Covid से जंग हारे फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह, Post Covid Side Effects से नहीं उबर पाये

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फ्लाइंग सिख पद्मश्री मिल्खा सिंह का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। मिल्खा सिंह कोरोना वायरस से तो उबर चुके थे लेकिन पोस्ट कोविड साइडइफेक्ट्स से नहीं उबर सके। पीजीआई के प्रवक्ता प्रो.अशोक कुमार ने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की तमाम कोशिशें की वह शुरुआत में रिकवर कर रहे थे, लेकिन वीरवार रात को मिल्खा सिंह का ऑक्सीजन स्तर गिर गया और उन्हें बुखार भी आ गया था। उन्हें सांस लेने में लगातार दिक्कत हो रही थी।

डॉक्टरों की टीम में थी बेटी मोना भी

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मिल्खा सिंह के इलाज में लगी सीनियर डॉक्टरों की टीम के साथ उनकी बेटी मोना भी शामिल थी। परिवार ने उन्हें वेंटिलेटर लगाने के लिए मनाकर दिया था, परिवार का मानना था कि वह काफी कमजोर हो चुके हैं और इससे उनकी तकलीफ और बढ़ेगी। बता दें बुधवार को उनकी कोरोना रिपोर्ट नेगटिव आ गई थी, जिसके बाद उन्हें कोविड अस्पताल के कार्डियक आइसीयू में शिफ्ट कर कर दिया था। वहीं उनका इलाज चल रहा था। वह तेजी से रिकवर कर रहे थे, लेकिन उम्र और शरीरिक कमजोरी की वजह से वह जिंदगी की जंग हार गए। उनके निधन से पूरे खेल जगत में शोक लहर है।

17 मई को कोरोना रिपोर्ट पॉजटिव आई थी

गौरतलब है कि मिल्खा सिंह की 17 मई को कोरोना रिपोर्ट पॉजटिव आई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां कोरोना की रिपोर्ट नेगटिव आने के बाद 31 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। इसके बाद वह सेक्टर -8 स्थित अपने घर में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आराम कर रहे थे। तीन जून को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और अॉक्सीजन लेवल गिरने के बाद उन्हें पीजीआइ में भर्ती करवाया गया था। इससे पहले 13 जून को उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का कोरोना महामारी से निधन हो गया था।

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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक जीताने वाले पहले भारतीय

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मिल्खा सिंह ने साल 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स में उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में रिकॉर्ड बनाए. इसके बाद उसी साल टोक्यो में आयोजित हुए एशियन गेम्स में उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया. साल 1958 में ही इंग्लैंड के कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में मिल्खा ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 400 मीटर की रेस  में गोल्ड मेडल अपने नाम किया. उस समय आजाद भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक जीताने वाले वे पहले भारतीय थे.

400 मीटर की रेस में उनका ये रिकॉर्ड 40 साल बाद जाकर टूटा

1958 के एशियाई खेलो में मिली सफलता के बाद मिल्खा सिंह को आर्मी में जूनियर कमीशन का पद मिला. साल 1960 में रोम में आयोजित ओलंपिक खेलों में उन्होंने 400 मीटर की रेस में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन अंतिम पलों में वे जर्मनी के एथलीट कार्ल कूफमैन (German athlete Karl Kaufmann) से सेकेंड के सौवें हिस्से से पिछड़ गए थे और कांस्य पदक जीतने से मामूली अंतर से चूक गए थे. इस दौरान उन्होंने इस रेस में पूर्व ओलंपिक कीर्तिमान भी तोड़ा और 400 मीटर की दौड़ 45.73 सेकेंड में पूरी कर नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया. 400 मीटर की रेस में उनका ये रिकॉर्ड 40 साल बाद जाकर टूटा.

1960 के रोम ओलंपिक में जीता गोल्ड

1960 के रोम ओलंपिक और टोक्यो में आयोजित 1964 के ओलंपिक में मिल्खा सिंह अपने शानदार प्रदर्शन के साथ दशकों तक भारत के सबसे महान ओलंपियन बने रहे. 1962 के जकार्ता एशियाई खेलों में मिल्खा सिंह ने 400 मीटर और चार गुना 400 मीटर रिले दौड़ में भी गोल्ड मेडल हासिल किया था.