Don’t let the virtual world spoil your child-पबजी पर 10 लाख उड़ाने वाला छात्र ऐसे पहुंचा घर

Water Game Real Stuntman Run
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Don’t let the virtual world spoil your child- हाल ही में महाराष्ट्र में एक ऐसा चौंकाने वाला सामने सामने आया जिसने ऑनलाइन गेम और वर्चुअल वर्ल्ड में जी रहे बच्चों की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिये। 16 वर्षीय छात्र ने अपनी मां के अकाउंट से दस लाख रुपये खाली कर दिए। यह रकम उसने गुपचुप PUBG खेलने के लिए उड़ा दिए। इस बात की भनक पिता को लगी तो उन्होंने उसे फटकार लगाई। डांट के बाद वह घर छोड़कर भाग गया।
पेरेंटस के लिये नोट लिखा कि- ‘मैं वापस कभी नहीं आऊंगा’।

Don’t let the virtual world spoil your child-यूं लड़के तक पहुंची पुलिस

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माता-पिता को ‘अलविदा’ नोट मिला तो वे घबरा गए। उन लोगों ने तुरंत एमआईडीसी थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस भी ऐक्शन में आई और छात्र को ढूंढने में लग गई। तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस ने लड़के के ठिकानों पर नजर रखी। इंस्पेक्टर महेश कुमार के नेतृत्व में अपराध शाखा की एक टीम ने लड़के के लापता होने के एक दिन बाद बुधवार को अंधेरी (पूर्व) में महाकाली इलाके में उसका पता लगाया।

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प्यार से वापस लाई पुलिस

अब सवाल यह है कि आखिर बच्चे इस तरह की लत का शिकार कैसे हो रहे हैं। उनकी यह हरकतें वाकई चिंता का विषय बन गई है | आउटडोर गेम्ज न खेलना, स्कूल न जाना, ऑनलाइन दिन भर मौजूद रहना उन्हें ऐसा बना रहा है। क्योंकि फिजिकल एक्टिविटीज के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य की बेहतरी में स्कूल और खेल का जो योगदान है वह बीते दो सालों में लगभग खत्म हुआ है। विशेषज्ञ भी मानते है कि खेल के मैदान में उतर कर बच्चों का मानसिक तनाव कम होता है और एकेडेमिक फ्रंट पर बेहतर परफॉर्म करने के मौके बढ़ जाते हैं । हमउम्र साथियों के साथ मिलकर खेलने और हार जीत को जीने का भाव उन्हें सिर्फ अपने आप तक सिमटे रहने के दायरे से बाहर लाता है। समझना मुश्किल नहीं कि बचपन में ही पैदा होने वाली सामाजिकता की ऐसी सकारात्मक सोच बच्चों को जिम्मेदार और सहयोगी नागरिक भी बनाती है |

Don’t let the virtual world spoil your child-अनुशासन भूले बच्चे

स्कूल जाने के लिये सुबह 6 बजे उठना, तैयार होकर नाश्ता करके निकलना, नहाना और ब्रश करना जैसी आदतें बच्चों के रूटीन से निकल गई हैं। नियमित दौर से जुड़कर बच्चे समय प्रबंधन भी सीखते हैं और अनुशासन भी। किसी भी काम को नियमित करने और बेहतर बनने आदत उनके व्यवहार का हिस्सा बन जाती है । जो बीते करीब 2 साल में कहीं खो चुकी हैं। इसीलिए अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को खेलों से जोड़ने की हर संभव कोशिश करें । इनडोर या बच्चे की पसंद का कोई एक आउटडोर गेम खेलने में रूचि पैदा करना उनके रोजमर्रा के शेड्यूल को प्रोडक्टिव बनाता है।

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बच्चों को वर्चुअल दुनिया से निकालें

आजकल बच्चे खेल भी स्क्रीन के मैदान में ही खेलते हैं। स्मार्ट स्क्रीन तक सिमटी खेलों की दुनिया उनके लिए हर तरह से घातक तो है ही कई बार अपराधियों के जाल में भी फंसा देती है। कुछ खेल ऐसे भी हैं जो बच्चों के लिए जानलेवा बन जाते हैं । घंटो स्क्रीन में ताकते रहने से उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ता है। स्मार्ट गैजेट़स को बच्चे जिस तरह पकड़कर बैठते हैं, उनका पोस्चर खराब होता है। आज के समय में ऑनलाइन पढ़ाई के तनाव और व्यस्तता के चलते बच्चों खेलों से बिलकुल दूर हो गए हैं।