अमेठी संसदीय सीट पर क्यों डर रही है कांग्रेस, जानें सियासी समीकरण

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राहुल गांधी इस बार अमेठी संसदीय सीट के अलावा केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं। अमेठी को कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता है। इस लोकसभा सीट पर अब तक 16 आम चुनाव और 2 उपचुनाव हुए हैं। इनमें से कांग्रेस ने 16 बार जीत दर्ज की है। बीजेपी ने अमेठी में 1998 में जीत दर्ज की थी, जबकि उससे पहले एक बार 1977 में यहां से जनता पार्टी ने बाजी मारी थी। इन दो चुनावों के अलावा अमेठी से हुए किसी भी चुनाव में कांग्रेस के अलावा कोई दूसरी पार्टी जीत नहीं सकी है। हालांकि, 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नाम पर बीजेपी ने पूरे देश में जबरदस्त जीत हासिल की और यूपी की 80 में 71 सीटों पर अपना परचम लहराया लेकिन अमेठी सीट पर कांग्रेस ही जीती।

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ऐसे समझें वोटों का गणित

अमेठी लोकसभा सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाता किंगमेकर की भूमिका में रहते हैं। अमेठी में मुस्लिम मतदाता 4 लाख के करीब हैं

तकरीबन साढ़े तीन लाख वोटर दलित हैं।

इनमें पासी समुदाय के वोटर काफी अच्छे हैं।

यादव, राजपूत और ब्राह्मण भी इस सीट पर अच्छे खासे हैं।

सपा अमेठी से अपना प्रत्याशी नहीं उतारती है और इस बार गठबंधन में लड़ रही बसपा ने भी अमेठी से कोई प्रत्याशी न उतारने का निर्णय लिया है।

ऐसे में कांग्रेस इस समीकरण को देखकर राहत की सांस ले सकती है कि अपने परंपरागत मतों के साथ इस बार राहुल गांधी दलित और यादव समाज का अच्छा वोट पाकर अपने विजयी रथ को जारी रखने में कामयाबी हासिल कर सकते हैं लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू ये भी है कि दलितों का जो रुझान बीजेपी की तरफ देखा गया है, वैसे में अगर बीजेपी बसपा और सपा से जुड़े वोटरों को अपनी तरफ खींचने में कामयाब हो पाती है, तो राहुल गांधी के लिए अमेठी असुरक्षित बन सकता है।

2014 में स्मृति को हराया था

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर राहुल गांधी ने चुनाव लड़ा और उनका मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी से हुआ। राहुल गांधी को इस चुनाव में कुल 4,08,651 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर स्मृति ईरानी रहीं और उन्होंने 3,00,748 वोट हासिल किए। यानी राहुल की जीत का अंतर महज 1 लाख 7 हजार 903 वोट रहा। यूं तो एक लाख से ज्यादा मतों की जीत भी कम नहीं मानी जाती, लेकिन राहुल गांधी के पूरे करियर में उनकी जीत का यह मार्जिन सबसे कम था। राज्य की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 24 सीट ही ऐसी थीं, जिन पर जीत का अंतर एक लाख के पास या उससे कम रहा था। यानी मोदी लहर में बीजेपी के सभी छोटे-बड़े प्रत्याशियों ने दो लाख से लेकर तीन-चार लाख मतों के अंतर से चुनाव जीता था।

2014 में  बीजेपी का वोट 5.8% से छलांग लगाता हुआ सीधे 34.4% पहुंच गया और राहुल गांधी का सेंसेक्स 71.8% से गिरकर 46.7% पर आ टिका।

जबकि हमेशा कांग्रेस प्रत्याशी को टक्कर देने वाली बीएसपी तीसरे नंबर पर खिसक गई और उसके प्रत्याशी को महज 6.6 फीसद वोट मिल पाए। आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास महज 25 हजार वोट ही हासिल कर पाए।

2004 में राहुल को मिले 66.2% वोट

2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले राहुल गांधी ने अमेठी सीट से ही लड़ते हुए 3,90,179 वोट (66.2%) हासिल किए थे. जबकि 99,326 (16.8%) मतों के साथ बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मिश्रा दूसरे नंबर पर रहे थे. तीसरे नंबर पर बीजेपी के रामविलास वेदांती रहे थे और उन्हें कुल 55,438 (9.4%) वोट मिले थे. यानी राहुल गांधी ने अपना पहला चुनाव ही 2 लाख 90 हजार से ज्यादा मतों से जीता था. इसके बाद दूसरे चुनाव में राहुल गांधी का ग्राफ और ऊंचा चला गया.

2009 में राहुल को मिले 71.8% वोट

राहुल गांधी ने जब पहला चुनाव लड़ा तो केंद्र में उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार थी, लेकिन 2009 में जब कांग्रेस सत्ता में थी और राहुल अमेठी से अपना दूसरा चुनाव लड़े तो विरोधी प्रत्याशी उनके सामने धराशाई हो गए. राहुल ने 4,64,195 वोट हासिल करते हुए कुल मतों का 71.8% हिस्सा अपने नाम कर लिया. जबकि बहुजन समाज पार्टी के आशीष शुक्ला 93,997 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे और बीजेपी प्रत्याशी प्रदीप कुमार सिंह को महज 37,570 वोट मिले.