नारदा स्टिंग केस में तृणमूल के 2 मंत्रियों समेत 4 नेताओं को मिली ज़मानत, आज ही हुए थे गिरफ्तार

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सीबीआई ने सोमवार को नारदा स्टिंग केस में पश्चिम बंगाल के 2 मंत्रियों फरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा और पूर्व मंत्री शोभन चटर्जी को कोलकाता में गिरफ्तार कर लिया। बाद में उन्हें विशेष अदालत ने जमानत दे दी, जबकि सीबीआई ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की थी। ये चारों नेता 2014 में कथित अपराध के दौरान मंत्री थे। आईपीएस अधिकारी एसएमएच मिर्जा मामले में पांचवें आरोपी हैं और फिलहाल वह जमानत पर हैं।

नारदा स्टिंग केस-सीबीआई दफ्तर पहुंची ममता

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इससे पहले, नेताओं की गिरफ्तारी के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में निजाम पैलेस स्थित सीबीआई के दफ्तर पहुंचीं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सीबीआई के दफ्तर और राजभवन के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने सीबीआई दफ्तर के बाहर अवरोधकों को तोड़ दिया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया और प्लास्टिक की बोतलें फेंकीं।

सीबीआई क्या कहती है

दिल्ली में सीबीआई के प्रवक्ता आरसी जोशी ने कहा कि गिरफ्तार किए गये नेताओं पर आरोप है कि उन्हें स्टिंग ऑपरेशन के दौरान कैमरे पर गैरकानूनी रूप से धन लेते हुए पकड़ा गया था। उन्होंने बताया कि अभियोजन के लिए मंजूरी मिलने के बाद पांचों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने 7 मई को चारों नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी, जिसके बाद सीबीआई ने आरोप पत्र को अंतिम रूप दिया और उन्हें गिरफ्तार किया।

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नारदा स्टिंग केस- टीएमसी छोड़ बीजेपी में आये थे

हकीम, मुखर्जी और मित्रा हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गये हैं, जबकि चटर्जी ने भाजपा में शामिल होने के लिए तृणमूल को छोड़ा था।

2014 में हुआ था स्टिंग

नारदा टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था, जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर धन लेते नजर आए। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि हकीम ने स्टिंग ऑपरेटर से 5 लाख रुपये रिश्वत लेने की बात स्वीकारी, जबकि मित्रा और मुखर्जी को कैमरे पर 5-5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। चटर्जी को स्टिंग ऑपरेटर से 4 लाख रुपये लेते हुए देखा गया।

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मिर्ज़ा को 5 लाख की घूस लेते पकड़ा

सीबीआई के अनुसार मिर्जा को भी कैमरे पर 5 लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया। यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सार्वजनिक हुआ था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में मार्च 2017 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

सीबीआई बनाम सरकार -गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन

नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध ने 2019 की याद ताजा कर दी है। तब कोलकाता पुलिस के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करने के सीबीआई के कदम का भी पश्चिम बंगाल सरकार ने जबर्दस्त विरोध किया था। सीबीआई सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कार्रवाई, जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपे जाने के कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले में दखल के समान है।