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16 Army Personnel Killed-उत्तर सिक्किम में सेना का ट्रक खाई में गिरा, 16 कर्मियों की मौत

16 Army Personnel Killed
16 Army Personnel Killed


16 Army Personnel Killed-उत्तर सिक्किम (Sikkim)के जेमा में शुक्रवार को सेना का एक ट्रक तीव्र मोड़ पर मुड़ते समय खाई में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इस हादसे में तीन जूनियर कमीशन्ड अधिकारी (जेसीओ) समेत 16 सैन्य कर्मी मारे गये।
सेना ने यह जानकारी दी। सेना के अनुसार, चार घायल जवानों को हेलीकॉप्टर की मदद से निकाला गया है।

16 Army Personnel Killed

सेना ने एक बयान में कहा, ‘उत्तर सिक्किम के जेमा में 23 दिसंबर को सेना के ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से भारतीय सेना के 16 बहादुर कर्मियों की जान चली गयी।’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह सैनिकों की मृत्यु से बहुत दुखी हैं।
उन्होंने कहा, ‘राष्ट्र उनकी सेवा और प्रतिबद्धता के लिए अत्यंत कृतज्ञ है। शोक-संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं। घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।’सेना के अनुसार, दुर्घटना का शिकार हुआ ट्रक चत्तेन से सुबह रवाना होकर थांगू की ओर जा रहे तीन वाहनों के काफिले में शामिल था।

16 Army Personnel Killed

उसने कहा कि तत्काल बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है और चार घायल जवानों को हेलीकॉप्टर की मदद से बचाया गया है। सेना ने कहा, ‘दुर्भाग्य से तीन जूनियर कमीशन्ड अधिकारियों और 13 जवानों की दुर्घटना में जान चली गयी। भारतीय सेना दुख की इस घड़ी में शोक-संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है।’

Himachal Pradesh Colleges-75% अधिक कॉलेज में प्रधानाध्यापक नहीं, 75 कॉलेजों की अपनी इमारत नहीं

Himachal Pradesh Colleges
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Himachal Pradesh Colleges-हिमाचल प्रदेश में 75 प्रतिशत से अधिक सरकारी कॉलेज में नियमित प्रधानाध्यापक नहीं है। प्रदेश कॉलेज शिक्षक संघ के महासचिव आर एल शर्मा ने यह जानकारी दी है।
शर्मा ने कहा कि राज्य में 156 सरकारी कॉलेज में से 119 में नियमित प्रधानाचार्य के पद रिक्त हैं जबकि 75 कॉलेज की अपनी खुद की इमारत नहीं है। उन्होंने कहा कि शिमला में उच्चतर शिक्षा निदेशालय में विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) के तौर पर नामित प्रधानाध्यापकों के दो पद भी खाली पड़े हैं।

एक मामला लंबित होने से अटका काम

जब उच्चतर शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापकों के 25 पदों पर नियुक्तियां हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग
द्वारा की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘हमें मालूम है कि ज्यादातर कॉलेज में नियमित प्रधानाध्यापक नहीं हैं। विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के लिए सभी दस्तावेज तैयार हैं लेकिन अदालत में एक मामला लंबित है और हम डीपीसी के साथ मिलकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अदालत के आदेशों का इंतजार कर रहे हैं।’

Himachal Pradesh Colleges

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्ववर्ती सरकार की आलोचना करते हुए शर्मा ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, संकाय सदस्यों की आवश्यकता और बुनियादी ढांचे की सुविधाओं के मूल मुद्दों पर विचार किए बिना राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के बारे में बात कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत बहुआयामी शिक्षा प्रणाली लागू करने के लिए महाविद्यालयों में कम से कम 3,000 और शिक्षकों की आवश्यकता होगी।

Himachal Pradesh Colleges-8 महीनें में खुले 24 नये कॉलेज

कॉलेज शिक्षकों ने कहा कि राज्य में मार्च 2022 तक 132 कॉलेज थे और सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) बढ़ाने के मकसद से पिछले आठ महीने में 24 नए कॉलेज खोले गए। जीईआर राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मुख्य विशेषताओं में से एक है और इसे 2035 तक 26.3 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। करीब 75 प्रतिशत प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति पदोन्नति के जरिए तथा 25 प्रतिशत की सीधी भर्ती की जाती है। शर्मा ने कहा, ‘हमने मौजूदा स्थिति के बारे में नए मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया है।’ हाल में पदभार संभालने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संस्थानों के निर्माण तथा उनके आधुनिकीकरण के लिए अधिसूचनाओं को वापस लेने का आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान बजटीय प्रावधान किए बिना खोले गए।

100 days of Bharat Jodo Yatra : कांग्रेस के पुनरुद्धार की राह पर चले राहुल गांधी और अन्य नेता

100 days of Bharat Jodo Yatra
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100 days of Bharat Jodo Yatra- कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुक्रवार को अपने सौवें दिन में प्रवेश कर गई। पार्टी पर करीबी नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पुनरुद्धार की राह पर चल रही कांग्रेस को कई ऐसे सवालों के जवाब मिल गए हैं, जिनकी उसे लंबे समय से तलाश थी। हालांकि, सवाल बरकरार है कि क्या यह यात्रा चुनावी फायदा दिलाने में सफल होगी? कन्याकुमारी से कश्मीर तक चलने वाली ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पिछले तीन महीनों में कई विवादों का कारण भी बनी है। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग भी देखने को मिली है, जिसमें राहुल गांधी की दाढ़ी और बरबेरी टी-शर्ट पर तंज कसा जाना भी शामिल है। अब तक 2,800 किलोमीटर से अधिक पदयात्रा कर चुके राहुल अपने समर्थकों के साथ-साथ विरोधियों का भी ध्यान आकर्षित करने में कामयाब रहे हैं। फिल्मी सितारों से लेकर अकादमिक विशेषज्ञों तक, विभिन्न क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियां भी समय-समय पर उनके साथ कदमताल करती नजर आई हैं। हालांकि, कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रा के लिए कांग्रेस के पास अधिक ठोस राजनीतिक उद्देश्य होने चाहिए थे। उन्होंने गुजरात और हिमाचल प्रदेश जैसे चुनावी राज्यों को छोड़ने के पार्टी के कदम पर सवाल भी उठाए हैं।

100 days of Bharat Jodo Yatra- चुनावी फायदे

‘भारत जोड़ो यात्रा’ के चुनावी फायदे में तब्दील होने से जुड़े सवालों के बीच कांग्रेस के लिए हाल ही में संपन्न दो राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे मिश्रित रहे। हिमाचल में जहां पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया, वहीं गुजरात में सीट संख्या के लिहाज से वह अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, पार्टी की चुनावी किस्मत पर ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के असर की स्पष्ट तस्वीर अगले साल कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों से सामने आएगी, जहां पदयात्रा व्यापक पैमाने पर गुजरी। कांग्रेस के पूर्व नेता संजय झा ने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पार्टी के लिए लंबी अवधि में ‘गेम-चेंजर’ (खेल का रुख बदलने वाला कारक) साबित हो सकती है। झा पार्टी के प्रवक्ता भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा, “पहली बात, इस यात्रा ने राहुल गांधी के राजनीतिक ब्रांड का पुनरुद्धार किया है। भाजपा अब अपने ‘दुर्भावनापूर्ण फेक न्यूज अभियान’ का इस्तेमाल कर उनका मजाक नहीं उड़ा सकेगी।

दूसरी बात, कांग्रेस आखिरकार इस जन आंदोलन के जरिये जनता से सीधे जुड़ पाई है।” झा ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस इस यात्रा के जरिये जमीनी स्तर पर पैठ बनाने में सफल रहेगी और पार्टी के लिए जोश से भरे अपने कार्यकर्ताओं के जरिये लोगों को जोड़े रखना बेहद अहम है। उन्होंने कहा, “हिमाचल चुनाव के नतीजों ने साबित किया है कि कांग्रेस अगर जीत के प्रति ललक दिखाए तो उसमें आज भी भाजपा के खिलाफ विजय हासिल करने का दमखम है। ‍अगले साल कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का चुनावी असर अधिक देखने को मिलेगा।”

‘भारत जोड़ो यात्रा’ कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने में सफल रही है, इस बात को व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है, लेकिन कई लोगों का कहना है कि यात्रा का असल असर चुनावी नतीजों से सामने आएगा। राजनीतिक टिप्पणीकार और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रोफेसर संजय पांडे ने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने कांग्रेस में ‘उम्मीद की किरण’ जगाई है और पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश पैदा किया है, लेकिन इसका प्रभाव चुनावी फायदे में तब्दील होगा या नहीं, यह तो समय ही बताएगा। दिल्ली के जीसस एंड मैरी कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर सुशीला रामास्वामी का मानना ​​है कि यात्रा को शुरुआती दौर में ज्यादा ठोस राजनीतिक उद्देश्य निर्धारित करने चाहिए थे।


विवादों से भी नाता रहा

उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनावी राजनीति बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि एक राजनीतिक दल को क्या करना चाहिए। रामास्वामी ने यात्रा के गुजरात और हिमाचल जैसे चुनावी राज्यों से न गुजरने के कदम पर सवाल उठाए। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ अब तक आठ राज्यों-तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से गुजर चुकी है। यह यात्रा 24 दिसंबर को दिल्ली में दाखिल होगी और फिर लगभग आठ दिनों के विश्राम के बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से गुजरते हुए जम्मू-कश्मीर में समाप्त होगी। यात्रा में समाज के अलग-अलग तबके के लोगों ने हिस्सा लिया है, जिनमें पूजा भट्ट, रिया सेन, सुशांत सिंह, स्वरा भास्कर, रश्मि देसाई, आकांक्षा पुरी और अमोल पालेकर जैसी फिल्मी और टीवी जगत की हस्तियां शामिल हैं। मायानगरी की विभिन्न हस्तियों के अलावा पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल एल रामदास, शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सुप्रिया सुले और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन जैसे कई दिग्गज भी समय-समय पर राहुल गांधी के साथ कदमताल करते नजर आए हैं।

हालांकि, इस यात्रा का विवादों से भी नाता रहा है। भाजपा ने तमिलनाडु में कथित तौर पर 41,000 रुपये की बरबेरी टी-शर्ट पहनने के लिए राहुल पर निशाना साधा था, जिसके जवाब में विपक्षी दल ने ‘10 लाख का सूट’ वाले बयान के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला था। यह कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग की शुरुआत भर थी। बाद में कांग्रेस ने जलते खाकी पैंट की तस्वीर ट्वीट की। वहीं, भाजपा ने एक विवादित ईसाई पादरी से राहुल गांधी की मुलाकात से संबंधित वीडियो को लेकर तंज कसा। राहुल की दाढ़ी को लेकर भी दोनों दलों में वार-पलटवार देखने को मिला। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने गुजरात में आयोजित एक चुनावी रैली में दावा किया कि राहुल गांधी इराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन की तरह दिखने लगे हैं। जवाब में कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह एक ‘ट्रोलर’ के जैसे प्रतीत होते हैं। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान कई बार ऐसा भी हुआ है, जब पार्टी पर संकट के बादल छाए हैं। यात्रा के महाराष्ट्र चरण में कांग्रेस और उसके वैचारिक रूप से असंगत सहयोगी शिवसेना के बीच तब दरार देखने को मिली थी, जब राहुल गांधी ने हिंदुत्व विचारक वी डी सावरकर पर अंग्रेजों के समक्ष दायर उनकी दया याचिकाओं को लेकर निशाना साधा था।


100 days of Bharat Jodo Yatra-राजस्थान इकाई में हुआ विवाद


मध्य प्रदेश चरण के दौरान ही कांग्रेस की राजस्थान इकाई में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब एक साक्षात्कार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को ‘गद्दार’ कहा था।
राजस्थान ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का अगला पड़ाव था। हालांकि, पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल की मध्यस्थता से यात्रा के राजस्थान में प्रवेश करने से ऐन पहले मामला शांत हुआ।
कांग्रेस के ‘आखिरी दांव के रूप में’ यह यात्रा चुनावी फायदे में तब्दील होगी या नहीं, इसे लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है, लेकिन ऐसा लगता है कि पार्टी के यात्री इस मंत्र में यकीन रखते हैं कि कारवां बढ़ते रहना चाहिए।

Female representation in legislature-हिमाचल में महज एक महिला पहुंची विधानसभा, देश के 19 राज्यों में 10% से भी कम हैं महिला विधायक

Female representation in legislature
Female representation in legislature


Female representation in legislature-राजनीतिक दल महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की बातें बढ़-चढ़कर करते हैं लेकिन संसद एवं विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व निराशाजनक तस्वीर पेश करता है। वास्तविकता यह है कि देश के 19 राज्यों की विधानसभाओं में महिला विधायकों का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से भी कम है। लोकसभा में नौ दिसंबर 2022 को विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिजीजू द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, पुडुचेरी, मिजोरम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश की विधानसभाओं में महिला विधायकों की संख्या 10 प्रतिशत से कम है।

बिहार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक

आंकड़ों के अनुसार, जिन राज्यों की विधानसभाओं में महिला विधायकों की संख्या 10 प्रतिशत से अधिक है, उनमें बिहार (10.70), छत्तीसगढ़ (14.44), हरियाणा (10), झारखंड (12.35), पंजाब (11.11), राजस्थान (12), उत्तराखंड (11.43), उत्तर प्रदेश (11.66), पश्चिम बंगाल (13.70), दिल्ली (11.43) शामिल हैं। हाल में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में जीतने वाली महिलाओं की संख्या 8.2 प्रतिशत है, जबकि हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में इस बार केवल एक महिला उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहीं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में महिला सांसदों की हिस्सेदारी 14.94 प्रतिशत और राज्यसभा में 14.05 प्रतिशत है। वहीं, पूरे देश में विधानसभाओं में महिला विधायकों का औसत केवल आठ प्रतिशत है।

महिला आरक्षण विधेयक का क्या हुआ?

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने संसद एवं राज्य विधानसभाओं में महिला सांसदों/विधायकों के प्रतिनिधित्व एवं महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार का संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाने का विचार है? केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिजीजू ने सदन में कहा था, ‘‘लैंगिक न्याय सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है। इस मुद्दे पर संसद के समक्ष संविधान संशोधन विधेयक लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को सहमति के आधार पर सावधानीपूर्वक विचार विमर्श करने की आवश्यक्ता है।”
हाल में बीजू जनता दल, शिरोमणि अकाली दल, जनता दल यूनाइटेड, तृणमूल कांग्रेस जैसे राजनीतिक दलों ने सरकार से महिला आरक्षण विधेयक को नए सिरे से संसद में पेश करने एवं पारित कराने की मांग की है।

Female representation in legislature

इस विषय पर बीजू जनता दल के राज्यसभा सदस्य डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी ने संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की सरकार से मांग की है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार विधेयक लाती है तो उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी।” उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण के विषय पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक बार-बार अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त कर चुके हैं। (Female representation in legislature)
कुछ दिन पहले ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की तथा शिरोमणि अकाली दल, जदयू, द्रमुक जैसे दलों ने इसका समर्थन किया था।

Female representation in legislature-

शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि अब समय आ गया है कि महिला आरक्षण विधेयक को पारित किया जाए और महिलाओं को उनका हक दिया जाए। जदयू सांसद राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यह महिलाओं को सशक्त बनाने का समय है और सरकार को यह विधेयक लाना चाहिए ।
गौरतलब है कि लंबे समय से महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की मांग हो रही है। इस विधेयक को पहली बार 1996 में संसद में पेश किया गया था। इसके बाद इसे कई बार पेश किया गया। साल 2010 में इस विधेयक को राज्यसभा में पारित किया गया था, लेकिन 15वीं लोकसभा के भंग होने के बाद इस विधेयक की मियाद खत्म हो गई।

CM Sukhwinder Singh Sukhu : छात्र राजनीति से उभरे नेता के हाथों में अब हिमाचल प्रदेश की कमान

CM Sukhwinder Singh Sukhu
CM Sukhwinder Singh Sukhu

CM Sukhwinder Singh Sukhu-कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं चार बार के विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू छात्र राजनीति से उभरकर पार्टी में विभिन्न पदों पर रहते हुए आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं।
सुक्खू ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। सुक्खू को पार्टी के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह का आलोचक माना जाता था जिन्होंने पांच दशक से अधिक समय तक हिमाचल प्रदेश की राजनीति पर अपना दबदबा कायम रखा था। सिंह का पिछले साल निधन हो गया था।
वीरभद्र सिंह की करिश्माई मौजूदगी के बिना इस राज्य में पार्टी की पहली जीत के साथ, सुक्खू को इस शीर्ष पद पर विराजमान करना यह स्पष्ट करता है कि पार्टी आगे बढ़ने के लिए तैयार है। सुक्खू एक सामान्य परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता सड़क परिवहन निगम में चालक के पद पर कार्यरत थे। सुक्खू अपने शुरुआती दिनों में छोटा शिमला में दूध का काम किया करते थे।

CM Sukhwinder Singh Sukhu-2013 से 2019 तक पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष

छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के साथ अकसर टकराव होने के बावजूद सुक्खू 2013 से 2019 तक रिकॉर्ड छह साल तक पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष बने रहे। हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से
सत्ता छीनने के बाद सुक्खू और प्रतिभा सिंह दोनों ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश किया था। सुक्खू शीर्ष पद पर काबिज होने वाले निचले हिमाचल के पहले कांग्रेसी नेता हैं।
भाजपा के प्रेम कुमार धूमल के बाद वह हमीरपुर जिले से दूसरे मुख्यमंत्री हैं।

CM Sukhwinder Singh Sukhu-कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष थे

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले और कांग्रेस प्रचार समिति के प्रमुख रहे नादौन सीट से विधायक सुक्खू (CM Sukhwinder Singh Sukhu) को शनिवार को सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी आलाकमान का सुक्खू पर विश्वास तभी जाहिर हो गया था जब उन्हें कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और बड़ी संख्या में उनके समर्थकों को पार्टी का टिकट मिला था। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत किया और कार्यकर्ताओं तथा विधायकों के साथ उनके तालमेल ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार बना दिया। राज्य की 68 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं।

छात्र राजनीति से आये सियासत में

राज्य में विधानसभा चुनाव 12 नवंबर को हुआ था और नतीजों की घोषणा बृहस्पतिवार को की गई। जुलाई 2021 में वीरभद्र सिंह के निधन के बाद से राज्य में यह पहला चुनाव था। सुक्खू कांग्रेस से संबद्ध नेशनल स्टूडेन्ट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की राज्य इकाई के महासचिव थे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एमए और एलएलबी की थी। जमीनी स्तर पर काम करते हुए वह दो बार शिमला नगर निगम के पार्षद चुने गए थे। उन्होंने 2003 में नादौन से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और 2007 में सीट बरकरार रखी लेकिन 2012 में वह चुनाव हार गए थे।
इसके बाद 2017 और 2022 में उन्होंने फिर से जीत दर्ज की।

Hamirpur gets reins in state : हमीरपुर को फिर मिली सरदारी, धूमल के बाद दूसरे सीएम होंगे ‘सुक्खू’, कांगड़ा में भी खुशी

Himachal Pradesh Colleges
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Hamirpur gets reins in state: रविवार को पहाड़ी सूबे हिमाचल को नया सीएम मिल जाएगा। खास बात यह भी है कि इस बार सूबे की सरदारी फिर से हमीरपुर को मिली है। दो दिनों से जारी गहमागहमी और हंगामे के बाद आखिरकार शनिवार शाम को सुखविंदर सिंह सुक्खू के नाम पर मुहर लगी और इसके साथ ही प्रदेश के इतिहास में हमीरपुर का नाम फिर रोशन हो गया। पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बाद सुखविंदर सिंह सुक्खू जिले से सीएम बनने वाले दूसरे नेता हैं। सरकार भाजपा की रही हो या कांग्रेस की हमीरपुर जिले की खास बात यह है कि यहां से सीएम के दावेदार 1998 से लगातार रहे हैं। 5 विधानसभा सीटों वाला यह जिला संसदीय क्षेत्र भी है तो इस लिहाज से जिले की अहमियत और बढ़ जाती है क्योंकि इसी क्षेत्र में आने वाले ऊना ( हरोली सीट ) से प्रदेश के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री भी आते हैं।
बिलासपुर जिला भी इसी संसदीय क्षेत्र में आता है।

Hamirpur gets reins in state : चौथी बार जीते हैं सुक्खू

सुखविंदर सिंह सुक्खू चौथी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। और उनके सीएम बनने से हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर ही नहीं बल्कि कांगड़ा में भी खुशी की लहर है। हमीरपुर से धूमल सीएम ही नहीं सांसद भी रहे हैं। उनके बेटे और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी यहां से सांसद हैं। प्रदेश को इस जिले ने कई मंत्री दिये हैं। इनमें भाजपा के आईडी धीमान और ठाकुर जगदेव के अलावा कांग्रेस के नारायण चंद पराशर शामिल हैं। पराशर भी नादौन से ही विधायक रहे हैं और अब इसी सीट से सुक्खू जीतकर सीएम की ताज पहन रहे हैं।


Hamirpur gets reins in state :दिन भर टीवी से चिपके रहे लोग


सुखविन्द्र सिंह सुक्‍खू के सीएम बनने की घोषणा से पहले कांगड़ा के लोगों में बेचैनी दिखी। घोषणा तक लोग धर्मशाला और पालमपुर तथा नूरपुर समेत अन्य बाज़ारों में टीवी से चिपके रहे । प्रतिभा सिंह के पक्ष में शिमला में हो रही समर्थकों की नारेबाज़ी पर यहां के लोगों ने कड़ा एतराज जताया। लोगों का कहना है कि जब विधायक दल ने हाईकमान को विधायक दल का नेता चुनने का प्रस्‍ताव कर दिया था तो ऐसे में हाई कमान के खिलाफ इस तरह का आचरण करना सही नहीं था । हाईकमान द्धारा अपने फैसले पर अडिग रहने का कांगड़ा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्‍वागत किया।
बता दें कि कांगड़ा जिले में सबसे अधिक 15 विधायकों की सीटें हैं। लोगों ने कांग्रेस को 15 में से 10 विधायक दिए हैं और इस जिले से जिस पार्टी को भी अधिक सीटें मिलती है उसी पार्टी की सरकार बनती है, एक वार फिर सिद्ध हो गया है ।

Himachal New Chief Minister: सुखविंदर सिंह सुक्खू होंगे हिमाचल प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री, मुकेश अग्निहोत्री होंगे उपमुख्यमंत्री

Himachal new Chief Minister
Himachal new Chief Minister

Himachal New Chief Minister: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे और मुकेश अग्निहोत्री उप मुख्यमंत्री होंगे। शिमला में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सुक्खू को विधायक दल का नेता चुना गया।
इस बैठक में दोनों पर्यवेक्षक-छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा पार्टी के राज्य प्रभारी राजीव शुक्ला मौजूद थे।


Himachal New Chief Minister:


विधायक दल की बैठक के बाद शुक्ला ने बताया कि अलाकमान ने फैसला किया है कि सुक्खू मुख्यमंत्री और अग्निहोत्री उप मुख्यमंत्री होंगे। कांग्रेस आलाकमान ने नदौन से विधायक 58 वर्षीय सुक्खू के नाम पर रजामंदी दी। नयी सरकार का शपथ ग्रहण रविवार सुबह होगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश के अगले के मुख्यमंत्री हो सकते हैं और उनके रविवार को शपथ ग्रहण करने की संभावना है।
नदौन से विधायक 58 वर्षीय सुक्खू के नाम पर आलाकमान ने रजामंदी दी । राज्य की 68 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं।

Himachal New Chief Minister: प्रतिभा खेमे ने की थी पुरजोर लामबंदी


हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के लिये सभी प्रमुख नेताओं के खेमों की तरफ से पुरजोर लामबंदी की जा रही थी। पार्टी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है।
शुक्रवार (कल) शाम को हुई बैठक में विधायकों ने आम सहमति से एक प्रस्ताव करके पार्टी अध्यक्ष को अधिकार दिया था कि वह पार्टी विधायक दल के नेता पर फैसला करें, जो हिमाचल प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री होगा। इसके पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि पार्टी पर्यवेक्षकों को पहाड़ी राज्य में भेजा गया है, जो सभी विधायकों के विचार उनसे व्यक्तिगत रूप से मांग रहे हैं और वे उन्हें उनकी राय से अवगत कराएंगे। खरगे ने कहा कि इसके आधार पर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला होगा। सुबह से ही कांग्रेस विधायकों का शिमला स्थित सेसिल होटल में जमावड़ा होने लगा, जहां पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक-छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश पटेल और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ठहरे हुए हैं। विधानसभा चुनाव में स्पष्ट जनादेश के साथ मिली जीत के बावजूद कांग्रेस को छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के निधन से उत्पन्न हुए शून्य की भरपाई करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह पिछले कुछ दिनों से यह संकेत दे रही थीं कि वह मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं। उनके समर्थकों ने भी शिमला में जमकर नारेबाजी की और वीरभद्र सिंह की विरासत का सम्मान करने की मांग की।


Himachal New Chief Minister: कल शपथ लेंगे सुक्खू

इसके पहले शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में एआईसीसी के प्रभारी राजीव शुक्ला के साथ पर्यवेक्षकों ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की थी और उन्हें पार्टी के विजेता विधायकों की सूची सौंपकर सरकार बनाने का दावा
पेश करने के लिए समय मांगा था।

श्वेता तिवारी की बेटी पलक ने सौतेले पिता अभिनव पर किया खुलासा

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श्वेता तिवारी की बेटी ने सौतेले पिता को लेकर खुलासा किया है। टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी और उनकी बेटी पलक तिवारी को लेकर बड़ी खबर आई थी। श्वेता ने अपने दूसरे पति अभिनव कोहली के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। कहा जा रहा था कि अभिनव ने सौतेली बेटी पलक को पीटा और उन पर अश्लील टिप्पणी की। इस पर श्वेता या अभिनव की तरफ से कोई बयान नहीं आया था, लेकिन अब पलक ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

श्वेता तिवारी की बेटी पलक ने इंस्टा पर पोस्ट शेयर किया

पलक ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की है। जिसमें उन्होंने इस मामले पर रोशनी डाली है। सबसे पहले उन्होंने सपोर्ट करने वाले लोगों को शुक्रिया अद किया है। फिर उन्होंने इस मुद्दे को उठाते बातों को क्लीयर किया है। उन्होंने लिखा, ‘इस बारे में मीडिया के पास फैक्ट्स नहीं हैं। मैं, पलक तिवारी, कई मौकों पर घरेलू हिंसा का शिकार हुई हूं, मेरी मां नहीं। जिस दिन शिकायत दर्ज करवाई गई, उसे दिन को छोड़कर उन्होंने (अभिनव कोहली) ने मेरी मां को नहीं मारा।’

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Firstly, i would like to thank everyone who’s reached out to express their concern and support. Secondly, i would like to address and clarify a few things out of my own rectitude: The media does not have the facts and they never will. I, Palak Tiwari, was on multiple occasions a victim of domestic abuse NOT my mother, except for the day that the complaint was filed he hadn’t hit my mother. As a reader of the news its often easy to forget that you do not know the truth of what goes on behind closed doors or how much fortitude my mother has shown in both her marriages. This is someone’s household you’re writing about, someone’s life you’re discussing. Many of you fortunately haven’t even dealt with something of such heinous proportions, and hence you have no right to comment, discuss or paint someone else’s image through your biased, misinformed views. It’s beyond disgusting and its time that i stand up for my mother for she is the strongest person i know and since out of all of us I’m the only person who’s witnessed her struggle day in and day out, my opinion is the only one that matters. Abhinav Kohli has never physically molested me, or touched me inappropriately. Before spreading something of this caliber or even believing it, its imperative you as readers know the veracity of the facts that you’re blindly divulging endlessly. However, he did persistently make inappropriate and disturbing remarks the impact of which is only known to my mother and I, and if any woman from any walk of life were to hear them she would be greatly embarrassed and provoked too. Words which would question the standing dignity of any woman, which you wouldn’t expect to hear from any man, especially not your “father”. Seeing our lives through social media, reading about us in the papers can only tell you so much about our struggles, but never enough to comment on them. Today as a proud daughter, I’m here to tell you that my mother is the most respectable individual that I’ve ever come across, the MOST self sufficient, one who’s never required or even had a man provide for her and has always taken the social standing of a “man” in both the families that we’ve been a part of.

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पलक ने झूठी अफवाहे फैलाने वालों को भी सुनाया। उन्होंने अपनी मां श्वेता के लिए कहा, ‘वे सबसे स्ट्रॉन्ग इंसान है और हम सभी में से मैं ही एक ऐसी शख्स हूं, जो उनके संघर्ष के दिनों की गवाह रही हूं। इसलिए सिर्फ मेरी ओपिनियन ही मायने रखती है।’

श्वेता तिवारी की बेटी बोली-अपने कयास न लगाए मीडिया

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि अभिनव ने पलक को थप्पड़ मारा और उन पर अश्लील टिप्पणी की। इस बात को क्लीयर करते हुए पलक ने लिखा कि उनके सौतेले पिता अभिनव कोहली ने उनसे फिजिकली छेड़छाड़ या उन्हें गलत तरीके से नहीं छूआ है। हालांकि उन्होंने ये जरूर बताया कि वे पलक पर अनुचित और खराब टिप्पणियां करते थे। ऐसे शब्द जो किसी भी महिला की गरिमा पर सवाल उठाते हैं।

अपनी मां श्वेता के बारे में पलक ने लिखा, ‘मैं अब तक जितने लोगों से मिली हूं, उनमें मेरी मां सबसे सम्मानित शख्स हैं। सबसे आत्मनिर्भर, जो कभी अपनी जरूरतों के लिए किसी दूसरे या किसी आदमी पर निर्भर नही थीं।’ इस पूरे मैसेज के साथ पलक ने एक पूरी ब्लैक फोटो पोस्ट की।

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Together we Stand…

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राजा चौधरी ने कही ये बात

पलक के बायलॉजिकल पिता और श्वेता तिवारी के पहले पति राजा चौधरी ने कहा, ‘मुझे इस बारे में मीडिया से पता चला। मैं अपनी बेटी से टच में हूं और मैंने उससे बता की है। उसने कहा कि चिंता करने की बात नहीं है और वो ठीक है। एक पिता के रूप में मेरे लिए ये बहुत डिस्टर्बिंग है।’   मुझे अभी पता नहीं कि मैं अपनी बेटी को कितना कानूनी सपोर्ट दे सकता हूं, लेकिन पहले मुझे उससे बात करनी होगी और इसके बात ही मैं अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए अपनी लीगल टीम से संपर्क करुंगा।’

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Blessed 🙏 #BaalBacche 👸🏼👶🏻

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वे लड़की 2017 से 2019 तक ये सोचकर चुप रही कि ये पारिवारिक मामला है और चीजें बेहतर हो जाएंगी। लेकिन जब वे इसे और सहन नहीं कर पाई, तो उसने रविवार को अपनी मां को बताया। उसकी मां उसी वक्त दोपहर करीब 1.45 पर उसे पुलिस स्टेशन ले आई। वे दोनों कई घंटों तक पुलिस स्टेशन में रहे, जहां उन्होंने डिटेल में अपनी आपबीती को सुनाई।

Himachal’s billionaire candidate-हिमाचल चुनाव में 3 अरबपति उम्मीदवार, इस जिले में दो सबसे अमीर प्रत्याशी हैं आमने-सामने

HIMACHAL PRADESH ELECTION 2022
HIMACHAL PRADESH ELECTION 2022

Himachal’s billionaire candidate-हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कई करोड़पति उम्मीदवार हैं. इनमें 3 अरबपति भी हैं. इस चोटे से स्टेट के चुनाव की रोचक बात यह भी है कि एक ही जिले में दो करोड़पति प्रत्याशी आमने-सामने हैं।
नामांकन के दौरान चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के मुताबिक हिमाचल के तीन उम्मीदवार अरबपति हैं. टॉप-5 अमीर उम्मीदवारों की सूची में 4 कांग्रेस के प्रत्याशी हैं. इनमें 3 नेता पुत्र हैं.

सबसे अमीर बलवीर वर्मा

नामांकन दाख़िल करने वाले 785 दावेदारों में चौपाल से मौजूदा बीजेपी विधायक, बागवान एवं बिल्डर बलवीर वर्मा उर 1.25 अरब की संपत्ति के साथ सबसे अमीर हैं. बलवीर वर्मा की कुल सम्पति 125 करोड़ से ज्यादा की हैं जिसमें से 4.31 करोड़ (43020083) की चल संपत्ति और 121.40 करोड़ (12140,00000) अचल संपत्ति है. इसमें 18 करोड़ की पैतृक संपत्ति भी शामिल है. बलवीर वर्मा कई लग्जरी गाड़ियों के मालिक हैं. उनके पास एक मर्सिडीज बेंज, एक बीएमडब्ल्यू, एक रेंज रोवर, एक जीप है.

Himachal’s billionaire candidate-दूसरे नंबर पर बाली के बेटे

दूसरे नंबर पर पूर्व मंत्री स्वर्गीय जीएस बाली के बेटे एवं नगरोटा से कांग्रेस प्रत्याशी रघुबीर सिंह बाली रघुवीर बाली 1.04 अरब के मालिक हैं. रघुवीर सिंह बाली के पास 13.07 करोड़ (130696393) की चल संपत्ति , पत्नी के नाम 1.58 करोड़ (15721767) और 26.09 लाख (2608882) लाख की चल संपत्ति बच्चे के पास है. इसके अलावा इनके पास भी होंडा स्पलैंडर, मर्सिडीज को मिलाकर कुल 6 गाड़ियां हैं.

राजा के बेटे तीसरे नंबर पर

तीसरे पायदान पर छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह है. विक्रम दित्य सिंह 1.02 अरब सम्पति के मालिक हैं. शिमला ग्रामीण से MLA विक्रमादित्य के पास 6.97 करोड़ (69735691) की चल संपत्ति अपने नाम, 4.08 करोड़ (40833765) पारिवारिक चल संपत्ति और 90.34 करोड़ (903391586) की अचल संपत्ति इनके नाम है. विक्रमादित्य सिंह के पास 28 लाख की फॉर्च्यूनर कार, 30 लाख की फोर्ड एंडेवर और 5.20 लाख की नेक्सा कार है.

चौथे नंबर पर चौपाल के रजनीश किमटा

चौथे नम्बर पर चौपाल से कांग्रेस प्रत्याशी रजनीश किमटा हैं. वह 31.25 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं. रजनीश किमटा के पास 37,89,297 की चल संपत्ति अपने नाम, 2,31,59,261 की अचल संपत्ति पत्नी के नाम, 30,00,000 बच्चे के नाम यानी कुल चल संपत्ति 2,99,48,558 करोड़ है. किमटा के नाम 22,00,00,000 की अचल संपत्ति, पत्नी के नाम 6,25,00,000 की संपत्ति है. इनके पास 10.72 लाख की होंडा सिटी, 50 लाख की फॉर्च्यूनर, 80 लाख मर्सिडीज, 25 लाख की जेसीबी, 30 लाख की इनोवा कार है. इनके पास 25 लाख का सोना अपने नाम और पत्नी के पास 65 लाख के जेवर हैं.

पांचवे पायदान पर आशीष बुटेल

पांचवे पायदान पर पालमुपर से कांग्रेस प्रत्याशी आशीष बुटेल हैं. जो 30.26 करोड़ के मालिक हैं. आशीष के पास 69,19,157 रुपए, पत्नी के पास 16,61,525 रुपए और बच्चे के पास 10,24,751 की चल संपत्ति है. इसी तरह 62,69,184 की अचल संपत्ति बुटेल के अपने नाम, 1,62,06,105 की अचल संपत्ति पत्नी के नाम और 27,04,41,759 की पैतृक संपत्ति है. बुटेल के पास पास थार, फॉर्च्यूनर, इनोवा और 2 स्कूटी हैं.

Campaigning picks up pace in Himachal-‘विजय संकल्प अभियान’ का आगाज 30 से, 32 स्टार प्रचारक सभी हलकों में करेंगे जनसभाएं

Campaigning picks up pace in Himachal
Campaigning picks up pace in Himachal

Campaigning picks up pace in Himachal-हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में रिवाज बदलने के लिए प्रदेश भाजपा 30 अक्तूबर को ‘विजय संकल्प अभियान’ के साथ चुनावी शंखनाद करेगी। शिमला में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा कि भाजपा के सभी स्टार प्रचारक 30 अक्तूबर को प्रदेश की सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में ’विजय संकल्प अभियान’ के द्वारा चुनावी शंखनाद करेंगे। उन्होंने कहा कि 32 स्टार प्रचारक प्रदेश के विभिन्न ज़िला एवं विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जयराम सरकार का कार्यकाल ऐतिहासिक रहा है और हम जनता के समक्ष चुनावी रिपोर्ट कार्ड लेकर उपस्थित हो रहे हैं। कश्यप ने कहा कि भाजपा की ड़बल इंजन सरकार ने अभूतपूर्व कार्य किए हैं, जिसमें एम्स जैसा संस्थान हिमाचल को मिलना, बल्क ड्रग पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, अटल टनल और रेणुका बांध आदि प्रमुख हैं। वंदे भारत एक्सप्रेेस का हिमाचल में चलना अभूतपूर्व उपलब्धि है। यह प्रधानमंत्री मोदी का हिमाचल के लिए विशेष लगाव का प्रतीक हैं।

डबल इंजन की सरकार में ही मुफ्त इलाज संभव

सुरेश कश्यप ने कहा कि ड़बल इंजन की हमारी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से 5 लाख तक का इलाज़ मुफ्त करवाया तो प्रदेश की भाजपा सरकार ने हिमकेयर के माध्यम से 5 लाख तक का मुफ्त इलाज़ प्रदेश की जनता को समर्पित किया। इसी तरह केंद्र की मोदी सरकार ने उज्जवला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को गैस के सिलेंडर मुफ्त उपल्बध करवाए और प्रदेश सरकार ने इसी तर्ज पर गृहिणी सुविधा योजना के तहत मुफ्त गैस सिंलेडर उपलब्ध करवाए। यह ड़बल इंजन सरकार के कार्यों का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

Campaigning picks up pace-चार राज्यों से शुरू हुई रिवाज बदलने की परंपरा

सुरेश कश्यप ने कहा कि रिवाज बदलने की प्रथा 4 राज्यों से शुरू हो चुकी है और अब हिमाचल में भी रिवाज बदलने वाला है। भारतीय जनता पार्टी अपने कार्यों के बलबूते भ्रष्टाचार मुक्त शासन और ईमानदार नेतृत्व के बल पर वापिस सत्ता में आ रही हैं।