लोकसभा चुनाव: हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट का पूरा गणित, GROUND REPORT

मंडी- हिमाचल प्रदेश की चार संसदीय सीटों में से एक मंडी लोकसभा सीट कई मायनों में अहम है. माना जाता है कि इस सीट जिस पार्टी का प्रत्याशी जीतता है, उसी पार्टी की सरकार देश में बनती है. खास बात है कि इस सीट पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अलावा वाम दलों की अच्छी पैठ है और हर चुनाव को वह त्रिकोणीय बना देते हैं. इस सीट से कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह दो बार सांसद रही हैं, फिलहाल यह सीट बीजेपी के पास है. सूबे के वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इसी संसदीय क्षेत्र के सिराज सीट से विधायक हैं.

छोटा काशी के नाम से मशहूर मंडी को पहले मांडव्य नगर के नाम से जाना जाता था. करीब 10 लाख आबादी वाला यह जिला व्यापार और वाणिज्य के सबसे व्यस्त केंद्रों में से एक है. यहां की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कृषि है. इस जिले की करीब 80 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है और वह चावल, दालों, बाजरा, चाय, तिल के बीज, मूंगफली, सूरजमुखी तेल और हर्बल उत्पादों का उत्पादन करते हैं. मंडी जिले की निचली पहाड़ियों में किसान सिल्क बनाते हैं. बाजार में सबसे कम दाम पर कच्चे रेशम मंडी के किसान ही उपलब्ध कराते हैं. मंडी में सबसे ज्यादा सेब का उत्पादन होता है. इसके अलावा यहां के लोग पर्यटन पर भी निर्भर हैं.

सामाजिक तानाबाना

मंडी लोकसभा सीट के अन्तर्गत 17 विधानसभा सीटें (भरमौर, लाहौल और स्पीति, मनाली, कुल्लू, बन्‍जार, आनी, करसोग, सुन्‍दरनगर, नाचन, सिराज,    दरंग, जोगिन्‍द्रनगर, मण्‍डी, बल्ह, सरकाघाट, रामपुर और किन्नौर) हैं. 2017 के विधासभा चुनाव में इनमें से बीजेपी ने 13 सीटों (भरमौर, लाहौल और स्पीति, मनाली, बन्‍जार, आनी, करसोग, सुन्‍दरनगर, नाचन, सिराज, दरंग, मण्‍डी, बल्ह, सरकाघाट) और कांग्रेस ने 3 सीटों (कुल्लू, रामपुर और किन्नौर) और निर्दलीय प्रत्याशी ने एक सीट (जोगिन्‍द्रनगर) पर जीत दर्ज की थी. भारत निर्वाचन आयोग की 2014 की रिपोर्टे के मुताबिक, इस लोकसभा क्षेत्र में 11.50 लाख वोटर हैं, जिनमें 5.87 लाख पुरुष और 5.62 लाख महिला वोटर हैं.

राजनीतिक घटनाक्रम:

इस गंजे युवक ने बेहद सामान्य ढंग से फिर अपने बाल उगाए सोने से पहले इसे खाएं और बिना जिम जाए 3 हफ्ते में 25 किलो वजन घटाएं अगर बात मंडी लोकसभा सीट के राजनीतिक घटनाक्रम की करें तो इस सीट पर आजादी के बाद सबसे अधिक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है। 1957 में कांग्रेस के जोगिंदर सेन पहले सांसद चुने गए थे। 1962 और 1967 इस सीट के कांग्रेस के ललित सेन चुनाव जीते। 1971 में इस सीट से मंडी राजपरिवार से संबंध रखने वाले वीरभद्र सिंह चुनाव जीते। 1977 में बीएलडी के गंगा सिंह ने वीरभद्र सिंह को हरा सीट पर कब्जा किया। 1980 और 1984 में इस सीट से कांग्रेस के वीरभद्र सिंह औऱ सुखराम सिंह सांसद चुने गए। 1989 के चुनाव में पहली बार इस सीट पर बीजेपी ने कब्जा जमाया। 1991 में कांग्रेस ने इस सीट को बीजेपी से छीन लिया। 1991 और 1996 में कांग्रेस की टिकट से सुखराम सिंह चुनाव जीते। 1998 और 1999 में इस सीट से बीजेपी के महेश्वर सिंह ने चुनाव जीता। 2004 के चुनाव में कांग्रेस के नेता वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को टिकट दिया। प्रतिभा सिंह ने 1998 की हार का बदला लेते हुए महेश्वर सिंह को चुनाव में हरा दिया। 2009 में इस सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर से कब्जा जमाया। 2014 में मोदी लहर में कांग्रेस यह सीट नहीं बचा पाई। 2014 में इस सीट से बीजेपी के रामस्वरुप शर्मा सांसद चुने गए।

मंडी एक परिचय: प्रमुख बातें मंडी जनसंख्या के लिहाज से शिमला के बाद यह राज्य का दूसरा सबसे बड़ा जिला है। मंडी नाम संस्‍कृत शब्‍द मंडोइका से बना है जिसका अर्थ होता है खुला क्षेत्र। आधिकारिक तौर पर जिला मंडी कुल्लू, बिलासपुर और हमीरपुर, एक सहित मध्य क्षेत्र के जिलों का मुख्यालय शहर है। मंडी को हिल्‍स की वाराणसी या छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। व्‍यास नदी के किनारे बसा हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक नगर मंडी लंबे समय से व्‍यवसायिक गतिविधियों का केन्‍द्र रहा है। यहां 300 से ज्‍यादा हिंदू धर्म के मंदिर स्थित है जो भगवान शिव और मां काली को समर्पित है। यहां के प्राचीन मंदिरों में पंचवक्रता मंदिर, अर्द्धनारीश्‍वेर मंदिर और त्रिलोकनाथ मंदिर शामिल है। यहां का भूतनाथ मंदिर इलाके का सबसे प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण 1520 ई. में किया गया था।