शादी से पहले करिअर और तरक्की को तवज्जो क्यों देते हैं आज के युवा….?

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no for marriage
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शादी से पहले करिअर और तरक्की को तवज्जो देने लगे हैं आज के युवा। दरअसल नयी पीढ़ी शादी और परिवार से भाग रही है। वे न तो जल्दी घर बसाना चाहते हैं न उन्हें अब बच्चे पैदा करने की जल्दी है। सोच है कि क्यों न थोड़ा सा अपने लिये अपनी आजा़दी और खुशी के लिये जी लिया जाये? इन दिनों युवाओं की प्राथमिकताएं कुछ बदल गई हैं।

पढ़- लिखकर अच्छी कम्पनी में नौकरी करना, हर साल विदेश घूमने जाना, कुछ पैसा जमा होते ही कार खरीदना,एक साल पूरा होते ही ज्यादा वेतन वाली नौकरी देख दूसरी कम्पनी में छलांग लगाना। फिर किसी अच्छी कॉलोनी में मकान लेने के बारे में सोचना। इसके लिए लोन लेना। मकान के मिलने के बाद कहीं जाकर शादी का नम्बर आता है। शादी भी किसी ऐसे पार्टनर से जो ज्यादा नहीं तो बराबर का तो कमाता ही हो। नामी कम्पनी में काम भी करता हो। आखिर करिअर का सवाल है। इन सबके बीच परिवार अब आखिर में आता है। फिर जल्दी भी क्या है, अभी तो बहुत ज़िंदगी बाकी है, अपने लिये क्यों न थोड़ा और जी लिया जाये?

पहले जिन सुविधाओं-सहूलियतों को शादी के बाद जुटाने के बारे में सोचा जाता था, अब उन्हें शादी से पहले ही जमा करने के बारे में सोचा जाता है क्योंकि लगता है कि गृहस्थी के जंजाल में फंसने से पहले जीवन का भरपूर आनंद ले लिया जाए। इस आनंद में तरह-तरह के कर्जों का बोझ भी सिर पर चढ़ जाता है, जिन्हें उतारते कई बार जिंदगी बीत जाती है।

शादी से पहले करिअर स्टेटस सिंबल

career
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आज से पचीस साल पहले तक युवाओं की पढ़ाई खत्म होने के बाद उनकी प्राथमिकता नौकरी होती थी। उसके बाद उनका विवाह, परिवार में बढ़ोतरी यानी कि बच्चे, तब कहीं जाकर मकान के बारे में सोचने की बात आती थी। वाहन की बात तो सबसे बाद में सोची जाती थी। बल्कि हर घर में वाहन होना ज़रूरी भी नहीं था। बड़े शहरों में तो ज्यादा दूरी होने के कारण वाहन खरीदना ज़रूरी हो सकता है, छोटे शहरों में इनकी कोई इतनी ज़रूरत नहीं थी। मगर, जब से कार स्टेटस सिम्बल बनी है तब से छोटे शहरों और गांवों में कारों की तादाद बेशुमार बढ़ी है।

बॉलीवुड एक्टर से लेते हैं प्रेरणा

youth career
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करीना कपूर, बिपाशा बसु, प्रीति जिंटा, प्रियंका चोपड़ा, ऐश्वर्य राय, उर्मिला मातोंडकर, अनुष्का शर्मा समेत कई बड़े सितारों ने काफी देर से शादी की है। सुष्मिता सेन अभी भी अविवाहित हैं। जबकि पूजा बेदी पहले भी विवाह कर चुकी हैं और अब अड़तालीस साल की उम्र में दूसरी बार मंगनी की है। दशकों से बॉलीवुड को ही युवाओं के आदर्श की तरह पेश किया गया है। जो वे करते हैं वही आप करिए। इसीलिए उन्हीं जैसे कपड़े, बाल, चश्मे हाजिर हैं।

उन्हें ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कीजिए। जिन चीजों का ये लोग विज्ञापन करते हैं उन्हें खरीदकर इन जैसे बनने की कोशिश कीजिए। यहां तक कि दीपिका पादुकोण या अनुष्का ने, जो साड़ियां अपनी शादी पर पहनी थीं, उन्हीं के नाम से बाजार में वे साड़ियां उपलब्ध हैं, कस्बे और गांवों तक भी पहुंच गई हैं, उन्हें पहनिए और खुद को उन जैसी ही ड्रीम दुल्हन समझिए।

शादी से पहले करिअर, देर से फैमिली का चलन

youth career
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शादी की बढ़ती उम्र का एक बड़ा कारण इन दिनों लड़कियों का पढ़ना-लिखना और नौकरी करना है। अब लड़कियों को यह शिक्षा घर में भी नहीं दी जाती कि उनके जन्म लेने का अर्थ और सार्थकता यही है कि वे जल्दी-जल्दी घर बसा लें। बल्कि जोर पढ़ने-लिखने और अपने पांवों पर खड़ा होने पर है। इसीलिए न केवल शादी, माता-पिता बनने के फैसले भी युवा बड़ी उम्र में ले पा रहे हैं।

एकल परिवार, एक बच्चा

Career 2
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बहुत-सी मल्टीनेशनल कम्पनियां अपने यहां काम करने वाली महिलाओं को ओवम बैंक की सुविधाएं दे रही हैं। इन कम्पनियों का कहना है कि इन दिनों लड़कियां अपने करिअर में इतनी व्यस्त रहती हैं कि देर से शादी करती हैं और जब तक मां बनने का ख्याल आता है, तब तक उम्र निकल चुकी होती है। आईवीएफ और सरोगेसी से मां बनने की सुविधाओं ने लड़कियों के लिए बड़ी उम्र में मां बनने की राह खोल दी है। इसलिए वे समझती हैं कि पहले करिअर बना लें, सफलता के जो मानक उन्होंने खुद के लिए तय किए हैं, उन्हें पूरा कर लें, तब शादी के बारे में सोचें।

लिव-इन का कल्चर बढ़ा

couple travelling
couple travelling

तीस साल पहले मध्यवर्ग में जो दो बच्चों का नियम-सा बन गया था क्योंकि छोटा परिवार माने संसाधनों का कम बंटवारा, अच्छी शिक्षा, अच्छी नौकरी और अच्छी बचत भी। लेकिन अब दो बच्चों से परिवार एक बच्चे तक सीमित होते जा रहे हैं क्योंकि उनका कहना है कि शिक्षा बहुत महंगी है। इन दिनों बहुत से युवा लिव-इन में रहते हैं, शादी के मुकाबले इस तरह के रिश्ते उन्हें रास आते हैं क्योंकि अगर बात नहीं बनी तो बिना किसी लम्बी कानूनी प्रक्रिया के आसानी से अलग हुआ जा सकता है।

हालांकि, कई बार इन रिश्तों के टूटने से कड़वाहट इतनी बढ़ जाती है कि लड़कियां दुष्कर्म का भी आरोप लगा देती हैं और जिस कानूनी प्रक्रिया से युवा बचना चाहते हैं उसमें चाहे-अनचाहे फंस जाते हैं। हालांकि, अदालतें बार-बार इन मामलों में फैसले दे चुकी हैं कि सहमति से सम्बंध दुष्कर्म नहीं हैं ।

बच्चा गोद लेने की सुविधा

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फिर सरकारों ने कानून में जो बदलाव किए हैं, उनके अनुसार अब अविवाहित लड़कियां भी बच्चे गोद ले सकती हैं। सुष्मिता सेन ने तो जब अपनी दूसरी बेटी आलिया को गोद लिया तो इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी। आलिया से पहले वह रीनी को गोद ले चुकी थीं। इसी तरह रवीना टंडन ने भी दो बच्चियों को गोद लिया था। लड़कियों को गोद लेने के आंकड़ों में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज गई है। जबकि पहले ऐसा नहीं था। लोग लड़के ही गोद लेना चाहते थे। बल्कि सरोगेसी के जरिए न केवल लड़कियां बल्कि लड़के भी माता-पिता बन रहे हैं।

राजस्थान की एक महिला कलेक्टर ने शादी नहीं की। क्योंकि उनके भाई की अचानक मृत्यु हो गई थी। वह अपने माता-पिता की देखभाल करना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने शादी न करके सरोगेसी के जरिए मां बनने का रास्ता चुना। इसी तरह बालीवुड में तो विवाहित शाहरुख खान, आमिर खान से लेकर अविवाहित तुषार कपूर, एकता कपूर और करन जौहर जैसे लोग माता-पिता बन चुके हैं। बल्कि सिर्फ युवा ही नहीं बहुत उम्रदराज जोड़े भी आईवीएफ के जरिए माता-पिता बन रहे हैं। पंजाब में बहत्तर साल की एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया था। बड़ी संख्या में पचास और साठ की उम्र वाली महिलाएं तो अपने मां बनने के सपने को इसी तरह से पूरा कर रही हैं। http://कैसे खिलखिलाहट बने पेरेंटिंग का हिस्सा

परिवार बसाना कठिन क्यों?

couple
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अब किसी को परिवार बसाने की जल्दी नहीं है। पढ़ी-लिखी लड़कियों का एक बड़ा हिस्सा अब शादी ही नहीं करना चाहता। लड़के-लड़कियों दोनों को परिवार किसी आफत की तरह नज़र आने लगा है।
ईट, ड्रिंक एंड वी मैरी ही जीवन का प्रमुख उद्देश्य बन चला है। स्त्री विमर्श की अतिवादी धारणाओं ने भी इसे बढ़ाया है। कोख स्त्री की सबसे बड़ी शत्रु है, इसे औरतों के लिए रामबाण की तरह पेश किया जा रहा है। हालांकि, सच यह भी है कि अगर कोख न होती तो वे भी इस दुनिया में न होते, जो ऐसा कह रहे हैं।

अकेलापन कितना अच्छा?

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अकेलेपन को चाहे जितने आदर्श की तरह पेश किया जाए। इसमें कारपोरेट के हित तो छिपे ही हैं, मनुष्य से मनुष्य के कट जाने, दूर हो जाने की मुश्किलें भी छिपी हैं। तकनीक ने कम्युनिकेशन को चाहे जितना बढ़ाने का ढोल पीटा हो, मगर सच तो यह है कि तकनीक ने मनुष्य को बहुत अकेला भी किया है।http://www.indiamoods.com/try-out-the-old-ways-in-parenting-take-care-of-these-5-things/

पश्चिमी देश खोज रहे परिवार

जिस पश्चिम से मनुष्य के एक इंडिविजुअल या व्यक्ति बन जाने और व्यक्तिवाद में ही मनुष्य के लिए आदर्श खोजने की अवधारणाओं को प्रचारित-प्रसारित किया था और परिवार को पिछड़ा हुआ बताकर उसे पूरी तरह तोड़ने में प्रमुख भूमिका निभाई, वही पश्चिमी समाज आज अपने समाज के क्षय के कारण त्राहि-त्राहि कर रहा है। अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गेर की पत्नी 1993 से परिवार की वापसी की मुहिम चला रही हैं। बड़े से बड़े मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री, पुलिस अफसर, डॉक्टर कह रहे हैं कि अमेरिकी समाज को बचाना है तो परिवार को वापस लाओ।
हालांकि, जो परिवार टूट चुके हैं, वे वापस कैसे आएंगे यह कोई नहीं बताता।

by- क्षमा शर्मा ( लेखिका वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं)