नवजात की आंखों की देखभाल कैसे करें, ये हैं घरेलू तरीके

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नवजात की आंखों की देखभाल कैसे करें यह मां के सामने बड़ी समस्या होती है। दरअसल मां बनना जितनी खुशी देता है, उतनी ही बड़ी चुनौती लेकर आता है और वह चुनौती है शिशु की सही देखभाल की। आंखें हमारा सबसे नाजुक अंग है। खासकर बच्चों में आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। कुछ बच्चों में दृष्टि दोष होता है। कुछ बच्चे आंख रगड़ते हैं। कुछ की पलकों पर रूसी चिपकी रहती है या उनमें स्टाई हो जाती है। ऐसे ही कुछ नेत्र रोग में लेजी आई सिंड्रोम, भैंगापन, रतौंधी, रेटिनोपेथी, मायोपिया, हाइपरोपिरा जैसी तमाम समस्या होती है। उनमें इस तरह की कोई समस्या न पनपे इसके लिये आयुर्वेदिक तरीके से उनकी आंखों की केयर करना बहुत मददगार साबित हो सकता है। आपको बता रहे हैं कुछ आयुर्वेदिक तरीके जिनकी मदद से बच्चों की आंखों की अच्छी तरह देखबाल कर उन्हें कई तरह के नेत्र रोग से बचाया जा सकता है।

क्या हो आहार

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6 महीने तक के नवजात की आंखों की देखभाल के लिये उसे मां का दूध ही पिलाएं। मां का दूध ही उसका सर्वोत्तम आहार है। इसलिये मां को विटामिन सी युक्त आहार का अच्छी मात्रा में लेना चाहिए। अगर विटामिन ए की कमी के कारण कुछ बच्चों को जरॉफ्थल्मिया की समस्या होती है। इसमें आंखें सूख जाती हैं, आंखों में खुजली और कॉर्निया पर धब्बे दिखाई देते हैं। इससे ग्रस्त बच्चों को रात में ठीक से दिखाई नहीं देता। 6 महीने की उम्र के बाद जब बच्चा कुछ खाने लगे तो उसे पपीता, गाजर और आम जैसे विटामिन ए युक्त पीले फल खिलाने चाहिए। इनसे उनकी रौशनी तेज़ होगी।

 सफाई का रखें खयाल

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नवजात शिशु की आंखें साफ पानी और कॉटन से साफ करें। कभी-कभी गोनोकोकी नामक बैक्टीरिया के इनफेक्शन के कारण शिशु की आंखों से पानी या पस के रिसाव की समस्या हो जाती है। इससे हमेशा के लिए उसकी आंखों की रोशनी भी जा सकती है। अगर कोई ऐसा लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लें।

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आंखों की मसाज भी ज़रूरी

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छह महीने की उम्र से कुछ बच्चों की आंखों से पानी निकलने की समस्या शुरू हो जाती है। दरअसल आंखों और नाक के बीच एक नली होती है, जिसके रास्ते आंखों का पानी नाक में चला जाता है। लेकिन कुछ बच्चों की यह नली बंद होती है, जिससे उन्हें यह समस्या होती है। मालिश के दौरान आंखों और नाक के बीच के हिस्से को उंगलियों से दबाना चाहिए। ऐसा करने से यह समस्या दूर हो जाती है। अंतिम विकल्प के रूप में सर्जरी ही इसका उपचार है। कैमोमाइल ऑयल बच्चों की आंखों को कई तरह से फायदा देता है। एक कप पानी लेकर कैमोमाइल ऑयल की कुछ बूंदों के साथ उबाल लें। इसे थोड़ा ठंडा कर दें। इसके बाद इसमें कॉटन का नरम कपड़ा डुबोकर बच्चे की आंखों पर रखें। इससे उसे आराम मिलेगा।

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इलायची वाला दूध

दूध को उबालकर उसमें दो छोटी इलायची पीसकर डाल दें। इसे तोड़ा ठंडा होने पर बच्चे की पीने के लिये दें।

एक कप गर्म दूध में एक चौथाई छोटा चम्मच मक्खन डालकर, आधा चम्मच मुलेठी पाउडर और एक चम्मच शहद डालकर मिलाकर बच्चों को थोड़ा-थोड़ा पिला सकते हैं।

संक्रमण होने पर

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सुनने में शायद कुछ लोगों को अजीब लगे लेकिन आंखों के संक्रमण की समस्या के लिये ब्रेस्ट मिल्क यानी मां के दूध को उत्तम माना जाता है।

कैमोमाइल ऑयल को पानी के साथ सिंकाई के लिये इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे संक्रमण काफी हद तक ठीक होता है।

आईब्राइट प्लांट में आंखों का संक्रमण, खुजली और जलन कम करने वाले गुण होते हैं। एक छोटा सा पौधा लेकर 2 कप पानी में उबालकर इसमें कॉटन बॉल डुबोएं और इसे बच्चे की आंखों पर रखें। राहत मिलेगी।

टी बैग में कई एंटी-माइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। ये आंखों का संक्रमण रोकने में मददगार माने जाते हैं। टी बैग को गर्म पानी में डुबोकर रखें, निचोड़ कर बच्चों की आंखों पर रखने से उन्हें संक्रमण में आराम मिलेगा।

चमेली को फूल को नेचुरल कूलेंट माना जाता है जो कुदरती तरीके से आंखों को कूल रखता है और हर तरह की जलन में आराम देता है। चमेली के फूल ( jasmine flower) को रत भर साफ पानी (distilled water) में डुबोकर सुबह इसकी एक बूंद आंख में डाल सकते हैं।

बच्चों की पलकें सिकुडी हुई दिखाई देती हैं और पलकों में खिंचाव का भी आभास होता है। यह समस्या पलकों की तैलीय ग्रंथियों में सूजन के कारण होती है। इसे ब्लेफराइटिस कहते हैं। कपड़े को प्रेस से हलका गर्म करके आंखों की सिंकाई करना इसका आसान उपचार है।