मांग और निवेश में कमी से संकट में है ऑटो इंडस्ट्री, कैसे उबरेगी…

automobile-industry-2
automobile-industry-2

मांग और निवेश में कमी के चलते ऑटो इंडस्ट्री में मंदी जारी है। बीते महीनों में वाहनों की बिक्री में तेजी से गिरावट दर्ज की गयी है. इससे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के हालात चिंताजनक हैं. ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में मांग में कमी से कंपनियों और डीलरों की कमाई कम हो रही है, तो दूसरी तरफ बैंकों से कर्ज लेने की प्रक्रिया मुश्किल होती जा रही है. सरकार, उत्पादक, निवेशक और नीति-निर्धारकों को वाहन उद्योग के आसन्न संकट पर गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि अर्थव्यवस्था की सेहत बरकरार रहे

जुलाई में घटी बिक्री

ऑटोमोबाइल उद्योग में बीते कई महीनों से गिरावट जारी है. बीते जुलाई माह में वाहनों की बिक्री बीते दो दशकों में सबसे कम रही. बाजार में मांग कम होने से यात्री वाहन निर्माता शीर्ष कंपनियों को बड़े संकट से गुजरना पड़ रहा है. असल में आर्थिक अनिश्चितताओं के बढ़ने, ताजा निवेश में कमी और गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं (नॉन-बैंकिंग लेंडिंग स्पेस) के दबाव में आने से शहरी और ग्रामीण दोनों उपभोक्ताओं की तरफ से मांग में भारी कमी आयी है.

मारुति की बिक्री में 37 प्रतिशत की कमी

auto in
auto in

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के घरेलू यात्री वाहन की बिक्री में, इस वर्ष जुलाई में पहले की तुलना में लगभग 36 प्रतिशत की कमी आयी है. बीते महीने जहां मारुति ने 1,54,510 यूनिट की बिक्री की, वहीं जुलाई में महज 98,210 वाहनों (यूनिट) की बिक्री ही हो पायी. जून 2017 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब मारुति ने एक महीने में एक लाख यूनिट से कम की बिक्री की है.

बाजार मांग में क्यों आयी गिरावट

auto mobile
auto mobile

मौजूदा वर्ष की पहली तिमाही में बाजार मांग में गिरावट की एक अहम वजह चीनी बाजार की वर्तमान स्थिति भी है. वित्त वर्ष 2019 में जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) की बिक्री में 34 प्रतिशत की गिरावट रही. हालांकि, टाटा मोटर्स का मानना है कि हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं. पहली तिमाही में व्यावसायिक वाहनों (सीवी) और यात्री वाहनों (पीवी) के लिए तरलता और वित्तपोषण की स्थिति चिंताजनक रही. अब इन समस्याओं के हल होने की संभावना जतायी जा रही है.  कंपनियां नये उत्पादों को लांच करने के साथ-साथ इन्वेंट्री को सही करने, खुदरा विकास और डीलरों का लाभ बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही हैं. http://www.indiamoods.com/1-million-jobs-in-auto-parts-industry-in-danger-gst-hit/

कंपनियों का मानना है कि सरकार के हस्तक्षेप से आने वाली तिमाहियों में तरलता की स्थिति में सुधार होगा. सरकार ने 2019 के बजट में सरकारी बैंकों को क्रेडिट गारंटी का प्रावधान किया है, जिससे गैर-वित्तीय कंपनियों से अच्छे ऋण लिये जा सकेंगे.

बै‍ंक नहीं दे रहे कर्ज़

कर्ज फंसने के भय से कई बैंक ऑटो मोबाइल डीलरों को कर्ज देने से बच रहे हैं. दशक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही ऑटो इंडस्ट्री को बैंक कर्ज देने से पहले बहुत सावधानी बरत रहे हैं. बैंकिंग इंडस्ट्री का अनुमान है कि ऑटो मोबाइल डीलरों पर 70 से 80 हजार करोड़ रुपये बकाया है. इसी हफ्ते भारतीय स्टेट बैंक ने सभी शाखाओं को सर्कुलर जारी करते हुए निर्देश दिया है कि ऑटो डीलरों को कर्ज देते समय विशेष मानदंडों का अनुपालन करें.