Developmental Reading Disorder in kids- ऐसे पहचानें लक्षण, कारण और कराएं सही इलाज

अटेंशनल डिस्लेक्सिया
अटेंशनल डिस्लेक्सिया

Developmental Reading Disorder बच्चों से जुड़ा मानसिक रोग है। इसे छोटे बच्चों की मेंटल हेल्थ से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर इसका असर 3 साल की उम्र के बाद सामने आता है। जब बच्चा पढ़ने-लिखने और बोलने या याद रखने जैसी समस्याओं से घिरता है। इस रोग के कारण बच्चा letter identity dyslexia का भी शिकार हो सकता है।

क्या आपके बच्चे को शब्द पहचानने में दिक्कत है?

kids

बच्चों को अटेंशनल डिस्लेक्सिया की समस्या हो सकती है। यह समस्या होने पर बच्चा अक्षर व शब्द को पहचानने में दिक्कत महसूस करता है।
बच्चा लेटर आइडेंटिटी डिसलेक्सिया का भी शिकार हो सकता है। इस समस्या में बच्चे को शब्दों को पहचानने के साथ-साथ उनका उच्चारण लेने में भी दिक्कत महसूस होती है।

ऐसे पहचानें समस्या

  • letter identity dyslexia-बच्चा शब्दों को पढ़ पाने में असमर्थ होता है। शब्द को आगे पीछे लिखना शुरु कर देता है।
  • phonological dyslexia में एक जैसे दिखने वाले शब्दों को लिखने पढ़ने में परेशानी महसूस करता है।
  • cementitious access dyslexia में बच्चे को कुछ भी याद र खने या किसी शब्द को याद रखने में दिक्कत होती है। शब्द को पढ़ने में कॉन्सनट्रेशन नहीं बन पाती।
  • इसके अलावा भी इस रोग के कुछ गंभीर प्रकार हैं। Deep dysplasia or surface dyslexia भी इसी से जुड़े हैं।

symptoms of dyslexia

  • किसी की आवाज को ठीक से ना सुन पाना।
  • नई चीज को सीखने और समझने में परेशानी महसूस करना।
  • किसी भी चीज में ध्यान लगाने में कठिनाई महसूस करना।
  • शब्दों को समझने में परेशानी या याददाश्त का कम हो जाना। -चीजें याद रखने में दिक्कत ।
  • इसके अलावा कभी -कभी बच्चे को कमजोरी महसूस होती है।
  • सांस लेने में दिक्कत महसूस करना
  • दर्द होना और स्कूल फोबिया जैसी समस्या हो जाती है।
  • वहीं जब बच्चे की उम्र 13 वर्ष या उससे बड़ी होती है तब लक्षणों के रूप में उसे शब्दों का गलत उच्चारण,
  • नई भाषा सीखने में दिक्कत,
  • अलग-अलग शब्दों को जोड़ने में परेशानी
  • पढ़ने की गति धीमी, लोगों के सामने न पढ़ पाना

कारण

  • 1 – दिमाग में चोट लगना
  • 2 – स्ट्रोक के कारण
  • 3 – किसी बात का सदमा लगने के कारण
  • 4 – जन्म के बाद बच्चे का वजन कम होने के कारण
  • 5 – बच्चों का देर से बोलने के कारण
  • 6 – समय से पहले शिशु का जन्म हो जाना यानी प्रीमेच्योर डिलीवरी होने के कारण

कैसे निपटें इस रोग से…

सबसे पहले बच्चे की हर एक्टिविटी को गौर से देखें। हर दिन जितना भी वक्त मिले, उसके साथ बात करने, उसे चीज़ों के बारे में बताने और उसका सही उच्चारण करने के लिये प्रेरित करें। इससे भी ज़रूरी है कि परिवार में किसी को इस तरीके की समस्या है तो हो सकता है कि बच्चा भी इस समस्या का शिकार हो जाए। इसलिये वक्त रहते डॉक्टर से सलाह लें। और अगर अगर बच्चे को किसी प्रकार का मानसिक रोग है तो सबसे पहले इस रोग की पहचान करें और डॉक्टर से उसका उचित इलाज करवाएं।

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