Father’s Day Spl: बच्चों को समझाएं, पर समझदारी आपकी भी ज़रूरी

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Father’s Day Spl :फादर्स डे पर जानें बच्चों को समझाने, उनसे दोस्ती करने के टिप्स

Father’s Day Spl: पिता अपनी और घर में दूसरों की सारी जरूरतें पूरी करते हैं और इसके लिये हर दन मेहनत करते हैं। खासकर बच्चों की क्योंकि बच्चे मां से मांगते ज़रूर है लेकिन उम्मीद की नज़रें पिता पर ही होती है। हर दिन जब पिता घर लौटते हैं तो बच्चे पापा की तरफ इस नज़र से देखते हैं कि वे क्या लाये हैं। आज के स्मार्ट पापा उनकी जरूरतों को पूरा करने के साथ उनकी बातों आैर इरादों को भी समझते हैं। बच्चे की हर ख्वाहिश पूरी करें लेकिन दोस्ताना व्यवहार रखें। सबसे अहम बात कि उसकी सुनें…

Father’s Day Spl : बच्चे की भी सुनें

बच्चे की बात सुनना बहुत ज़रूरी है, उसकी फीलिंग्स को समझें। आप कितना भी जरूरी काम कर रहे हों, उसे छोड़कर बच्चे की बात सुनें। यदि आपका काम इतना जरूरी है तो उसे कहिए कि आप काम खत्म होने के बाद उसकी बात जरूर सुनेंगी। काम खत्म होने के बाद उससे बात जरूर करें।

जरूरी है कम्यूनिकेशन

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पैरेंट्स खासतौर से मां का बच्चे के साथ रेग्युलर कम्यूनिकेशन ज़रूरी है। इसे फिट इन टू इच अदर कहते हैं। इससे आप दोनों एक दूसरे की साइकोलॉजी को समझ सकते हैं जिससे एक- दूसरे की समस्या को समझने में आसानी रहती है। आमतौर पर बच्चे मां के साथ ज्यादा खुले होते हैं और मां से अपनी हर बात बिना झिझक और डर के कह पाते हैं। लेकिन पिता को भी उनसे घुल मिलकर बात करनी चाहिये। मां पिता दोनों की जिम्मेदारी है कि समय मिलने पर उसके साथ आधा- एक घंटा उसके साथ बात करें।

समय साथ बिताएं

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यदि माता-पिता दोनों वर्किंग हैं इसलिए आपके पास संडे का दिन  ही बचता है, इन्जॉय करने के लिए। आप कितने ही व्यस्त क्यों न हों लेकिन एक घंटा तो उसके लिए निकाल ही सकते हैं। उसके साथ कुकिंग कीजिए या कोई मूवी देखने जाइए । उसके साथ अंताक्षरी, कैरम, चेस, लूडो खेलिए या फिर उसके दोस्तों को घर बुलाकर डांस पार्टी कीजिए।

Father’s Day Spl पढ़ाई में मदद

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पढाई में उसकी मदद कीजिए। पढ़ाते समय ध्यान रखें कि आपकी कोई बात या डांट उसे बुरी न लगी हो। बच्चे को डांटना ज़रूरी है पर वहां भी उसकी भावनाओं की कद्र करें। एक बात और, उसे पढ़ाने के दौरान आप मोबाइल को किनारे रख दें, न कि उसे पढ़ाई के लिए डांटते हुए खुद मोबाइल पर लगे रहें।

Father’s Day Spl छोटे-छोटे काम करने दें

बच्चे को आत्मनिर्भर बनाइए। छोटी- छोटी बातों में उसे प्रोटेक्ट मत कीजिए। यह मत सोचिए कि वह अभी छोटा है इसलिए यह काम कैसे करेगा। उसे घर और बाहर के छोटे- मोटे काम करवाइए। यदि आपका बच्चा 5-6 साल का हो गया है तो धीरे- धीरे उसके अंदर अकेले सोने की आदत का विकास करें। बड़े होने के बाद भी बच्चे मम्मी- पापा के साथ सोएं, यह अच्छी बात नहीं है।

अच्छे संस्कार डालें

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कहा जाता है कि मां ही बच्चे को अच्छे संस्कार देती है लेकिन पिता इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। संस्कार देना अकेली मां का काम नहीं पिता की भी जिम्मेदारी है। इसलिए बच्चे के साथ समय ज़रूर बिताएं। कुछ पारंपरिक चीजें हैं, जिन्हें फॉलो करने में कोई बुराई नहीं। इन पारंपरिक बातों और रिवाजों को बच्चे के साथ बांटें। इस तरह से उन्हें अपने संस्कार आैर रिवाजों का पता होगा, जो बच्चे के सही विकास के लिए जरूरी है।

तुलना नहीं

दूसरे बच्चों के साथ उसकी तुलना न करें। इससे बच्चा खुद को उपेक्षित महसूस करता है। फलां ने अपनी क्लास में टॉप किया है, वह टीवी एक घंटे से ज्यादा नहीं देखता है, अपने मां- बाप की सारी बातें मानता है। यह सब बेकार की बातें हैं, जो आप उससे करती हैं। आपके लिए दूसरे बच्चों को देखने से अच्छा है कि आप अपने बच्चे में सकारात्मक चीजें देखें। संभव हो कि वह बहुत अच्छा गिटार बजाता हो, अच्छे से अपना खाना खाता हो, टीवी पर कार्यक्रम देखकर उससे सीख लेता हो। हर बच्चा अलग तरह का होता है आैर उसका नज़रिया भी। उसके नजरिये को देखने आैर समझने की कोशिश करें।

बार -बार न टोकें

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उससे व्यावहारिक अपेक्षांए रखें ताकि उस पर अनचाहा दवाब न रहे। आप यदि यह सोचती हैं कि बच्चा पूरे दिन पढ़ता रहे आैर टीवी बिल्कुल न देखे, मोबाइल पर गेम न खेले तो यह संभव नहीं है। आज गैजेट्स के इस युग में आप यदि यह अपेक्षा रखते हैं तो यह सौ फीसद गलत है। हां, हर चीज के लिए समय बांधने का हक आपको है।

सख्ती करें लेकिन रूडनेस नहीं

छूट देने के साथ कुछ नियम भी बनाएं ताकि बच्चा अपनी जिम्मेदारी समझे। आपको या किसी अन्य चीज को टेकन फॉर ग्रांटेड न समझे, इसके लिए थोड़ी सख्ती भी जरूरी है। हर चीज के लिए समय बांधना अच्छा है लेकिन बंधन ऐसा न हो कि उसकी सांस ही अटक जाए, इसका ध्यान भी आपको ही रखना है।

सम्मान करना सिखाएं

उसे बड़ों की अपने माता पिता की इज्जत करना सिखाएं। बच्चे अकसर पिता से डरते हैं, इसलिए मां का फर्ज बनता है कि  वह उन दोनों के बीच अच्छे रिश्ते बनाने की कोशिश करे।बच्चे को गले लगाएं उसे कहें कि वह अपने पापा को गले लगाए, उनके अधिक दिनों तक घर से बाहर रहने पर उन्हें बतायें कि उन्होंने उनको कैसे मिस किया। ये छोटी -छोटी बातें रिश्ते मज़बूत बनाती है।