24 घंटे में 4205 मरीज़ों की मौत, संक्रमण के केस घटे, विशेषज्ञों को उम्मीद निकल गया Second wave का पीक

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24 घंटे में 4205 मरीज़ों की मौत अब तक एक ही दिन में कोरोना से मरने वालों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। देश में लगातार दूसरे दिन उपचाराधीन मरीजों की संख्या में कमी आने के बीच संक्रमण ने एक दिन में सर्वाधिक 4,205 लोगों की जान ले ली। पिछले 24 घंटों के दौरान जहां संक्रमण के 3,48,421 नए मामले सामने आने से संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 2,33,40,938 हो गई, वहीं कुल मृतक संख्या का आंकड़ा भी बढ़कर 2,54,197 हो गया है।

4205 मरीज़ों की मौत

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स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, उपचाराधीन मामले 11,122 की कमी के साथ 37,04,099 हो गए, जो संक्रमण के कुल मामलों का 15.87 प्रतिशत है, जबकि संक्रमित लोगों के स्वस्थ होने की दर सुधरकर 83.04 प्रतिशत हो गई है। अब तक 1,93,82,642 लोग संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके हैं, जबकि मृत्युदर 1.09 प्रतिशत है। देश में महामारी के मामले गत 4 मई को दो करोड़ के पार चले गए थे।

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क्या कहती है आईसीएमआर की रिसर्च

Indian Council of Medical Research के मुताबिक, 11 मई तक 30,75,83,991 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 19,83,804 नमूनों की जांच मंगलवार को की गई। जिन 4,205 और लोगों की मौत हुई है, उनमें पंजाब के 214, राजस्थान के 169, हरियाणा के 144 और उत्तराखंड के 118 भी शामिल हैं।

4205 मरीज़ों की मौत, टीकों की 17.52 करोड़ खुराकें दी

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में कोविड-19 रोधी टीकों की 17.52 करोड़ खुराकें दी गयी है। सुबह सात बजे की रिपोर्ट के मुताबिक 25,47,534 सत्र के जरिए टीके की 17,52,35,991 खुराकें दी गयी। पिछले 24 घंटे में 24.4 लाख से ज्यादा खुराकें दी गयी।

फीकी पड़ रही कोरोना की दूसरी लहर

Eminent virologist शाहिद जमील के अनुसार भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर धीमी पड़ती दिख रही है। अशोक विश्वविद्यालय में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंस के निदेशक जमील ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम में कहा दूसरी लहर अपने चरम पर है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।…संभवत: यह ज्यादा लंबी चलेगी और जुलाई तक जारी रह सकती है। अर्थ यह कि मामलों में कमी आने के बावजूद हमें रोजाना बड़ी संख्या में संक्रमण से निपटना होगा। उनके विचार में भारत में मृत्यु दर के आंकड़े पूरी तरह गलत हैं। ‘ऐसा किसी व्यक्ति, समूह या राज्य की गलत मंशा के कारण नहीं, बल्कि हम जिस तरह से रिकॉर्ड रखते हैं, यह उसके कारण है।