बच्चों के सामने न करें झगड़ा, मानसिक सेहत पर पड़ता है असर

Family_argument

बच्चों के सामने कभी झगड़ा न करें । इसका असर उनकी मानसिक सेहत पर भी पड़ता है। अगर आप और आपका पार्टनर बच्चों के सामने लड़ते हैं तो इससे बच्चों की मानसिकता पर दुष्प्रभाव पड़ता है। पति-पत्नी के आपसी झगड़ों से बच्चों का कोमल मन आहत होता है और उन्हें ठेस पहुंचती है। किसी बच्चे के लिए उसके माता-पिता उसके रोल मॉडल होते हैं।

बच्चे जब माता-पिता को लड़ते देखते हैं तो उनके दिल और दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है। यह बात उन्हें भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर प्रभावित करती है। यहां हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि माता-पिता के बीच झगड़ों को देखकर बच्चे किस प्रकार प्रभावित होते हैं।

असुरक्षा की भावना- Insecurity

kids

जब माता-पिता बच्चों के सामने लड़ते हैं तो बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। माता-पिता आपस में झगड़ते समय जब एक-दूसरे को घर से निकालने की बात करते हैं तो इसका भी बच्चों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्हें लगता है कि झगड़े के कारण माता-पिता में से किसी एक का साथ छूट जाएगा।

नकारात्मकता का भाव-Sense of negativity

माता-पिता के झगड़ों के कारण अक्सर बच्चों में नकारात्मकता का भाव पैदा हो जाता है। ऐसे परिवारों में बच्चे बड़े होकर दयनीय हो जाते हैं। बच्चे माता-पिता की बात नहीं मानते। कई बार तो ऐसे बच्चे समस्याएं पैदा करने वाले और आपराधिक प्रवृत्ति (Criminal tendency ) के भी बन सकते हैं।

यह भी पढ़ें: https://www.indiamoods.com/follow-these-5-tips-to-protect-children-from-viral-infection/

एकाग्रता की कमी- Lack of concentration

PARENTS-FIGHTING

माता-पिता का बार-बार लड़ना बच्चों की एकाग्रता को भी प्रभावित करता है। बच्चा स्कूल में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता। जिसका असर उसकी पढ़ाई पर पड़ता है। इससे उसमें आत्मविश्वास की कमी आ जाती है। वो लोगों के सामने जाने से कतराता है और उदासीन हो जाता है।

अपराध-बोध- guilty feeling

कई बार माता-पिता लड़ते वक्त बच्चे को लड़ाई का कारण बताने लगते हैं। इससे बच्चे को ये लगने लगता है कि उसके कारण ही झगड़े होते हैं। वो अपराध बोध की भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। उसके आत्मसम्मान को भी चोट पहुंचती है, जिससे खुद पर उसका भरोसा कम होने लगता है।

बातें छुपाने लगते हैं

बच्चे माता-पिता के झगड़ों से बचने के लिए, अपनी कई बातें छुपाने लगते हैं। उन्हें लगता है कि अगर वो अपनी बात बतायेंगे तो फिर से झगड़ा न होने लगे। वो झूठ बोलने लगते हैं। मनगढ़ंत कहानियां बनाने लगते हैं। जिसका असर उनके भविष्य पर पड़ता है। वे माता-पिता से बचने या भागने के रास्ते तलाशने लगते हैं।

स्वाति गुप्ता