Covid 19, कोरोना वायरस के म्यूटेशन से जुड़े रैपिड सवालों का रैपिड जवाब

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Covid 19 कितना घातक है। अब तक आप जान चुके होंगे। अप्रैल 2021 में Covid 19 ज़िदगियां लील रहा है। इससे जुड़े तमाम सवाल आपके ज़ेहन में उठ रहे होंगे। इनका हल यहां-वहां से नहीं लें। ऐसी जानकारी घातक हो सकती है।कोरोना वायरस के म्यूटेशन से जुड़े रैपिड सवालों का रैपिड जवाब इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल द्वारा दिए गए-

सवाल – Covid 19, स्ट्रेन और वेरिएंट में क्या अंतर है? और कोविड के संदर्भ में इसका कब प्रयोग किया जाता है?


जवाब – तकनीकी रूप से स्ट्रेन एक है। जबकि वायरस को समझने के लिए वैरिएंट या वायरस की वंशावली अधिक बेहतर शब्द कहा जा सकता है।

सवाल – क्या किसी भी वायरस के लिए म्यूटेट होना एक सामान्य प्रक्रिया है?


जवाब – जी हां, यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जब से उनकी उत्पत्ति हुई, मानव शरीर की इम्यूनिटी में भी म्यूटेशन होता रहता है।

सवाल – Covid 19, म्यूटेशन या डबल म्यूटेशन कोरोना वैक्सीन की प्रभावकारिता पर क्या असर डालता है?


जवाब – अभी तक इसकी कोई प्रमाणित जानकारी नहीं है, अभी पुष्टि करने के लिए पर्याप्त परिणाम आने बाकी है।

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सवाल – क्या भारत में कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार वायरस के नये वेरिएंट को कहा जा सकता है और यह कैसे असर कर रहा है?

जवाब – भारत के कई राज्यों में म्यूटेंट की वजह से कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जैसे की दिल्ली एनसीआर और पंजाब में म्यूटेंट बी. 1.1.7, और महाराष्ट्र के कुछ जिलों और दिल्ली में म्यूटेंट बी.1.617 का प्रभाव देखा गया। लेकिन मरीजों पर म्यूटेड वायरस का अधिक गंभीर असर नहीं देखा गया। संक्रमण के अधिक मरीज होने की वजह से स्वास्थ्य सुविधा का ढांचा गड़बड़ा गया है, इसलिए ऐसे मरीजों की भी मौत हो रही है, जिनका जीवन बचाया जा सकता है।

सवाल – Covid 19, क्या भारत ने जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए म्यूटेशन का पता लगा लिया था? सीक्वेंसिंग क्यों जरूरी है?


जवाब – हां, भारत ने म्यूटेशन को ट्रैक कर लिया था, इससे हम भविष्य में होने वाले खतरों को लेकर बेहतर तरीके से तैयार और सर्तक हो पाए।

सवाल – क्या किसी तरह से डबल और ट्रिपल म्यूटेशन की भी संभावना देखी जा रही है?


जवाब – हम इस तरह की स्थिति को आसानी से समझने के लिए कई बार गलत शब्दों का प्रयोग करते हैं, वर्तमान में सभी वेरिएंट के कई म्यूटेशन है लेकिन इनमें से कुछ ही विशेष होते हैं।

सवाल – इसका क्या आशय निकाला जाए कि वैज्ञानिकों को हर नये म्यूटेंट के लिए नई वैक्सीन की जरूरत होगी?


जवाब – नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। लेकिन कुछ वैक्सीन को रिडिजाइन या बदलाव जरूरी होता है। उदाहरण के लिए ई484के म्यूटेंट की वैक्सीन में बदलाव की जरूरत है।

सवाल – क्या वर्तमान में भारत में मौजूद कोविड की वैक्सीन म्यूटेड वायरस से भी रक्षा करेगी?


जवाब – हां, सभी तरह की वैक्सीन बीमारी के गंभीर संक्रमण से रक्षा करती हैं।

सवाल – क्या वायरस में म्यूटेशन की प्रक्रिया किसी नई कार के मॉडल को बदलाव करने जैसा है?


जवाब – कार को बेहतर बदलाव के लिए परिवर्तित किया जाता है, जबकि नए म्यूटेंट के साथ ऐसा कुछ भी नहीं, इसलिए दोनों की तुलना नहीं की जा सकती।

इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल

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