एक मिनट-128 निशाने, ऐसा है अपाचे, एमआई-36 की जगह लेगा

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india apache 8
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एक मिनट-128 निशाने, इतना पावरफुल है अपना अपाचे, जो अब वायुसेना का हिस्सा है। 3 सितम्बर को पठानकोट स्थित एयरबेस पर कुल 8 अपाचे एएच-64 हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल किए गए। अपाचे हेलीकॉप्टरों की पहली खेप इसी साल 27 जुलाई को गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर पहुंची थी, जिन्हें अब पठानकोट एयरबेस पर तैनात कर दिया गया है।

पठानकोट एयरबेस पर इन हेलिकॉप्टरों को पानी की बौछार करके सैल्यूट किया गया। इस एयरबेस पर अपाचे की तैनाती रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है क्योंकि यहां से सटी सीमा अक्सर तनावग्रस्त रही है।

एक मिनट-128 निशाने, 22 अपाचे हेलीकॉप्टर सेना को मिलेंगे

अपाचे भारतीय सेना में अब रूस में निर्मित बहुत पुराने हो चुके एमआई-36 हेलीकॉप्टरों का स्थान लेंगे। भारत को मार्च 2020 तक कुल 22 अपाचे हेलीकॉप्टर मिल जाएंगे और इन 22 हेलीकॉप्टरों की पूरी खेप वायुसेना में शामिल होने तथा इसी माह फ्रांस से राफेल विमानों की आपूर्ति शुरू होने के बाद निश्चित रूप से भारतीय वायुसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा।

दरअसल एएच-64ई अपाचे गार्जियन अटैक हेलीकॉप्टर को दुनिया के सबसे खतरनाक हेलीकॉप्टरों के रूप में जाना जाता है। अमेरिकी एयरोस्पेस कम्पनी ‘बोइंग’ द्वारा निर्मित यह हेलीकॉप्टर दुनिया का सबसे आधुनिक और घातक हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो ‘लादेन किलर’ के नाम से भी विख्यात है। यह अमेरिकी सेना तथा कई अन्य अतंर्राष्ट्रीय रक्षा सेनाओं का सबसे एडवांस मल्टी रोल कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है, जो एक साथ कई कार्यों को अंजाम दे सकता है।

एक मिनट-128 निशाने वाले अपाचे को ये देश भी कर रहे हैं इस्तेमाल

अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, सिंगापुर, इजरायल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, मिस्र, ग्रीस, सऊदी अरब, कतर के अलावा कुछ अन्य देशों की सेनाएं भी इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रही हैं। ‘बोइंग’ अब तक दुनियाभर में 2200 से भी अधिक अपाचे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति कर चुकी है और भारत दुनिया का 14वां ऐसा देश है, जिसने अपनी सेनाओं के लिए इसका चयन किया है।

  पांच वर्षों तक अफगानिस्तान के संवेदनशील इलाकों में अपाचे हेलिकॉप्टर उड़ा चुके ब्रिटिश वायुसेना में पायलट रहे एड मैकी का इस हेलीकॉप्टर के बारे में कहना है कि अपाचे दुनिया की सबसे परिष्कृत किन्तु घातक मशीन है, जो अपने दुश्मनों पर बहुत बेरहम साबित होती है। मैकी के मुताबिक किसी नए पायलट को अपाचे उड़ाने के लिए कड़ी और बहुत लंबी ट्रेनिंग लेनी होती है, जिसमें काफी खर्च भी आता है। इसके लिए सेना को एक पायलट की ट्रेनिंग पर 30 लाख डॉलर तक भी खर्च करने पड़ सकते हैं।

अपाचे को 2 पायलट मिलकर उड़ाते हैं

ब्रिटिश पायलट मैकी कहते हैं कि अपाचे को दो पायलट मिलकर उड़ाते हैं। मुख्य पायलट पीछे बैठता है, जिसकी सीट थोड़ी ऊंची होती है, वही हेलीकॉप्टर को नियंत्रित करता है जबकि आगे बैठा दूसरा पायलट निशाना लगाता है और फायर करता है। वह बताते हैं कि अपाचे का निशाना बहुत सटीक है, जिसका सबसे बड़ा फायदा युद्ध क्षेत्र में होता है, जहां दुश्मन पर निशाना लगाते समय आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचता। यह सिर्फ दुश्मन पर हमला करने में ही नहीं अपितु सर्जिकल ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में भी वायुसेना के लिए बहुत मददगार साबित हो सकता है।

अपाचे की एक और विशेषता यह है कि यह युद्ध के मैदान में केवल दुश्मन के परखच्चे उड़ाने का ही काम नहीं करता बल्कि यह युद्धस्थल की तस्वीरें खींचकर उन्हें अपने एयरबेस पर ट्रांसमिट भी कर देता है।

16 फुट ऊंचे और 18 फुट चौड़ा है अपाचे

apache 2
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   करीब 16 फुट ऊंचे और 18 फुट चौड़े अपाचे को उड़ाने के लिए दो पायलट होना जरूरी है। इसके बड़े विंग को चलाने के लिए इसमें दो इंजन फिट हैं, जिस कारण इसकी रफ्तार बहुत ज्यादा है। अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कॉरपोरेशन एजेंसी का कहना है कि अपाचे एएच-64ई हेलिकॉप्टर भारतीय सेना की रक्षात्मक क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे भारतीय सेना को जमीन पर मौजूद खतरों से लड़ने में मदद मिलेगी, साथ ही सेना का आधुनिकीकरण भी होगा। भारतीय वायुसेना की सामरिक जरूरतों के लिहाज से अपाचे इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी वायुसेना की जरूरत के मुताबिक ही इसमें अपेक्षित बदलाव किए गए हैं। http://www.indiamoods.com/indian-army-retaliate-with-bofors-tank-then-killed-5-7-pakistans-bat-on-line-of-control/

ढ़ाई अरब डॉलर अर्थात् करीब साढ़े सत्रह हजार करोड़ रुपये का यह हेलीकॉप्टर सौदा करीब चार साल पहले हुआ था, जब सितम्बर 2015 में भारत ने अमेरिका से 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए सौदा किया था। रक्षा मंत्रालय द्वारा 2017 में भी 4168 करोड़ रुपये की लागत से बोइंग से हथियार प्रणालियों सहित छह और अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी गई थी।

बहुउद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर

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  अपाचे एक ऐसा अग्रणी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जो दुश्मन की नाक के नीचे किसी भी मिशन को पूरा करने में सक्षम है। इसे छिपकर वार करने के लिए जाना जाता है, इसीलिए इसका इस्तेमाल दुश्मन के इलाके में आसानी से घुसने में भी किया जाता है। अमेरिकी सेना अपने कई मिशनों में इसका इस्तेमाल कर चुकी है।

दुश्मन के इलाके में आसानी से घुसने की क्षमता, जमीन के काफी करीब उड़ान भरने में कारगर, हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलों और बंदूकों से लैस, सिर्फ 1 मिनट में 128 टारगेट निशाना बनाने तथा दिन के अलावा रात में भी आसानी से कहीं भी जाने में सक्षम, किसी भी मौसम में उड़ान भरने तथा आसानी से टारगेट डिटेक्ट करने में सक्षम, दुश्मन के रडार को आसानी से चकमा देने में माहिर इत्यादि अनेक खूबियों से लैस अपाचे पहली बार वर्ष 1975 में आकाश में उड़ान भरता नजर आया था, जिसे 1986 में अमेरिकी सेना में शामिल किया गया था।

अमेरिका ने अपने इसी हेलिकॉप्टर का पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के साथ दुश्मनों को धूल चटाने के लिए इस्तेमाल किया था। इसके अलावा इजरायल भी लेबनान तथा गाजा पट्टी में अपने सैन्य ऑपरेशनों के लिए अपाचे का इस्तेमाल करता रहा है।

apache_pti
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अपाचे की ढ़ेरों विशेषताएं ही इसे भारतीय वायुसेना को नई ताकत प्रदान करने के लिए पर्याप्त हैं। इसमें सटीक मार करने और जमीन से उत्पन्न खतरों के बीच प्रतिकूल हवाईक्षेत्र में परिचालित होने की अद्भुत क्षमता है। अपाचे का डिजाइन कुछ इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह आसानी से दुश्मन की किलेबंदी को भेदकर उसके इलाके में घुसकर बहुत सटीक हमले करने में सक्षम है और इसकी इन्हीं विशेषताओं के चलते इससे पीओके से होने वाली आतंकी घुसपैठ को रोकने और वहां के आतंकी ठिकानों को तबाह करने में भारतीय सेना को मदद मिलेगी, जहां लड़ाकू विमानों का प्रभावी इस्तेमाल संभव नहीं है।

apache 3
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280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम यह हेलीकॉप्टर तेज गति के कारण बड़ी आसानी से दुश्मनों के टैंकरों के परखच्चे उड़ा सकता है। बहुत तेज रफ्तार से दौड़ने में सक्षम इस हेलीकॉप्टर को रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल है। यह बगैर पहचान में आए चलते-फिरते या रूके हुए लक्ष्यों को आसानी से भांप सकता है। इतना ही नहीं, सिर्फ एक मिनट के भीतर यह 128 लक्ष्यों से होने वाले खतरों को भांपकर उन्हें प्राथमिकता के साथ बता देता है। इसे इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि यह युद्ध क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में टिका रह सकता है।

यह किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में दुश्मन पर हमला कर सकता है और नाइट विजन सिस्टम की मदद से रात में भी दुश्मनों की टोह लेने, हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेट दागने और मिसाइल आदि ढ़ोने में सक्षम है। टारगेट को लोकेट, ट्रैक और अटैक करने के लिए इसमें लेजर, इंफ्रारेड, सिर्फ टारगेट को ही देखने, पायलट के लिए नाइट विजन सेंसर सहित कई आधुनिक तकनीकें समाहित की गई हैं।

   अपाचे एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है और इसकी फ्लाइंग रेंज करीब 550 किलोमीटर है। इसमें 360 डिग्री तक घूम सकने वाला अत्याधुनिक फायर कंट्रोल रडार तथा निशाना साधने वाला सिस्टम लगा है। दो जनरल इलैक्ट्रिक टी-700 हाई परफॉरमेंस टर्बोशाफ्ट इंजनों से लैस इस हेलीकॉप्टर में आगे की तरफ एक सेंसर फिट है, जिसके चलते यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। इसका सबसे खतरनाक हथियार है 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता।

दरअसल इसमें हेलिफायर, स्ट्रिंगर मिसाइलें, 70 एमएम हाइड्रा एंटी ऑर्मर रॉकेट्स लगे हैं और मिसाइलों के पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरे होते हैं कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन होता है। इसके वैकल्पिक स्टिंगर या साइडवाइंडर मिसाइल इसे हवा से हवा में हमला करने में सक्षम बनाते हैं। अपाचे हेलीकॉप्टर के नीचे दोनों तरफ 30 एमएम की दो ऑटोमैटिक राइफलें भी लगी हैं, जिनमें एक बार में शक्तिशाली विस्फोटकों वाली 30 एमएम की 1200 गोलियां भरी जा सकती हैं। http://www.indiamoods.com/iaf-chief-air-chief-marshal-bs-dhanoa-flew-a-sortie-with-wg-cdr-abhinandan/

इसका सबसे क्रांतिकारी फीचर है हेल्मेट माउंटेड डिस्प्ले, इंटीग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम, जिनकी मदद से पायलट हेलिकॉप्टर में लगी ऑटोमैटिक एम-230 चेन गन को अपने दुश्मन पर टारगेट कर सकता है। 17.73 मीटर लंबे, 4.64 मीटर ऊंचे तथा करीब 5165 किलोग्राम वजनी इस हेलीकॉप्टर में दो पायलटों के बैठने की व्यवस्था है। इसका अधिकतम भार 10400 किलोग्राम हो सकता है। डेटा नेटवर्किंग के जरिये हथियार प्रणाली से और हथियार प्रणाली तक, युद्धक्षेत्र की तस्वीरें प्राप्त करने और भेजने की इसकी क्षमता इसकी खूबियों को और भी घातक बना देती है।

   अगले वर्ष तक अपाचे हेलीकॉप्टरों की पूरी खेप प्राप्त होने के बाद इन हेलीकॉप्टरों को चीन तथा पाकिस्तानी सीमा पर तैनात किया जाएगा, जो वायुसेना को जमीनी बलों की सहायता के लिए भविष्य के किसी भी संयुक्त अभियान में महत्वपूर्ण धार उपलब्ध करांएगे।