Dilip Kumar ने अंग्रेजों को खिलाए थे Sandwich, पहली तनख्वाह मिली थी 36 रुपए महीना

dilip kumar

अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar ने) मराठी बहुत अच्छी बोलते थे क्योंकि उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा महाराष्ट्र में की थी। दिलीप कुमार पुणे से अच्छी तरह से वाकिफ थे। उनकी स्कूली शिक्षा नासिक के देवलाली में बार्न्स स्कूल में हुई थी। लेकिन उनकी अंग्रेजी पर भी उतनी ही पकड़ थी जितनी मराठी, हिंदी, और उर्दू पर। अपनी अच्छी अंग्रेजी के बल पर ही उन्हे पहली नौकरी हासिल हुई।

कैंटीन में की नौकरी.. अंग्रेजों को खिलाते थे सैंडविच

मुंबई में दिलीप कुमार के पिता का फलों का बिज़नेस था। एक बार अपने पिता सरवर खान से बहस के बाद उन्होंने मुंबई छोड़ दिया और पुणे आ गए। यहां पर वो नौकरी तलाशने लगे। अपनी अच्छी अंग्रेजी के चलते उन्हें ब्रिटिश आर्मी के कैंटीन में असिस्टेंट की नौकरी मिल गई। उन्हें मैनेजर के पद पर रखा गया। जहां उनका मेहनताना 36 रुपए महीने था। वो कैंटीन में सैंडविच बनाते थे और अंग्रेजों को उनके सैंडविच खूब भी पसंद आते था। इस बात का जिक्र उन्होंने अपनी AUTOBIOGRAPHY THE SUBSTANCE AND THE SHADOW में किया है।

जेल भी जा चुके हैं दिलीप कुमार

साल 1940 के दौरान देश में आजादी को लेकर नए-नए आंदोलन हो रहे थे। एक दिन एक आयोजन में भारत की आज़ादी की लड़ाई की हिमायत करने के चलते उन्हें गिरफ़्तार होना पड़ा ।

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Dilip Kumar ने आजा़दी पर क्या बोले…

उन्होंने भाषण देते हुए कहा कि आज़ादी की लड़ाई जायज़ है और ब्रिटिशों की वजह से ही भारत में सारी मुसीबतें पैदा हो रही हैं। इस क्रांतिकारी भाषण पर ख़ूब तालियां बजीं। लेकिन कुछ देर बाद ब्रिटिश सैनिक हथकड़ी लेकर आए और दिलीप साहब को गिरफ़्तार कर अपने साथ ले गए।

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इसके बाद दिलीप कुमार को पुणे की ‘यरवदा जेल’ भेज दिया गया। दिलीप साहब को जेल में उन क़ैदियों के साथ रखा गया था जो सत्याग्रही थे। इस दौरान उन्हें पता चला कि सरदार बल्लभभाई पटेल भी इसी जेल में क़ैद हैं। देश की आज़ादी को लेकर जेल के सभी क़ैदी भूख हड़ताल पर थे तो दिलीप साहब ने भी उनका साथ देने की ठान ली और भूख हड़ताल पर बैठ गए।

Richa R singh