Cleaning The Senses in Ayurveda-इंद्रियों की सफाई क्यों है ज़रूरी, क्या कहता है आयुर्वेद

Clay face pack For Summer
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Cleaning The Senses in Ayurveda-आयुर्वेद के मुताबिक शरीर के सभी अंगों या इंद्रियों की सफाई बेहद ज़रूरी है। खासकर पांच इंद्रियों आंख-कान, नाक और जीभ के साथ त्वचा को हमेशा साफ रखना चाहिए। क्योंकि यह सभी इंद्रियां हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन्हीं के जरिये हम बाहरी दुनिया में जो देखते हैं महसूस करते हैं वह हमारे आंतरिक मन और आत्मा तक पहुंचाते हैं। ये पांच इंद्रियां हमारे शरीर के अंदर और बाहर एक पुल की तरह काम करती हैं। लेकिन यहां महिलाओं के लिये जिन इंद्रियों की सफाई को आयुर्वेद अहम बताता है उनमें जननांग की सफाई बहुत ज़रूरी बताई जाती है।

 रोज़ करें reproductive organ की सफाई

  • नयी माताएं हैं या प्रेगनेंट महिलाएं, सबको अपने शरीर की सफाई के साथ जननांग पर खासतौर पर ध्यान देना होता है। क्योंकि इस भाग में कई तरह के संक्रमण का खतरा होता है।
  • आयुर्वेद में जननांग को कई तरीके से साफ करने के तरीके बताये गये हैं। इसके लिये घर में मौजूद चीजें इस्तेमाल करें।
  • नीम, हरड़, बहेड़ा, आंवला और जमाल घोटा की जड़ की पीसकर रखें।
  • एक गिलास पानी में चार चम्मच जौकुट चूर्ण डालकर उबालें।
  • इस पानी को छानकर जननांग धोएं । कॉटन का कपड़ा और रुई भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • डॉक्टर की सलाह से कोई आयुर्वेदिक तेल भी ले सकती हैं।
  • रात को दूध में 2 चम्मच केस्टर ऑइल डालकर पिएं।
  • नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी को सफाई के लिये इस्तेमाल करें।

Cleaning The Senses in Ayurveda-कान की सफाई- clean your ears

  • कानों का ख्याल रखने के लिए, उन्हें क्यू-टिप्स के साथ धीरे-धीरे साफ करें।
  • कान में थोड़ा तिल का तेल ( sesame oil )  डाल सकते हैं। इसकी दो तीन बूंदें इसे पोषण देगी, बाहरी तेज़ हवा धूल से बचाएगी। नर्वस सिस्टम सही रहेगा।
  • कोई अच्छा संगीत सुनें। आधुनिक संगीत पसंद है तो दिन के वक्त वह सुनें लेकिन सुबह पूजा पाठ करें।
  • आप रॉक, जैज, क्लासिक म्यूजिक (rock, jazz, classical) के साथ प्रकृति की आवाजें भी सुन सकते हैं।
  • मंत्रोच्चारण सुनने, पूजा पाठ से मानसिक शांति मिलती है।

 क्या न करें-

कॉटन को कान में बहुत अंदर तक न ठूंसे।

कानों में अपनी उंगलियों को भी डालने से बचें।

नाक की सफाई-

आयुर्वेद में नाक की सफाई को नास्य कहा जाता है। इस इंद्री का सीधा संबंध मस्तिष्क से माना जाता है।

  • नाक की सफाई के लिये नियमित तौर पर हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
  • नाक को साफ रखने के लिये  आयुर्वेद में नास्य क्रिया की जाती है। एक खास किस्म की नास्य स्टिक तैयार कर उससे धुआं और भाप दिया जाता है। इसे विशेष जड़ी-बूटी से तैयार किया जाता है।
  • घर पर हर दिन नास्य थैरेपी संभव नहीं है ऐसे में आप खुद  नाक में रोज़ाना किसी आयुर्वेदिक तेल की कुछ बूंदें डालें।
  • हो सके तो साल में एक या दो बार पंचकर्म क्रिया का सहारा लें।

Cleaning The Senses in Ayurveda-Tongue cleaning

  • सुबह मुंह धोती हैं तो जीभ को नज़रअंदाज़ न करें।
  • जीभ पर जो सफेद परत जमी रहती है, उसे स्क्रैप कर लें।
  • इसके लिये कभी ठंडा पानी इस्तेमाल न करें।
  • आयुर्वेद के मुताबिक दांतों की सफाई दांतुन से करें, तो उसी दांतुन से जीभ भी साफ कर सकते हैं।
  • अगर ब्रश इस्तेमाल कर रही हैं तो टंग क्लीनर से जीभ पर पड़ी परत हटाएं।

keep skin clean

  • खुद को किसी आयुर्वेदिक तेल की मसाज दें। त्वचा को पौष्टिकता देने के लिए आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों और आयुर्वेदिक तेल के मिश्रण से मसाज करने से तनाव भागता है। त्वचा दमकती है।
  • चेहरे को साफ और गुनगुने और साफ पानी से धोएं। शरीर पर तेल की मालिश करने या सिर पर मसाज करने से न बचें अपने ऊपर हर तरह के तेल का एक्सपेरिमेंट करें।
  • आयुर्वेद जड़ी बूटी, योग, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
  • ताज़ा हवा में घूमें, प्रकृति और पेड़ पौधों के बीच थोड़ा वक्त बिताएं।
  • हर्बल या आयुर्वेदिक साबुन का इस्तेमाल करें, या घर पर प्राकृतिक तरीके से आंवला, रीठा, शिकाकाई का शैंपू व साबुन बनाएं।
  • त्रिफला का सेवन रात में करें।
  • नीम के तेल की मालिश से एलर्जी नहीं होगी।

क्या न करें– किसी भी तरह की मसाज के लिये तेल खुद न चुनें, किसी डॉक्टर की सलाह लें।क्योंकि त्वचा में भी वात, पित्त और कफ दोष होते हैं । इनसे प्रभावित त्वचा को अलग-अलग तरह के ट्रीटमेंट की ज़रूरत पड़ती है।

Cleaning The Senses in Ayurveda-आंखों के लिये—–

आयुर्वेद के मुताबिक आंखें शरीर में अहम इंद्री है। इसे स्वस्थ रखेंगे तो खूबसूरत संसार देख पाएंगे। आयुर्वेद आंखों की सेहत के लिये कई नुस्खे सुझाता है। इनमें आंवला खाने से लेकर कई तरह के योग और प्राणायाम भी हैं। एक नींबू एक गिलास पानी में पीते रहने से जीवन भर नेत्र ज्योति बनी रहती है।

  • सुबह कम से कम एक आंवला  नियमित रूप से खाएं। इसमें विटामिन सी है।
  • आंवले का पानी बनाकर धोने, या गुलाबजल डालने से आंखें स्वस्थ रहती है।
  • तांबे के बर्तन में पानी को रात में रखकर सुबह उसका सेवन करें।
  • जब भी आंखों की धुलाई करें उन्हें रगड़ें नहीं। हल्के छींटे मारें।
  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें।
  • कनपटी पर गाय के घी की हल्के हाथ से रोजाना कुछ देर मसाज करें।

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