डिलिवरी नहीं ग्रांड फिनाले, ऐसे करें अपनी Postpartum केयर

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डिलिवरी नहीं ग्रांड फिनाले, बल्कि अपनी केयर आयुर्वेद के साथ करें, ताकी बॉडी बहुत कम महिलाएं जानती हैं कि प्रेगनेंसी से पहले और बाद में किस तरह की देखभाल की ज़रूरत होती है। कुछ मांएं डिलिवरी को ग्रांड फिनाले मानकर बहुत जल्दी से वापस पुराने वाली लय में लौटना चाहती हैं लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक इसमें बहुत जल्दबाज़ी सही नहीं है।

post delivery

आयुर्वेद के मुताबिक मां बनना महिला के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव है। साईंस में इसे ट्रांज़िशन कहते हैं। खासकर इस दौरान बॉडी में वात दोष प्राकृतिक तरीके से बढ़ जाता है। इस दौरान वे कई सारी शारीरिक और मानसिक पीड़ा और हार्मोनल बदलावों से गुज़रती हैं इसलिये शरीर की ऊर्ज़ा भी कम हो जाती है। आयुर्वेद में कई सारे सुझाव और समाधान सुझाए गए हैं जिनकी मदद से नयी माताएं ( new mums) शरीर में किसी भी तरह की गड़बड़ी, वात,कफ, पित्त दोष को दुरुस्त कर सकती हैं।

सुबह-सवेरे उठना ( early Wake up )

baby mother
Mid adult mother holding newborn baby girl, smiling

 आयुर्वेद में वैसे तो हर व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठने की सलाह दी जाती है लेकिन प्रेगनेंट महिलाओं के लिये इसे खासतौर पर इसलिये उत्तम माना गया है क्योंकि इस समय बाहर ताज़ा हवा बहती है, जो मां और बच्चे के स्वास्थ्य के लिये कई कारणों से बेहतर बताई जाती है। सुबह -सवेरे वायुमंडल में वात ऊर्ज़ा होती है जो बॉडी के हर पार्ट को जगा देती है, उनमें एनर्जी भर देती है। प्रेगनेंट महिलाओं के लिये यह थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि इस अवस्था में बहुत नींद आती है लेकिन दो चार बार कोशिश करने से यानी सूर्योदय से पहले जागने से, आप हवा में विशेष ऊर्जा के संपर्क में आ जाएंगे और दिन भर के लिये शरीर में सकारात्मक ऊर्जा भर जाएगी।

चेहरे को अवश्य धोएं-wash your face

जागने पर चेहरे को साफ और गुनगुने पानी से धोने के कई फायदे आयुर्वेद में है। चेहरा हमारे शरीर का सबसे ज्यादा खुला रहने वाला ( most exposed area) भाग होता है। इस पर पानी के छींटे पड़ने से जहां चेहरे पर ताज़गी आती है वहीं आंखें और त्वचा दिन भर की गर्मी, सर्दी, धूप, प्रदूषण और बहुत सारी बाहरी चुनौतियों के लिये तैयार होती है।

गर्म पानी के साथ नींबू ( lukewarm water with lemon juice)

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आयुर्वेद कहता है कि मां बनने के दौरान जितनी सावधानियों और देखभाल की ज़रूरत महिला को होती है, उतना ही ज़रूरी है कि डिलिवरी के बाद के तीन से चार हफ्तों तक उन्हें भरपूर आराम और केयर मिले।  प्रेगनेंसी में शरीर में कई तरह के बदलाव होने से कब्ज़, गैस और मॉर्निंग सिकनेस की दिक्कतें होती हैं। ऐसे में सुबह के समय उल्टी आना या सुस्ती रहना आम बात है। इसलिये दिन की शुरूआत एक गिलास गर्म पानी ( lukewarm water) से करें। इसमें थोड़ा सा नींबू का पानी मिलाएं। नींबू विटामिन्स और मिनरल्स का अच्छा स्रोत है। जबकि गर्म पानी से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट और पेरिस्टालिसिस ( gastrointestinal tract and peristalsis)  दुरुस्त रहते हैं। सोने से जो मांसपेशियों में खिंचाव आता है वह दूर हो जाता है। शरीर लचीलापन अपनाने लगता है।

प्राणायाम करें- do pranayam

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गर्भवती महिलाओं को आयुर्वेद में प्राणायाम और सूर्य नमस्कार करने को कहा जाता है। बेड से पांव ज़मीन पर रखते ही झटके के साथ न उठें बल्कि धीरे -धीरे चहलकदमी करते हुए एक आसन की पॉज़िशन बनाएं। फिर हल्का-फुल्का प्राणायाम शुरू करें।

 नाश्ते में लें सात्विक भोजन ( healthy breakfast)

आयुर्वेद में प्रेगनेंट महिलाओं को थोड़े-थोड़े अंतराल में सादा और सात्विक भोजन खाने की सलाह दी जाती है। ये प्राचीन पद्धति कहती है कि पोषक तत्वों से भरपूर, शाकाहारी भोजन के अलावा, दूध और फल के साथ गाय के घी को खाने में शामिल करने से बच्चे का विकास सही तरीके से हो पाता है। यहां आहार के साथ व्यवहार को जोड़ने की परंपरा भी गिनाई जाती है।