Performance Grading Index में चंडीगढ़ और पंजाब को मिली A++ की रैंकिंग, हरियाणा भी A ग्रेड

chandigarh 1
file

स्कूली शिक्षा पर पंजाब और चंडीगढ़ शानदार परफोर्मेंस (Performance Grading Index) के लिये अव्वल आये हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ( Union Ministry of Education) की तरफ से जारी ‘परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स’ (Performance Grading Index) 2019-20 में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब, चंडीगढ़, तमिलनाडु, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और केरल को ए++ श्रेणी मिली है। दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, पुडुचेरी, दादरा और नागर हवेली को ए+ श्रेणी मिली हुई है। इस सूचकांक में 70 मानकों पर स्कूली शिक्षा में राज्यों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया है।

Performance Grading Index-पंजाब गवर्नेंस और मैनेजमेंट में आगे

पंजाब ने सर्वाधिक अंक शासन और प्रबंधन (Governance and Management) में हासिल किये। आधारभूत ढांचे (infrastructure) और सुविधाओं के लिहाज से बिहार और मेघालय का प्रदर्शन सबसे कमतर रहा। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और ओडिशा ने आधारभूत ढांचे (infrastructure) के क्षेत्र में 2019-20 और 2018-19 में शानदार सुधार दिखाया है।

यह भी पढ़ें:  स्कूल नहीं गई, 96 साल की उम्र, 98% नंबर/ 96-Year-Old Amma Is The Oldest Student To Top Kerala Literacy Exam With 98% Score!

निशंक ने इंडेक्स साझा किया

रिपोर्ट में कहा गया कि infrastructure व सुविधाओं के मामले में 13 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने 10 फीसदी का सुधार दिखाया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रविवार को ट्विटर पर यह ग्रेडिंग इंडेक्स साझा किया। इसके अनुसार ‘Governance Process’ में 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने 10 फीसदी या उससे ज्यादा का सुधार दिखाया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, पंजाब, राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल ने कम से कम 20 फीसदी का सुधार दिखाया है। शिक्षा मंत्री निशंक ने कहा कि 33 राज्यों एवं केंद्र शासित राज्यों ने पिछले साल के अपने अंकों के मुकाबले प्रदर्शन में सुधार किया है।

यह भी पढ़ें: कृषि कानून : चंडीगढ़ में सीएम खट्टर के आवास की ओर जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर छोड़ी पानी की बौछारें

Performance Grading Index- शिक्षकों, धन की कमी से जूझ रहे बाकी राज्य

रिपोर्ट में कहा गया, ‘हालांकि, यह सामान्य जानकारी है कि शिक्षकों, प्राचार्यों और प्रशासनिक कर्मियों की कमी, नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण की कमी, शिक्षकों का अपर्याप्त प्रशिक्षण, समय पर धन की उपलब्धता जैसे कुछ कारक हैं, जिनसे देश में शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है। यह पहली बार है कि कोई ऐसा माध्यम है जो इनकी पुष्टि करता है।’ इसमें कहा गया, ‘पीजीआई के जरिये कमियों को निष्पक्ष और नियमित रूप से आंका जा सकता है। यह खामियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिहाज से अहम है।’