरेंट्स से जींस के रूप से मिलता है । जबकि 40 फीसदी हम अपनी मेहनत और विशेष प्रयासों से हासिल करते हैं। रिसर्च में यह भी सामने आया है कि इन ख़ुशियों का हमारी जमीन-जायदाद या उपलब्ध सुख-सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं है। यही वजह है कि अगर आप अपने बच्चों को खुशमिजाज बनाना चाहते हैं तो ख़ुद खुशमिजाज रहकर उन्हें एक खुशगवार ज़िन्दगी का तोहफ़ा दे सकते हैं |

बच्चों को दें खुशमिजाज़ी की विरासत क्योंकि ख़ुशी का कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं होता

happy kids
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यूँ भी कहते हैं कि कहते हैं कि ख़ुशी का कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं होता । पर बातों और हालातों को किस तरह लिया जाय, समझा जाए और जीया जाय, ये बात काफ़ी हद तक ख़ुशी पाने की राह तो सुझाती ही है । दुनिया में सब कुछ हमारे मन के मुताबिक नहीं हो सकता लेकिन ऐसा बहुत कुछ है जिसके मुताबिक मन को समझाकर खुशियाँ अपनी ख़ुद की झोली में डाली जा सकती हैं ।ऐसी छोटी छोटी बातों की शुरुआत बचपन से हो तो बहुत अच्छा है ।क्योंकि ख़ुशी के ये आसान से फ़ॉर्मूले बच्चों की पर्सनैलिटी का हिस्सा बनें, इसकी कोशिश तो होनी ही चाहिए |

बच्चों को दें खुशमिजाज़ी का माहौल, हार जीत दोनों को जीयें

boy happy
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जिंदगी में सबसे ज्यादा दुःख देने वाली बात आमतौर पर यही होती है कि कुछ मनचाहा ना हुआ हो । ऐसे में बच्चों को इस बात से रूबरू करवाएं कि वे जीत ही नहीं हार को भी स्वीकार कर सकें । सफल होने पर ख़ुशी की सकारात्मक दस्तक को महसूस कर सकें तो असफल होने पर किसी और की ख़ुशी को सेलिब्रेट करने और खुद को संभालने का जज़्बा भी रखें ।

बच्चों को घर से लेकर स्कूल और खेल के मैदान तक, ज़िन्दगी में होने वाली हर घटना को पॉजिटिव ढंग से लेना सिखाएं ।उनका यह समझना जरूरी है कि हर उतर-चढाव के साथ कोई ना कोई बेहतरी जरूर जुड़ी होती है ।ज़िन्दगी के हर रंग को जीते हुए कोशिश यह रहनी चाहिए हमेशा कुछ कुछ ना करते जाना है ।नतीजे में कभी सीख मिलेगी तो कभी सक्सेस ।यानी जो हैं, जैसे हैं, ख़ुद को सही दिशा में बढ़ाते जाना है ।

बच्चों को दें खुशमिजाज़ी, अपने पास रखें खुशियों की चाबी

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि हैप्पीनेस की बड़ी वजह यह है कि आप जो हैं, वही बने रहें। बच्चों के मन यह बात शुरुआत से ही घर कर जाए तो अच्छा है कि उन्हें दूसरों की ख़ुशी के लिए ख़ुद को नहीं बदलना है ।बच्चों को रोबोट बनने की बजाय यह सिखाएं कि अपनी ख़ुशियों की चाबी खुद के पास रखें । किसी और के रिमोट कंट्रोल से उनका जीवन ना चले बल्कि उन्हें अपनी ख़ुशी और समझ से अपने आप को बेहतर बनाना है ।ऐसा बिहेवियर सही मायने में उनके मन को संतुष्टि देगा ।अपने आप के प्रति लगाव पैदा करेगा । जिसके बिना कोई खुश नहीं रह सकता |

नेगेटिविटी से दूर रहें

kids-happy
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कई बार देखने में आता है बच्चों में कम उम्र में ही बुराई, इर्ष्या, गुस्सा और बदला लेने की भावना डेरा जमा लेती है । पेरेंट्स को चाहिए कि उन्हें समय रहते इस नेगेटिविटी से बाहर निकालें ।ऐसी नकारात्मकता ज़िन्दगी की हर ख़ुशी छीन लेती है ।मन का सुकून और औरों के प्रति सम्मान सिरे से गायब हो जाता है । बच्चों को यह जरूर समझाएं कि दुनिया के हर इंसान में अच्छी-बुरी बातें और आदतें होती ही है । इसलिए आप किसी के व्यक्तित्व से क्या सीखते हैं, उसे किस तरह देखते हैं, यह आपके अपने नज़रिए पर निर्भर करता है।

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यह जिंदगी को ख़ुशियों से भरने वाला सुंदर फ़ॉर्मूला है कि वे हर किसी से अच्छी बातें सीखने और आत्मसात करने की कोशिश करें । नेगेटिविटी से दूर रहने वाले लोग नाकामयाबी या डिप्रेशन से भी जल्दी उबरते हैं । वे हार मानकर रुकते या थकते नहीं बल्कि परेशनियों से जूझकर आगे बढ़ने की हिम्मत रखते हैं । यही वजह है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही पॉजिटिव सोच और व्यवहार को अपना साथी बना लेना चाहिए ।

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सकारात्मक लोग हर परिस्थिति में जीने की वजह तलाश लेते हैं । उम्मीदों के साथ जीने की यही चाह ख़ुशियां पाने और आगे बढ़ते जाने का हर हाल में काम आने वाला फ़ॉर्मूला है।

भूलो और आगे बढ़ो

Happy family. Mother and child daughter.
Happy family. Mother and child daughter.

भविष्य में क्या होने वाला है इसकी चिंता करने के बजाय बच्चों को अपने आज की छोटी-छोटी खुशियों को जीने की सीख देवें । उन्हें अपने आने वाले कल को भूलकर आज को खुशहाल बनाने की बात कहें । अगर कोई गलती हुई है या किसी मोर्चे पर पीछे रह गए हैं तो अफ़सोस करने के बजाय उन बातों को भूलकर आगे बढ़ने का जज़्बा जगाएं । ऐसा होने पर ना केवल उनकी ऊर्जा खुद को आगे के हालतों के लिए तैयार करने में लगती है बल्कि उनके दिल पर गलतियों और असफलताओं का बोझ भी नहीं रहता ।

यह खुशहाल ज़िन्दगी की नींव है कि कि बच्चे हर हाल में ख़ुशी को चुनें और बढे चलें । यह सीख उनकी परवरिश का हिस्सा होनी चाहिए । बच्चों को पढ़ाई या लाइफस्टाइल को लेकर दूसरों से तुलना करने से भी बचने की सलाह दें । हौसले के साथ आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि वे अपने दिल की सुनें । ख़ुद को कभी कमतर ना आँकें । ज़िन्दगी को ख़ुशगवार बनाने के लिए जरूरी है कि बीते को भूल आगे कुछ बेहतर करने की सोची जाए । इसीलिए हर लम्हे को जीते हुए आज को संवारने और बीती बातों को भूलने की सीख ज़रूर दें ।

बच्चों को दें खुशमिजाज़ी,खुशियाँ बाँटना सिखाएं

Mom and Daughter Having Fun
Mom and Daughter Having Fun

किसी को ख़ुशी देना खुश रहने का सबसे सुंदर फ़ॉर्मूला है ।बच्चों को सिखाएं कि वे किसी जरूरतमंद की सहायता करें । बुजुर्गों की मदद करें, उनका सम्मान करें ।दूसरों में कमियाँ देखने के बजाय उनमें अच्छाइयां खोजें और उनकी तारीफ़ करें । मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि खुशी असल में सुविधाओं और चीज़ों में नहीं बल्कि हमारी आदतों में होती हैं। हमारी अच्छी आदतें औरों को भी खुश करती हैं और हमें भी संतुष्टि और सुख देती हैं ।

यह माना जाता है कि खुश रहने और खुशियाँ बांटने वाले लोगों का सपोर्ट सिस्टम बहुत अच्छा है । इसीलिए वे कभी अकेले नहीं पड़ते ।सकारात्मक सोच और हंसमुख व्यवहार से सभी के दिल में उनकी ख़ास जगह बनती जाती है । उनका सोशल जुड़ाव अच्छा होता है । जो भरोसा बढ़ाता है । अपने रिश्तों में आपका विश्वास और आपसे जुड़े लोगों के दिल में आपके प्रति भरोसा होना, ख़ुशियों को कई गुना बढ़ा देता है ।

स्मार्ट गैजेट्स के इस दौर में बच्चों को सामाजिक बनाएं । हँसी -ख़ुशी सबसे बात करने की सीख दें । खुद अपने आप तक सिमटकर जीने की संस्कृति ज़िन्दगी को एक वर्चुअल ख़ुशी से जोड़ रही है । जिसके असल कोई मायने ही नहीं हैं । इसीलिए असली दुनिया के लोगों से जुड़कर बच्चे खुशियाँ भी बांटें और खुशहाल भी बनें ।