Agnipath recruitment scheme -सेना में चार साल की नौकरी वाली सरकार की योजना आखिर क्या है

Agnipath recruitment scheme
Agnipath recruitment scheme

Agnipath recruitment scheme -अब थलसेना, वायुसेना और नौसेना में युवाओं की भर्ती चार साल के लिए होगी। मंगलवार को भारत सरकार ने नई भर्ती प्रक्रिया ‘अग्निपथ’ की घोषणा की। आर्मी भर्ती के इस नए प्रोसेस से निकले सैनिकों को ‘अग्निवीर’ कहा जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि सुरक्षा संबंध कैबिनेट समिति ने यह फैसला किया है। उन्‍होंने कहा कि ‘हम अग्निपथ नामक एक योजना ला रहे हैं जो हमारी सेना में परिवर्तनकारी बदलाव कर उन्हें पूरी तरह से आधुनिक और सुसज्जित बनाएगी।’
Agnipath recruitment scheme -ये हैं खास बातें
युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती कराया जाएगा. 

  • इस दौरान अग्निवीरों को आकर्षण वेतन मिलेगा सेना की चार साल की नौकरी के बाद युवाओं को भविष्य के लिए और अवसर दिए जाएंगे. 
  • चार साल की नौकरी के बाद सेवा निधि पैकेज मिलेगा.
    इस योजना के तहत भर्ती किए जाने वाले ज्यादातर जवानों को चार साल बाद मुक्त कर दिया जाएगा. हालांकि, कुछ जवान अपनी नौकरी को जारी रख सकेंगे.

 17.5  साल से 21 साल के युवाओं को मौका मिलेगा. 

  • ट्रेनिंग 10 हफ्ते से 6 महीने तक होगी. 

Agnipath recruitment scheme -10/12वीं के छात्र कर सकेंगे आवेदन. 

90 दिन अग्निवीरों की पहली भर्ती होगी. 
अगर कोई अग्निवीर देश सेवा के दौरान शहीद हो जाता है, तो उसके परिजनों को सेवा निधि समेत 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ब्याज समेत मिलेगी.
इसके अलावा बाकी बची नौकरी का भी वेतन दिया जाएगा.

वहीं, अगर कोई अग्निवीर डिसेबिल हो जाता है, तो उसे 44 लाख रुपए तक की राशि दी जाएगी. इसके अलावा बाकी बची नौकरी का भी वेतन मिलेगा.
जो लोग इन भर्ती परीक्षा में चयनित होंगे, उन्हें चार साल के लिए नौकरी मिलेगी. 
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को पहले साल 4.76 लाख का सालाना पैकेज मिलेगा. चौथी साल तक बढ़कर ये 6.92 लाख तक पहुंच जाएगा . इसके अलावा अन्य रिस्क और हार्डशिप भत्ते भी मिलेंगे. चार साल की नौकरी के बाद युवाओं को 11.7 लाख रुपए की सेवा निधि दी जाएगी.

Agnipath recruitment scheme


चार साल की नौकरी के बाद युवाओं को 11.7 लाख रुपए की सेवा निधि दी जाएगी. इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. 

इसके अलावा सेना में 25 फीसदी जवान बने रह पाएंगे जो निपुण और सक्षम होंगे. हालांकि, ये भी तभी संभव रहेगा अगर उस समय सेना में भर्तियां निकलीं हों. इस प्रोजेक्ट की वजह सेना को करोड़ों रुपये की बचत भी हो सकती है.
एक तरफ पेंशन कम लोगों को देनी पड़ेगी तो वहीं दूसरी तरफ वेतन में भी बचत हो जाएगी.