क्या उस दिन को याद कर सकते हैं जब घर में टीवी पहली बार आया था ?

Arun Mandola2
Arun Mandola2

क्या उस दिन को याद कर सकते हैं जब घर में टीवी पहली बार आया था ? टेलीविज़न विभिन्न मुद्दों को प्रस्तुत कर लोगों को प्रभावित करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। क्या आप उस दिन को याद कर सकते हैं जब आपके घर में  टेलीविज़न पहली बार आया था ? वे कौन से शोज थे जिन्हें आप देखते थे और किसके साथ देखा करते थे।

टीवी के कलाकारों के साथ बातचीत के प्रमुख अंश

क्या उस दिन को याद करते हैं अमल सहरावत

Amal Sehrawat
Amal Sehrawat

मुझे नहीं लगता कि मेरी पीढ़ी का कोई भी ऐसा व्यक्ति होगा जिसे वो दिन याद नहीं होगा जब उसके घर में टेलीविज़न आया था। मुझे याद है जिस दिन मेरे पिता पहली बार टीवी घर लाए, मैं और मेरा भाई बंद होने पर भी उसे घूरते रहे थे। हम हैरत में थे। मेरी माँ ने हमें उसे छूने की अनुमति नहीं दी थी और उसे एक कपड़े से ढक कर रखा थे। हम टीवी के बटन और स्क्रीन को झाँकते और छूते रहते थे। यह मेरे जीवन की सबसे खूबसूरत यादों में से एक है। मैंने और मेरे भाई ने कृषि दर्शन सहित ऑन एयर पर आने वाले हर प्रोग्राम को देखा करते थे। मेरा पसंदीदा चित्रहार था लेकिन जब नो सिंगल होने पर जो कलरफुल लाइन्स आती थी और उससे टीईई की आवाज़ आती थी। हमारे लिए उस वक़्त वो भी संगीत था।

क्या उस दिन को भूल गये हैं अरुण मंडोला

Arun Mandola2
Arun Mandola2

हां मुझे याद है कि जब मेरे पिता ने पहला ब्लैक एंड व्हाइट ओनिडा टीवी खरीदा था। यह वास्तव में आश्चर्यजनक था । सारे पड़ोसी धारावाहिक देखने के लिए हमारे घर आते थे। शो के दौरान पिन-ड्रॉप साइलेंस होता था। मैं सभी पड़ोसियों के साथ महाभारत, रामायण ,कृष्ण, चंद्रकांता जैसे शोज देखता था।

क्या उस दिन को पूजा पिहाल भी कर पाती हैं याद

pooja
pooja

मेरे जन्म से पहले  टी वी मेरे घर पर था। हम शक्तिमान, टॉम एंड जेरी, बूगी-वूगी, केबीसी, यस बॉस, शाकालाका बूम बूम आदि शोज अपने भाई-बहनों के साथ देखते थे।

अविनाश मिश्रा

मुझे याद है कि जब मैं तीसरी कक्षा में था तब मैं पूरी तरह से टीवी से जुड़ चुका था। मैं हातिम, शरारत जैसे शो देखता था । धीरे धीरे समय के साथ टेलीविजन और उसके प्रोग्राम के लिए मेरा  प्यार बढ़ता चला गया क्योंकि छोटे शहरों में लोगों का सबसे अच्छा मनोरंजन टेलीविजन ही होता है।

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पुनीत चौकसे

Puneett Chouksey (10)
Puneett Chouksey (10)

वह समय बहुत ही शानदार था, बहुत कम चैनल आते थे और हमारी कॉलोनी में सिर्फ हमारे पास टेलीविजन था, इसलिए हर रविवार को लगभग पूरी कॉलोनी के लोग रामायण और महाभारत देखने के लिए हमारे घर पर आते थे। शनिवार को मैं और मेरे दोस्त शक्तिमान देखा करते थे।  शक्तिमान देखने के लिए मैं स्कूल से छुट्टी लेने का बहाना शनिवार को बनाता था।वो सब कभी ना भूलने वाले दिन हैं।

मृणाल देशराज

mreenal deshraj (1)
mreenal deshraj (1)

केवल दूरदर्शन आया करता था। बिना रिमोट के टीवी हुआ करते थे। हम टीवी खरीदने वाले अपनी कॉलोनी में पहले व्यक्ति थे, इसलिए हर दोस्त और रिश्तेदार टीवी  देखने हमारे घर आया करता था। हम सभी बच्चे साथ में नीचे  बैठते थे और सभी बुजुर्ग कुर्सियों पर बैठते थे, कम से कम 20-25 लोग एक बार में हॉल में एक साथ मिलकर प्रोग्राम देखा करते थे । मुझे याद है कि वॉशरूम जाना किसी दर्द से कम नहीं  था। इतने लोगों के बीच नंबर आने में समय लगता था। मुझे याद  कि जैसे थिएटर में लेट नाईट शो के वक़्त जो हालात होते हैं,वैसे हमारे घर में होता था। कोई भी टीवी देखते हुए अपनी आंखों को नहीं झपकाता था।

विजयेंद्र कुमेरिया

Vijayendra kumeria
Vijayendra kumeria

मैं सौभाग्यशाली था कि मेरे जन्म से पहले ही हमारे परिवार के पास एक टेलीविजन था, लेकिन हां यह ज़रूर था कि टेलीविजन बहुत ही बुनियादी था । जिसमें केवल 8 चैनल थे और मुझे याद है कि उन दिनों केवल 3-4 चैनल ही प्रसारित होते थे। मैं महाभारत, चंद्रकांता, जंगल बुक आदि जैसे शोज देखा करता था।बुनियाद और हमलोग जैसे शोज का इतना समृद्ध कंटेंट था कि मुझे कभी-कभी लगता है कि हमारी पीढ़ी के अभिनेताओं को भी क्या ऐसे शोज मिल सकते हैं काम के लिए।

अमित सरीन

Amit Sarin11
Amit Sarin11

मुझे अच्छी तरह से याद है जब मेरे माता-पिता ने हमारा पहला टीवी खरीदा था।वह ब्लैक एंड व्हाइट था। मैं बहुत उत्साहित था। सबसे पहला प्रोग्राम जो मुझे याद है वो समाचार था। हम रविवार का इंतज़ार करते थे क्योंकि यह एकमात्र दिन होता था जब सुबह से शोज प्रसारित हुआ करता था। हम लोग, बुनियाद  सहित  सब कुछ देखते थे जो भी टीवी पर आता था क्योंकि बहुत कम शोज आते थे तो हम सबकुछ देखा करते थे। ज्यादातर मैं  मॉम के साथ टीवी देखता था।कभी-कभी हमारे पड़ोसी भी हमारे साथ टीवी देखने हमारे घर पर आते थे

अंकित बाथला

Ankit bathla new-in black
Ankit bathla new-in black

मुझे  याद नहीं है कि हमारे घर में टेलीविज़न कब आया था क्योंकि जब मैं पैदा हुआ था उससे पहले टेलीविज़न मेरे घर पर था।  मुझे याद है कि देख भाई देख जैसे शोज मैं देखा करता था, जो मेरे पसंदीदा शो में से एक हुआ करता था।मुझे यह भी याद है कि मेरी दादी यह सुनिश्चित करती थी कि हम टीवी पर 26 जनवरी और 15 अगस्त का प्रोग्राम ज़रूर देखें। यही वजह है कि मेरी सबसे प्रिय स्मृति 26 जनवरी और 15 अगस्त के भाषण और परेड को देखने की रही है। टेलीविजन के कारण इसे हर साल देखना एक  रस्म की तरह होता था

रोहिताश्व गौर

Rohitashv Gour (2)
Rohitashv Gour (2)

आप सभी को विश्व टेलीविजन दिवस की शुभकामनाएं। मैं 1981 की बात कर रहा हूं, जब हम टीवी देखने के लिए पड़ोसियों के घर पर जाते थे।  उस समय टेलीविजन की  शुरुआत थी, तब  कृषि दर्शन जैसे कुछ शोज ही प्रसारित होते थे। बाद में जब बनियाद, देख भाई देखा, महाभारत और रामायण जैसे डेली शो शुरू हुए। उस समय के ये प्रमुख शो थे। टेलीविजन का महत्व यह है कि इसने कई लोगों को रोजगार दिया है।

अंश बागरी

Ansh Bagri (1)
Ansh Bagri (1)

टेलीविजन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसने कई लोगों को प्रेरित किया है। यह हमें लोगों को यह समझाने में जागरूक बनाता है कि परिवेश में क्या हो रहा है। जब मैं छोटा था तो हम टीवी देखने के लिए पड़ोसियों के घर पर जाते थे कई बार वे हमें अपने घर पर नहीं लेते थे। मेरे घर पर रंगीन टीवी लाना मेरा सपना था। फिर मेरे पिता ने रंगीन टीवी खरीदा और हम फैमिली नंबर वन, ऑफिस-ऑफिस, हम पंछी और कई अन्य शो देखते थे।