महानायक की महावापसी

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रितेश कुमार झा

एक बार फिर महानायक की महावापसी हो गई है भारतीय राजनीति में। वो 16 मई 2014 की तारीख थी…पूरे देश में मोदी नाम की लहर चली थी…मोदी का मैजिक कुछ ऐसा चला था कि 30 साल बाद पहली बार किसी पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इस बार वो तारीख 23 मई थी…एग्जिट पोल के नतीजे सामने आने के बाद से ही लग रहा था कि पूरे मुल्क में नमो ब्रांड की लहर चल रही है….लेकिन औपचारिक परिणाम का इंतजार था। 23 मई की सुबह जब रुझान आने शुरू हुए तब पता चला कि वो लहर नहीं कहर है…वो केवल लहर नहीं थी…मोदी की लहर सुनामी बन गई और सारे विरोधियों को अपने साथ बहाकर ले गई।

मोदी का मैजिक

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इस बार मोदी का मैजिक महामैजिक में तब्दील हो गया। इतिहास फिर से रचा गया। लेकिन वो केवल इतिहास नहीं रहा…बल्कि महाइतिहास मन गया। मोदी के महामैजिक ने देश की जनता के दिलो-दिमाग पर इस कदर जादू किया कि उन्होंने एकतरफा उनके नाम पर बीजेपी को वोट डाल दिए। बीजेपी ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया और पहले से भी ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में शानदार…जानदार…वापसी की। उनकी अगुवाई में एनडीए को भी जबर्दस्त कामयाबी मिली। ऐसा केवल तीसरी बार हुआ है जब कोई पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में कामयाब हुई हो।

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सुनामी में बहे विरोधी

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परिणाम आने से पहले तक ये आशंका जताई जा रही थी कि अगर बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला तो पार्टी को सत्ता हासिल करने के लिए जोड़-तोड़ करनी पड़ेगी। यही नहीं सहयोगी दलों का दवाब भी झेलना पड़ेगा। लेकिन जब ईवीएम से रुझान आने शुरू हुए तब यह साफ हो गया कि मोदी ने फिर से अपने दम पर बीजेपी की नैया पार लगा दी। तमिलनाडु और केरल को छोड़कर नमो की सुनामी ने हर राज्य में विरोधियों को बहाकर रख दिया।

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प्रंचड बहुमत

modi 23

बीजेपी की अगुवाई में एनडीए को बहुमत मिलने या सबसे बड़ी पार्टी बनने का अनुमान तो सबको था…लेकिन ये प्रचंड बहुमत में बदल जाएगा….इसका अंदाजा बड़े से बड़े राजनीतिक पंडितों को भी नहीं था। हालांकि कुछ एग्जिट पोल ने इसकी भविष्यवाणी की थी। लेकिन तब राजनीतिक पंडितों और विपक्षी दलों ने इसकी खिल्ली उड़ाई थी…लेकिन गुरुवार की सुबह जब ईवीएम का पिटारा खुला तो उन्हें इस बात का अंदाजा हो गया कि मोदी का मैजिक बरकरार है।

बालाकोट एयर स्ट्राइक ने बदला माहौल

हालांकि चुनाव की तारीख का ऐलान होने से पहले तक या फिर चुनाव के शुरुआती चरणों तक बीजेपी बेरोजगारी, महंगाई और राफेल के मुद्दे पर घिरी हुई नजर आ रही थी। लेकिन पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में एयर स्ट्राइक के मुद्दे को बीजेपी ने अपना सबसे बड़ा मुद्दा बना लिया। मोदी, शाह और बीजेपी के तकरीबन सभी नेता अपनी सभा में इस मुद्दे को उठाते रहे। राष्ट्रवाद के इस मुद्दे ने मतदाताओं पर काफी असर किया और उन्होंने मोदी को फिर से मौका देने का फैसला लिया। जबकि बेरोजगारी, किसान, राफेल और न्याय को अपना मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस बाद में अपने मुद्दों से भटक गई। उसके नेता मुद्दे उठाने की जगह पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमला करते रहे…उनकी जुबान फिसलती रही….मोदी ने इसे भी अच्छी तरह भुनाया। बाकी विपक्षी दलों का भी यही हाल रहा। वे मुद्दे उठाने में नाकाम रहे।

जनादेश के बाद चुनौतियां भी…

नतीजा बीजेपी की प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी का रास्ता साफ हो गया। हालांकि जनादेश जितना बड़ा होता है चुनौतियां उतनी ही बड़ी होती हैं। बीजेपी और एनडीए को फिर से बहुमत मिला है तो अब उसे खुद को साबित करके दिखाना होगा। उसे सबका साथ सबका विकास के मुद्दों पर फोकस करके जनता की कसौटियों पर खरा उतरना होगा। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। हां इतना तय है कि मोदी-शाह की जोड़ी ने हारी हुई बाजी पलटकर रख दी…इतिहास की धारा को मोड़ कर रख दिया।