Jammu Drone हमले के बाद सुरक्षा पर सवाल, भारत के लिए भी ज़रूरी है Israel जैसा एयर डिफेंस सिस्‍टम Iron Dome?

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Israel जैसा एयर डिफेंस सिस्‍टम क्या भारत में भी ज़रूरी है? यह सवाल उठे हैं जम्मू एयरबेस पर हमले के बाद। देश की सुरक्षा एजेंसियां सवालों के घेरे में हैं। इस हमले के बाद ड्रोन्‍स के जरिए ऐसे ही और हमलों को लेकर आशंका बढ़ गई है। अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर हमले में इस्तेमाल ड्रोन सेना के रडार से कैसे बच निकले? जबकि सुरक्षा विशेषज्ञों ने पहले भी ड्रोन हमलों को लेकर आगाह क‍िया था। अब जरूरत है कि भारत के पास भी ऐसे ड्रोन हमलों से निपटने का इंतजाम होना चाहिए। इसके लिए इजरायल का एयर डिफेंस सिस्‍टम ‘आयरन डोम’ एक बड़ी सीख है।

भारत में पहली बार ड्रोन के जरिए आतंकी हमला

Israel जैसा एयर डिफेंस सिस्‍टम-Iron Dome

अभी यह साफ नहीं है कि हमले के लिए किस तरह के ड्रोन्‍स यूज किए गए। हालांकि सूत्र बताते हैं कि ये हमला बाजार में उपलब्‍ध आम ड्रोन्‍स के जरिए किया गया। उनसे छेड़छाड़ कर उन्‍हें इम्‍प्रोवाइज्‍ड एक्‍सप्‍लोसिव डिवाइस (IED) ले जाने लायक बनाया गया। ऐसे ड्रोन्‍स बाजार में करीब 20 हजार रुपये में उपलब्‍ध हैं और 5-8 किलो वजन ले जा सकते हैं। इस हमले को आतंकियों की ओर से एक ट्रायल के तौर पर देखा जा रहा है।

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क्या है इज़रायल का Iron Dome System?

  • एक Air Defence System जो रॉकेट्स और मिसाइल को बेअसर करता है।
  • शॉर्ट रेंज ग्राउंड-टू-एयर डिफेंस सिस्टम
  • इसमें लगे हैं रडार और तामिर इंटरसेप्टर मिसाइल
  • किसी भी रॉकेट या मिसाइल को ट्रैक करके रास्ते में ही तबाह कर देता है
  • 2011 में पहली बार इस्तेमाल में आया।
  • इजराइली फर्म राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्री ने बनाया ।
  • सिस्टम को बनाने में अमेरिका ने की थी तकनीकी और आर्थिक मदद दी।

Israel जैसा एयर डिफेंस सिस्‍टम Iron Dome ऐसे करता है काम


  • मीडियम और लॉन्ग रेंज थ्रेट के लिए दो अलग सिस्टम काम करते हैं।
  • इन्हें डेविड्स स्लिंग और ऐरो कहा जाता है।
  • इससे रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार के साथ-साथ विमान, हेलिकॉप्टर और मानव रहित हवाई वाहनों का मुकाबला किया जा सकता है।
  • इस सिस्टम का सक्सेस रेट 90% से ज्यादा है।
  • 1000 से ज्यादा रॉकेटस में से 90% को आयरन डोम ने हवा में ही खत्म किया।
  • 2.5 मील से ज्यादा रेंज के रॉकेट पर आयरन डोम ज्यादा कारगर नहीं ।

जम्मू आर्मी कैंप्स में हाई अलर्ट घोषित

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कालूचक में आर्मी बेस के पास पहला ड्रोन रात में 27 से 28 जून तकरीबन साढ़े 11 बजे दिखा। वहीं देर रात तकरीबन डेढ़ बजे एक और यूएवी उड़ता हुआ देखा गया। पुलिस के मुताबिक जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे पर कालूचक-पूरामंडल रोड के पास दोनों यूएवी की मौजूदगी दिखी है। इसके बाद भारतीय सेना के जवानों ने 20-25 राउंड फायरिंग की। लेकिन अंधेरे का फायदा उठाते हुए दोनों ड्रोन बचकर निकल गए। कालूचक मिलिट्री स्टेशन पर ड्रोन की लोकेशन पता करने के लिए बड़ा सर्च ऑपरेशन भी चलाया गया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे जम्मू और खास तौर से आर्मी कैंप्स में हाई अलर्ट घोषित किया गया है

Israel जैसा एयर डिफेंस सिस्‍टम

दुनियाभर में ‘ड्रोन अटैक’ आतंकी संगठनों के लिए एक लो कॉस्ट ऑप्शन बनकर उभरे हैं। भारत में पहली बार किसी महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने को ड्रोन से निशाना गया है। मगर दुनियाभर में बीते दो सालों में ड्रोन के आक्रामक इस्तेमाल को देखते हुए जरूरत है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी उसी के हिसाब से अपनी रणनीति बनाएं जिससे भारत में दोबारा किसी सैन्य ठिकाने पर ऐसा कोई ड्रोन हमला न हो सके।

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