5 Conditions में SEX को Avoid करें, पार्टनर को ऐसे समझें…

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एसटीडी हो तो

5 Conditions में SEX :सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ (STD) आज के लाइफस्टाइल में बहुत क़ॉमन है। ऐसे में अगर एक पार्टनर एसटीडी से पीड़ित है, तो दूसरे को यह ट्रांसफर हो सकता है। इसलिए ऐसे में दोनों को सेक्स से दूर रहना चाहिए। आमतौर पर एसटीडी के मामले, जैसे- एचआईवी/एड्स, हेपेटाइटिस-बी, सिफिलिस की आशंका हो तो डॉक्टर कुछ टेस्ट कराते हैं और रिपोर्ट्स आने तक सेक्स से बचने की सलाह देते हैं। पार्टनर को इन बीमारियों से बचाने के लिये परहेज़ करें। सबसे अहम है कि सेक्सुअल हाइजीन का ध्यान हमेशा रखें। सेक्स के दौरान Precautions लें। एसटीडी के अलावा टी.बी., हर्पिस, चिकनपॉक्स या बैक्टीरियल इंफेक्शन जो इंटीमेट फिज़िकल कॉन्टैक्ट के ज़रिए फैलती हैं, के दौरान भी इंटीमेट होने से परहेज़ करें।

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प्रेगनेंसी के दौरान

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ प्रेगनेंसी के छठे हफ़्ते से लेकर बारहवें हफ़्ते तक सेक्स से परहेज़ करना चाहिये, यह सुरक्षित नहीं होता। इस दौरान गर्भपात की संभावना सबसे अधिक होती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के आख़िरी दो महीनों में भी सेक्स से परहेज़ करना चाहिए, क्योंकि सेक्स से एम्नियोटिक फ्लूइड के लीक होने की आशंका होती है।

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ज़रूरी है कि पति ऐसे वक्त में अपनी पत्नी का पूरा ख़्याल रखें। उसे सेक्स के लिये फोर्स न करें। ऐसे वक्त में उसका हरदम खुश रहना ज़रूरी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ प्रेगनेंसी के चौथे से सातवें महीने तक सेक्स किया जा सकता है, लेकिन इसमें भी पत्नी को अगर कंफर्टेबल फील हो तो ही संबंध बनायें।

5 Conditions में SEX: झगड़ा होने पर

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ज़्यादातर लोगों की सोच होती है कि लड़ाई-झगड़ा या तक़रार की स्थिति में सेक्स के ज़रिए आप रिश्ते को सुधार सकते हैं, लेकिन ये हर बार सही नहीं है। सेक्स का मतलब आपसी प्यार को दर्शाना है, न कि ज़बर्दस्ती करना। झगड़े को ठीक करने के लिए किया गया सेक्स महज़ एक शारीरिक क्रिया बन जाती है, जिसमें भावनाएं न के बराबर होती हैं। ऐसे में झगड़े को ठीक करने के लिए सबसे पहले साथी को मनाएं। ग़लती आपकी है, तो माफ़ी मांगने में पीछे न रहें। इस तरह न स़िर्फ आपकी सेक्सुअल लाइफ ख़ुशहाल रहेगी, बल्कि मतभेद (Differences) भी दूर होगें। http://प्रेगनेंसी में भी होता है यूटरस टबरक्लोसिस, जानें

5 Conditions में SEX: सर्जरी के बाद

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सर्जरी के बाद पार्टनर की शारीरिख क्षमता तो प्रभावित होती है साथ ही मानसिक तौर पर भी इससे उबरने में वक्त लगता है। सर्जरी कितनी भी छोटी हो, जब तक डॉक्टर ज़ख्म ठीक होने की पुष्टि न कर दे, तब तक शारीरिक संबंध न बनाएं। डॉक्टरी सलाह के बिना ऐसा करना आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। आमतौर पर बड़ी सर्जरी, सीज़ेरियन डिलिवरी में भी 45 दिनों से लेकर तीन महीनों के लिए परहेज़ की सलाह दी जाती है। सर्जरी के बाद दवाइयों व थैरेपी के कारण पार्टनर की सेक्स में दिलचस्पी कम हो जाती है। घाव में होने वाला दर्द उसे कुछ और सोचने नहीं देता, ऐसे में आपका प्यार उसके ज़ख्मों को जल्दी हील करेगा।

डिलीवरी या स्टिल बर्थ के बाद

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वैसे तो बच्चे के जन्म के साथ-साथ एक मां का भी जन्म होता है। ख़ासतौर से पहली बार मां बनी महिलाओं के लिए उनका बच्चा ही सब कुछ हो जाता है। डिलीवरी के बाद कमज़ोरी और इमोशनल चेंज उनमें आते हैं। जिससे उनकी सेक्स की इच्छा लगभग ख़त्म हो जाती है। ऐसे में उन्हें 3-6 महीनों का समय लग जाता है सेक्सुअल डिज़ायर वापस लौट आने में। इसके अलावा अगर स्टिल बर्थ हुआ है तो महिलाएं मानसिक तौर पर 6 महीने का वक्त ले सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक डिलीवरी के बाद छह हफ़्तों तक सेक्स नहीं करना चाहिए। इसके बाद भी डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।