बिहार में कहर बना चमकी बुखार, जानें इसके लक्षण और उपचार

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कहर बना चमकी बुखार: आपको याद होगा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफ्लाइटिस यानी दिमागी बुखार की वजह से जाने कितने मासूम काल के गाल में समा गये हैं। इन दिनों कुछ इसी तरह का बुखार बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में भी कहर बरपा रहा है। दरअसल यहां इन दिनों सैकड़ों बच्चे चमकी बुखार की चपेट में हैं। इस खतरनाक बुखार की चपेट में आकर कई मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं। मुज़फ्फरपुर के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कई बच्चों की हालत गंभीर है। डॉक्टरों ने परिजनों को बच्चों का विशेष ख्याल रखने की सलाह देते हुए दिन में 2 से 3 बार स्नान कराने को कहा है।

अगर आप इस भयंकर बीमारी के खतरे को टालना चाहते हैं तो इसके लक्षण और उपचार के बारे में पूरी जानकारी रखें.

चमकी बुखार के लक्षण

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कहर बना चमकी बुखार
  • लगातार तेज बुखार चढ़े रहना
  • बदन में लगातार ऐंठन होना
  • दांत पर दांत दबाए रहना
  • सुस्ती चढ़ना
  • कमजोरी की वजह से बेहोशी
  • चिउंटी काटने पर शरीर में कोई गतिविधि न होना

कहर बना चमकी बुखार, यह है उपचार

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चमकी बुखार से पीड़ित इंसान के शरीर में पानी की कमी न होने दें. बच्चों को सिर्फ हेल्दी फूड ही दें. रात को खाना खाने के बाद हल्का फुल्का मीठा जरूर दें. सिविल सर्जन एसपी सिंह के मुताबिक चमकी ग्रस्त बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर की कमी देखी जा रही है. फिलहाल जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. यहां चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था की गई है. डॉकटर्स का कहना है कि बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर बार तरल पदार्थ देते रहें ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो.

इन बातों का रखें ध्यान

  • बच्चों को जूठे व सड़े हुए फल न खाने दें
  • बच्चों को उन जगहों पर न जाने दें जहां सूअर रहते हैं
  • खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धुलवाएं
  • पीने का पानी स्वच्छ रखें
  • बच्चों के नाखून न बढ़ने दें
  • गंदगी भरे इलाकों से दूर रखें
    गर्मी के मौसम में फल और खाना जल्दी खराब होता है. घरवाले इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे किसी भी हाल में जूठे और सड़े हुए फल नहीं खाए. बच्चों को गंदगी से बिल्कुल दूर रखें. खास कर गांव-देहात में जो बच्चे सूअर और गाय के पास जाते हैं गर्मियों में दूरी बना कर रखें. खाने से पहले और खाने के बाद हाथ ज़रूर धुलवाएं. बच्चे नहीं मान रहे हैं तो कान पकड़ कर हाथ धुलवाएं. साफ पानी पिएं, बच्चों के नाखून नहीं बढ़ने दें. और गर्मियों के मौसम में धूप में खेलने से मना करें.

बीमारी का इलाज क्या है?

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चमकी बुखार से पीड़ित इंसान के शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए. हेल्दी फूड के साथ थोड़ी-थोड़ी देर पर मीठा देते रहना चाहिए. डॉक्टरों के मुताबिक चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों में शुगर की कमी देखी जाती है. इसीलिए इस बात का भी खास ध्यान रखना चाहिए. बच्चों को थोड़-थोड़ी देर में लिक्विड फूड भी देते रहे ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो. दूसरी तरफ डॉक्टर इस बीमारी का कारगर इलाज़ नहीं ढूंढ पाए हैं. चूंकि इस बीमारी में मृत्युदर सबसे ज्यादा 35 प्रतिशत है. इसीलिए डॉक्टर्स सावधानी को ही दूसरा इलाज बनाते है.

कमज़ोर होती है बच्चों की इम्युनिटी

बच्चों के शरीर की इम्युनिटी कम होती है, वो शरीर के ऊपर पड़ रही धूप को नहीं झेल पाते हैं. यहां तक कि शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चे जल्दी हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हो जाते हैं. कई मामलों में बच्चों के शरीर में सोडियम की भी कमी हो जाती है. हालांकि कई डॉक्टर इस थ्योरी से इनकार भी करते हैं. 3 साल पहले भी जब मुज़फ्फरपुर में दिमागी बुखार से बच्चे मर रहे थे तब मामले की जांच करने मुंबई के मशहूर डॉक्टर जैकब गए. उन्होंने भी इस थ्योरी पर जांच करने की कोशिश की, लेकिन वो सफल नहीं हो पाए.

गर्मी में फैलता है बुखार

डॉक्टरों की मानें तो गर्मी और चमकी बुखार का सीधा कनेक्शन होता है. पुरानें कुछ सालों के पन्नों को पलट कर देखें, तो इससे ये साफ हो जाता है कि दिमागी बुखार से जितने बच्चे मरे हैं, वो सभी मई, जून और जुलाई के महीने में ही मरे हैं. लेकिन और ज्यादा गहराई से देखेंगे तो पता चलेगा कि मरने वालों में ज्यादातर निम्न आय वर्ग के परिवार के ही बच्चे थे. आसान शब्दों में कहें तो जो बच्चे भरी दोपहरी में नंग-धड़ंग गांव के खेत खलिहान में खेलने निकल जाते हैं. जो पानी कम पीते हैं. तो सूर्य की गर्मी सीधा उनके शरीर को हिट करती है. तो वे दिमागी बुखार के गिरफ्त में पड़ जाते हैं.