टीवी से ज्यादा पसंद हैं थियेटर और फिल्में: राजेंद्र सेठी

सोनी सब (sony sub) के हॉरर कॉमेडी शो ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ के सेट्स पर इन्टरव्यू के दौरान चर्चित कलाकार राजेंद्र सेठी उर्फ चंदन खुराना ने बताया कि शो में इतने प्रतिभाशाली कलाकारों के एक साथ आने की बात ने मुझे इसमें काम करने के लिए आकर्षित किया. यही वजह है मैं चंदन खुराना की उम्दा भूमिका के साथ दर्शकों के सामने आया हूँ. जानते हें शो और राजेंद्र सेठी के बारे में.

अपने किरदार चंदन खुराना ( chandan khurana) के बारे में कुछ बतायें..

चंदन खुराना बहुत ही खुशमिजाज इंसान है, लेकिन उसके जीवन का एक दुखद पहलू है, उसकी सास उसे पसंद नहीं करती, जबकि शादी को इतने साल बीत चुके हैं। वह मन से उसे पसंद करती है या नहीं ये तो पता नहीं लेकिन बाहर से तो ऐसा ही नज़र आता है कि वह उससे नफ़रत करती है और उसकी बुराई करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ती है। वह इस बात को पचा नहीं पा रही कि कोई बैंडवाला उसका जमाई हो सकता है।

टेलीविजन पर और भी हॉरर कॉमेडी शोज़ हैं। यह शो किस तरह अलग है?

मैं 12 सालों से टेलीविजन से दूर था। लेकिन यह शो काफी अलग है, इसलिये मैं इस शो को कर रहा हूं। यहाँ मैं यह कहना चाहूंगा कि ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ कॉमेडी के जोनर में सोनी सब के शोज़ के लिये एक मिसाल साबित होने वाला है। इसके साथ ही एक तय सीरीज होने के कारण, दर्शकों के दिलों में एक अलग जगह बनाने वाला है। मैं गलत हो सकता हूं लेकिन यह मेरा विश्‍वास है और इसी वजह से मैं इस शो में काम करने के लिये तैयार हुआ था।

आपको इस शो के बारे में क्‍या पसंद आया?

इतने प्रतिभाशाली कलाकारों को एक साथ लाने की बात ने मुझे इस शो की तरफ सबसे ज्‍यादा आकर्षित किया। यदि हम मुकेश तिवारी जी की बात करें, जबकि उन्‍होंने टेलीविजन के लिये कभी काम भी नहीं किया है। इसलिये, उनके साथ बाकी कलाकारों जैसे नीलू जी और अमरदीप जी इस शो के लिये एक साथ आये जिससे यह साबित होता है कि यह अलग शो है। चूंकि, हमारा बैकग्राउंड थियेटर का है, मेरा मानना है कि यदि आपकी कास्टिंग सही हुई है तो 50 प्रतिशत काम तो तभी पूरे हो जाते हैं, उसके बाद तो सिर्फ राइटर की स्क्रिप्‍ट पर खरा उतरना होता है।

Rajendra-Sethi-twitter

इस शो से आपकी क्‍या उम्‍मीदें हैं ? दर्शकों को क्‍या चीज पसंद आयेगी?

इस शो की अच्‍छी बात है कि यह परिवार के बारे में बात करता है, जोकि अंबाला में रहता है और दर्शक इसके किरदारों की वजह से उससे जुड़ेंगे ना कि हॉरर की वजह से। यह वह हॉरर नहीं है कि कोई किसी के शरीर में प्रवेश कर रहा है; यह भूत पहले ही अपनी जिंदगी का मारा हुआ है। वह उस परिवार को इस तरह से परेशान करता है कि वह मजेदार नज़र आता है और उसका इरादा इस हद तक लोगों को नुकसान पहुंचाना नहीं है कि किसी के शरीर से खून निकलने लगे या उसकी आंखें बाहर आने लगे और यही इस शो की अलग बात है।

आप क्‍या ज्‍यादा करना पसंद करेंगे, फिल्‍में या टेलीविजन?

फिल्‍में। हालांकि, टेलीविजन से जुड़ना भी बेहद जरूरी है, लेकिन मुझे थियेटर या फिल्‍में करना ज्‍यादा संतोषजनक लगता है। सीरियल्‍स में काम करना काफी ऊबाऊ हो जाता है क्‍योंकि आपको लगातार काम करना होता है, लेकिन फिल्‍मों में आप 10-15 दिन के लिये काम करते हैं और वह भी कट के साथ। टेलीविजन में काम करने के लिये आपको बहुत ज्‍यादा कमिटमेंट करना होता है, क्‍योंकि प्रोडक्‍शन की अपनी मजबूरियां होती हैं और यह मेरे लिये थोड़ा मुश्किल है।

अब तक शूटिंग का अनुभव कैसा रहा है?

यह वाकई बहुत खूबसूरत है और मैंने हां कहने को लेकर दोबारा नहीं सोचा। सच हूं तो यह ऐसी जगह नहीं है कि जब आप सेट पर पहुंच रहे हैं तो डायरेक्‍टर उलझन में है और 2 घंटे तक कोई स्क्रिप्‍ट ही नहीं है। यहां सबकुछ पहले से ही तय है। इस शो के राइटर अमितोष ने पहले ही 26 एपिसोड की सिनोप्सिस तैयार कर रखी थी और 14 दिनों की स्क्रिप्‍ट लिखी हुई थी। हम हर दिन स्क्रिप्‍ट पर चर्चा करते थे और चूंकि सारे कलाकार थियेटर बैकग्राउंड के हैं तो सेट पर पहुंचने से पहले हम रिहर्सल भी कर लेते हैं। इससे परफॉर्मेंस और भी दमदार हो जाती है। मैं बस उम्‍मीद करता हूं कि अब तक जितने आराम से सबकुछ हो गया, आगे भी ऐसा ही हो।

DP

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