बेदम कर रहा दमा: अच्छे खानपान से रखें अपनी सांसों का ख्याल

Girls-Guide-to-Asthma
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By- NIROSHAA SINGH

बेदम कर रहा दमा: अस्थमा (दमा) सांस की एक बीमारी है, जिसमें मरीज सांस ठीक तरीके से नहीं ले पाता। इस बीमारी में सांस की नली में सूजन या पतलापन आ जाता है। इससे फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव महसूस होता है। ऐसे में सांस लेने पर दम फूलने लगता है, खांसी होने लगती है और सीने में जकड़न के साथ-साथ घर्र-घर्र की आवाज आती है। अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है ।

  • अस्थमा के दो प्रकार होते हैं- बाहरी और आंतरिक अस्थमा।
  • अस्‍थमा के लक्षण
  • सामान्य लक्षणों में अस्थमा की पहचान बलगम वाली खांसी या सूखी खांसी के जरिये होती है।
  • सीने में जकड़न महसूस होना। मरीज़ को सांस लेने में कठिनाई या घरघराहट की आवाज़ आना।
  • रात में या सुबह के समय सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होना।
  • ठंडी हवा में सांस लेने से हालत गंभीर होना।
  • व्यायाम के दौरान स्‍वास्‍थ्‍य और ज्‍यादा खराब होना। जोर-जोर से सांस लेना, थकान महसूस होना।
  • कई बार उल्टी लगने की भी आशंका बढ़ जाती है।

बेदम कर रहा दमा, जानें इसके कारण

asthama attack
asthama attack

प्रदूषण: अस्थमा के अहम कारणों में वायु प्रदूषण एक है। स्मोकिंग, धूल, कारखानों से निकलने वाला धुआं, धूप-अगरबत्ती और कॉस्मेटिक जैसी सुगंधित चीजों से दिक्कत बढ़ जाती है।
सर्दी, फ्लू, धूम्रपान, मौसम में बदलाव के कारण भी लोग अस्‍थमा से ग्रसित हो रहे हैं। कुछ ऐसे एलर्जी वाले फूड्स हैं जिनकी वजह से सांस संबंधी बीमारियां होती हैं। कुछ दवाईयां, शराब का सेवन और कई बार तनाव भी अस्‍थमा का कारण बनते हैं। ज्यादा एक्सरसाइज़ से भी दमा रोग हो सकता है। यह समस्‍या आनुवांशिक भी होती है।http://एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम क्या है? जानें चमकी बुखार के लक्षण, उपचार

बेदम कर रहा दमा, अस्‍थमा के प्रकार

Asthma
Asthma

एलर्जिक अस्थमा: एलर्जिक अस्थमा के दौरान आपको किसी चीज से एलर्जी है जैसे धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही आपको दमा हो जाता है या फिर मौसम परिवर्तन के साथ ही आप दमा के शिकार हो जाते हैं।
नॉनएलर्जिक अस्थमा: इस तरह के अस्थमा का कारण किसी एक चीज की अति होने पर होता है। जब आप बहुत अधिक तनाव में हो या बहुत तेज-तेज हंस रहे हो, आपको बहुत अधिक सर्दी लग गई हो या बहुत अधिक खांसी-जुकाम हो।
मिक्सड अस्थमा: इस प्रकार का अस्थमा किन्हीं भी कारणों से हो सकता है। कई बार ये अस्थमा एलर्जिक कारणों से तो है तो कई बार नॉन एलर्जिक कारणों से। इतना ही नहीं इस प्रकार के अस्थमा के होने के कारणों को पता लगाना भी थोड़ा मुश्किल होता है।
ऑक्यूपेशनल अस्थमा: ये अस्थमा अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है। नियमित रूप से लगातार आप एक ही तरह का काम करते हैं तो या अपने कार्यस्थल का वातावरण सूट नहीं करता तो इस प्रकार के अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।
एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा: एक्सरसाइज या फिर अधिक शारीरिक सक्रियता के कारण अस्थमा हो जाता है।
कफ वेरिएंट अस्थमा: कई बार अस्थमा का कारण कफ होता है। जब आपको लगातार कफ की शिकायत होती है या खांसी के दौरान अधिक कफ आता है तो आपको अस्थमा अटैक पड़ जाता है।
नॉक्टेर्नल यानी नाइटटाइम अस्थमा: ये अस्थमा का ऐसा प्रकार है जो रात के समय ही होता है यानी जब आपको अकसर रात के समय अस्थमा का अटैक पड़ने लगे तो आपको समझना चाहिए कि आप नॉक्टेर्नल अस्थमा के शिकार हैं।
मिमिक अस्थमा: जब कोई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कोई बीमारी जैसे निमोनिया, कार्डियक जैसी बीमारियां होती हैं तो आपको मिमिक अस्थमा हो सकता है।
चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा: ये अस्थमा का वो प्रकार है जो सिर्फ बच्चों को ही होता है। अस्‍थमैटिक बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है तो बच्चा इस प्रकार के अस्थमा से अपने आप ही बाहर आने लगता है। ये बहुत रिस्की नहीं होता लेकिन इसका सही समय पर उपचार जरूरी है।
एडल्ट ऑनसेट अस्थमा: ये अस्थमा युवाओं को होता है। यानी अकसर 20 वर्ष की उम्र के बाद ही ये अस्थमा होता है। इस प्रकार के अस्थमा के पीछे कई एलर्जिक कारण छुपे होते हैं। हालांकि इसका मुख्य कारण प्रदूषण, प्लास्टिक, अधिक धूल मिट्टी और जानवरों के साथ रहने पर होता है।

दवाएं और उपचार

OpenAirway-Inhaler
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  • एंटी-इन्फ्लेमेटरी: यह सूजन और जलन को कम करने वाली दवा है। यह विशेष रूप से नाक के जरिए ली जाने वाली दवा है। इस दवा से सांस की नली में सूजन और कफ बनना कम होता है।
  • ब्रोंकोडाइलेटर्स: ये दवाएं सांस की नली को फौरन चौड़ा करती हैं। इसे फौरी राहत के लिए दिया जाता है। लंबी अवधि के लिए इनफ्लेमेटरी या हाइपर एक्टिविटी को कम करने की दवा देते हैं।
  • इनहेलर: अस्थमा में इनहेलर थेरपी इस्तेमाल करनी चाहिए। लोगों के मन में धारणा है कि इनहेलर थेरपी का इस्तेमाल आखिर में करना चाहिए या फिर डॉक्टर बीमारी बढ़ने पर ही इस थेरपी को देते हैं, लेकिन यह सोच गलत है। जो दवाएं या पाउडर इनहेलर के ज़रिए दिया जाता है, वह ज्यादा असर करता है।http://गर्मी में रखेंगे ख्याल तो बचे रहेंगे इन 5 बीमारियों से

घरेलू नुस्खे

asthama
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अस्थमा में गर्म पानी का सेवन लाभदायक होता है और इससे आराम मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा में दमा का कोई स्थायी समाधान नहीं है। योग की मदद से इसे कंट्रोल कर सकते हैं। यह इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का भी काम करता है।

अस्‍थमा से बचाव

asthma in monsoon
asthma in monsoon
  • -अस्‍थमा के मरीजों को बारिश और सर्दी से ज्‍यादा धूल भरी आंधी से बचना चाहिए।
  • -बारिश में नमी के बढ़ने से संक्रमण की संभावना ज्‍यादा होती है। इसलिए खुद को इन चीजों से बचा कर रखें।
  • -ज्‍यादा गर्म और ज्‍यादा नम वातावरण से बचना चाहिए, क्‍योंकि इस तरह के वातावरण में मोल्‍ड स्‍पोर्स के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। धूल मिट्टी और प्रदूषण से बचें। घर से बाहर निकलने पर मास्‍क साथ रखें।
  • -सर्दी के मौसम में धुंध में जानें से बचें। धूम्रपान करने वाले व्‍यक्तियों से दूर रहें।
  • -एलर्जी वह जगह और चीजों से दूर रहें। हो सकते तो हमेशा गर्म या गुनगुने पानी का सेवन करें।
  • -अस्‍थमा के रोगियों को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा वाली चीजों का सेवन कम से कम करना चाहिए।
  • -कोल्‍ड ड्रिंक, ठंडा पानी और ठंडी प्रकृति वाले आहारों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • -सूखी सफाई यानी झाड़ू से घर की साफ-सफाई से बचें। अगर ऐसा करते हैं तो ठीक से मुंह-नाक ढक कर करें। वैसे, वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करना बेहतर है। गीला पोंछा और पानी से फर्श धोना भी अच्छा विकल्प हो सकता है।
  • बेडशीट, सोफा, गद्दे आदि की भी नियमित सफाई करें, खासकर तकिया साफ रखें क्योंकि इसमें काफी सारे कीटाणु मौजूद होते हैं।
  • -हफ्ते में 2 बार चादर और तकिए के कवर बदल लें और कम से कम दो महीने में पर्दे धो लें।