बीजेपी के खिलाफ माहौल का फायदा लेने की फिराक में आप, नहीं बनेगी महागठबंधन का हिस्सा

AAP

आम आदमी पार्टी माहगठबंधन में शामिल नहीं होगी, और न ही किसी के साथ चुनावी गठबंधन करेगी।  2019 आम चुनावों में भाजपा का मुकाबला करने के लिए विपक्ष के महागठबंधन बनाने की तैयारियों को ‘आप’ ने जोरदार झटका दिया है। गुरुवार को आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने साफ किया कि वह किसी भी महागठबंधन का हिस्सा नहीं बनने जा रही है और न ही किसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का उसका इरादा है। वह अकेले दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी।

कांग्रेस के साथ आप के गठबंधन की चर्चाओं को तब बल मिला था जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पिछले दिनों  किसान मोर्चा के दिल्ली मार्च के दौरान एक ही मंच पर नज़र आये थे। बता दें कि इससे पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कांग्रेस के नेतृत्व में चुनाव लड़ने पर असहमति जता चुके हैं।

सांसद संजय सिंह का कहना है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली, गोवा हरियाणा और पंजाब में अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। आने वाले लोकसभा चुनावों में चार राज्यों की कुल 33 सीटों पर आम आजमी पार्टी चुनाव लड़ सकती है, जिनमें दिल्ली की सात सीटें, पंजाब की 13 सीटें, हरियाणा की 10 सीटें, गोवा की दो सीटें और चंडीगढ़ की एक सीट शामिल है। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस के साथ होने वाले संभावित गठबंधन पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

 15 फरवरी तक हो सकता है उम्मीदवार का ऐलान 

15 फरवरी तक आम आदमी पार्टी दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के सभी उम्मीदवारों के नाम का एलान कर देगी। हालांकि पार्टी ने पंजाब में 13 लोकसभा में से पांच पर उम्मीदवार घोषित कर दिये हैं।

दिल्ली में कुल सात में से पांच सीट पर पहले ही प्रभारी घोषित हो चुके हैं, जो संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं। केजरीवाल चार जनवरी को हरियाणा के चरखी दादरी की जन सभा से लोक सभा अभियान को लॉन्च करेंगे। पार्टी की रणनीति है कि केजरीवाल को एक बार फिर से चुनाव में आजमाया जाये।

किस राज्य में कितनी सीटों पर लड़ेगी आप

राज्य     -सीट

दिल्ली    –  07

पंजाब      -13

हरियाणा   – 10

गोवा       – 02

चंडीगढ़    – 01

33 में से 19 सीटें भाजपा के पास 

14 सीटें अन्य दलों के पास

अगर कांग्रेस और आप में महागठबंधन होता तो इनके पास 8 सीटें हो सकती थी। लेकिन आप की एकला चलो की घोषणा ने कांग्रेस के इरादों पर पानी फेर दिया है।

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