हनुमान के शरीर पर सिंदूर का रहस्य

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डॉ. ब्रह्म कुमार

हनुमान के शरीर पर सिंदूर क्यों लगा होता है? क्या आप इशका रहस्य जानते हैं? अद्भुत रामायण में एक जगह उल्लेख मिलता है कि एक सुबह हनुमान जी को भूख लगी तो वे माता जानकी के पास पहुंचे। माता की मांग में सिंदूर देखकर हनुमान ने आश्चर्य चकित होकर पूछा,माता आपने यह क्या और क्यों लगा रखा है। इस पर माता जानकी ने उन्हें बताया कि, पुत्र, यह सुहागिन स्त्रियों का प्रतीक, मंगल सूचक, सौभाग्य वर्धक सिंदूर है, जो स्वामी की दीर्घ आयु के लिए जीवन पर्यन्त लगाया जाता है।” हनुमान थे तो स्वामी भक्त, उन्होंने अपने स्वामी श्री राम को अजर अमर करने के लिए सारे शरीर पर ही सिंदूर लगा लिया। वास्तव में भगवान राम के आदर्शों को हनुमान अजर अमर रखना चाहते थे और उनकी गुरु की प्रति प्रतिबद्धता दिखाई भी पड़ती है।

हनुमान का कर्म योग

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पवन गति व शक्ति का प्रतीक है।पवन का गुण है कि अदृश्य रहकर भी सबको जीवन देना। हनुमान का कर्म योग यह सिखाता है कि कर्म करते रहो,अपने आपको अदृश्य या अव्यक्त रखते हुए।सभी धर्मों का संचालन अदृश्य सत्ता की आस्था की बदौलत ही होता है।इस सत्ता से ही सबको आत्मबल प्रदान होता है जिससे अंततः मनुष्य के जीवन का सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है। यहां पर भी हनुमान सभी आस्थाओं में प्रतिबिम्बित होते हैं।

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राम लीला में सुंदर कांड बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सुंदर कांड के मुख्य नायक हनुमान जी है। धर्म, अर्थ,काम और मोक्ष के साथ भक्ति और प्रेम की उपलब्धि भी इसी कांड की अद्भुत देन है। इंडोनेशिया में जब राम सीता प्रणय, सीताहरण, सीता खोज,राम-रावण युद्ध और राम विजय के प्रसंग राम लीला में दिखाये जाते है तो आदिकाल से लेकर अनंतकाल तक स्थापित हनुमान की स्वामी भक्ति का जीवंत चित्रण सामने आ जाता है। इस दक्षिण पूर्वी  और मुस्लिम बाहुल्य देश में हनुमान भारत से ज्यादा प्रासंगिक और अवस्थित दिखाई देते है।

शक्ति के प्रतीक हैं हनुमान

हनुमान के शरीर में पशु और मनुष्य के बीच विरोधाभास दिखाई देता है लेकिन शूरता, वीरता, पराक्रम के वे स्वरूप तो है ही साथ ही बुद्धिमत्ता, विद्वत्ता, नीतिमत्ता, सरलता और सौम्यता के भी अद्भुत आदर्श हैं। अत: वे गुरु रूप में भी उपास्य है। हनुमान जैसा श्रेष्ठ सदगुरु सर्वदा सर्व सुलभ है। हनुमान के स्मरण से मनुष्य में बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, निरोगता और विवेक जैसे गुण स्वभावतः आ जाते हैं। जिस मनुष्य, जाति या समाज में ऐसे गुणों की सरलता और संस्कारों की सौम्यता दिखाई पड़े, वहां हनुमान की उपस्थिति अवश्य होगी।

हनुमान एक जागृत देवता है। वे त्रेता युग में राम के साथ थे, कृष्ण के द्वापर युग में भीम के साथ उनका सामना होता है। कहते हैं कलयुग में राम चरित मानस के समय भी वे तुलसीदास को दोहा सुनाते हैं। युगों -युगों से हनुमान सबके साथ हैं, बस अंतर्मन ने उनका ध्यान कीजिये प्रभु की अनुभूति आपको सुख, शांति, प्रसन्नता देगी और भय मुक्त करेगी।