‘एकला चलो रे’ क्यों सबके दिल के करीब है टैगोर की यह रचना ?/ video

RABINDERNATH TEGORE
रबिन्द्रनाथ टैगोर

lyrics in bangla
(जोदी तोर डाक सुने केउ ना आसे तोबे एकला चलो रे तोबे एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे)
जोदी केउ कोथा ना कोए ओ रे … ओ ओभागा केउ कोथा न कोए …
(जोदी सोबाई थाके मुख फिराए सोबाई कोरे भोई )
तोबे पोरान खुले …
(ओ तुई मुख फूटे तोर मोनेर कोथा एकला बोलो रे)
जोदी सोबाई फिरे जाए ओ रे ओ ओभागा …

सोबाई फिरे जाई (जोदी गोहान पोथे जाबार काले केउ फिरे ना चाय )
तोबे पोथेर काँटा … (ओ तुई रोक्तो माखा चोरोनतोले एकला डोलो रे )
जोदी आलो ना धोरे, ओ रे … ओ ओभागा आलो ना धोरे
(जोड़ी झोर-बादोले आंधार राते दुयार देये घोरे)

तोबे बज्रानोले … आपोन बुकेर पाजोर जालिये निये एकला जोलो रे
(जोदी तोर डाक सुने केउ ना आसे तोबे एकला चलो रे तोबे एकला चलो, एकला चलो एकला चलो, एकला चलो रे)

lyrics in hindi
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
ओ तू चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे

RABINDERNATH TEGORE

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे

यदि कोई भी ना बोले ओरे ओ रे ओ अभागे कोई भी ना बोले
यदि सभी मुख मोड़ रहे सब डरा करे
तब डरे बिना ओ तू मुक्तकंठ अपनी बात बोल अकेला रे
ओ तू मुक्तकंठ अपनी बात बोल अकेला रेतेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे

यदि लौट सब चले ओरे ओ रे ओ अभागे लौट सब चले
यदि रात गहरी चलती कोई गौर ना करे
तब पथ के कांटे ओ तू लहू लोहित चरण तल चल अकेला रे

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
यदि दिया ना जले ओरे ओ रे ओ अभागे दिया ना जले
यदि बदरी आंधी रात में द्वार बंद सब करे
तब वज्र शिखा से तू ह्रदय पंजर जला और जल अकेला रे
ओ तू हृदय पंजर चला और जल अकेला रे

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
ओ तू चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे।

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