हरियाणा में आउटसोर्स नौकरियों में कैसे चला पर्ची और खर्ची का खेल…

job scam
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 स्पेशल स्टोरी/ यशोदा शर्मा

हरियाणा में आउटसोर्स नौकरियों में जमकर खेल हुआ। इसमें पर्ची और खर्ची दोनों चली। यानी पैसा और सिफारिश से नौकरियां बांटी गई। अम्बाला शहर सिविल अस्पताल में आउटसोर्स कंपनी के संचालक और उसके कर्मचारियों ने गरीबों से मोटे पैसे ऐंठे और उन्हें नौकरियां दी। नौकरियां देने के लिये इन लोगों से 30 से 60 हजार प्रति व्यक्ति लिया। मामले में विजिलेंस ने कंपनी के एक सुपरवाइजर संजीव को नौकरी लगवाने के नाम पर 30 हजार रुपए लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

उससे पूछताछ के बाद विजिलेंस ने कंपनी के संचालक पुनीत अत्री और फील्ड आफिसर राजकुमार पर केस दर्ज किया था, लेकिन अभी दोनों फरार हैं। विजिलेंस को इनकी तलाश है। इधर गुरुग्राम नगर निगम में लगाए गए कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नौकरी दिलवाने की ‘सिफारिश’ करने में प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक सांसद और आईएएस अफसर भी पीछे नहीं रहे हैं। इससे संबंधित एक रिपोर्ट जांच कमेटी ने निगम सदन को सौंपी है।

हरियाणा में आउटसोर्स नौकरियों के खेल पर क्या कहती है रिपोर्ट

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रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम निगम कर्मचारियों व अधिकारियों के वेतन पर करीब 100 करोड़ रुपये सालाना खर्च करता है। आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या और उसके अनुपात में काम नहीं होने की शिकायतों को लेकर निगम सदन ने पूरे मामले की जांच के लिए निगम पार्षद आरएस राठी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी ने निगम सदन को 124 पेज की रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आउटसोर्स भर्ती से पहले न तो व्यवस्थित ढंग से कोई इंटरव्यू होता है और न ही योग्यता देखी जाती है। http://www.indiamoods.com/pakistani-spy-caught-in-ambala-cant-used-to-work-for-isi/

हरियाणा में आउटसोर्स नौकरियों का खेल समझें…

फार्म में रेफरेंस का भी एक कॉलम था, जिसमें सामने आया कि अधिकतर भर्ती प्रदेश सरकार के 4-5 बड़े मंत्री, क्षेत्रीय विधायक, सांसद, आईएएस और निगम अधिकारियों की ‘सिफारिश’ पर हुई है। लगभग डेढ़ साल चली जांच और निगम के सभी विभागों को 7 स्मरण पत्र देने के बाद भी निगम ने 1950 कर्मचारियों में से सिर्फ 1600 कर्मचारियों का ही रिकार्ड उपलब्ध करवाया है। शेष कर्मचारी कहां हैं? किसी को नहीं पता।

जनवरी 2019 से जुलाई 2019 तक के आंकड़ों के अनुसार, निगम हर माह औसतन 1950 आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन दे रहा है। कमेटी में पार्षद सुभाष सिंगला, रविंद्र यादव, संजय प्रधान व ब्रह्म प्रकाश सदस्य थे।

ज़रूरत से ज्यादा हैं क्लर्क

जांच में सामने आया कि इंजीनियरिंग विंग में लगभग 100 क्लर्क हैं। कमेटी का दावा है कि इनकी संख्या जरूरत से ज्यादा है। निगम के अन्य 18 अलग विभागों में क्लर्क और कंप्यूटर आपरेटर्स की भरमार है। एक फ्लोर पर काम करने वाली इंजीनियरिंग विंग में 50 से अधिक चपरासी लगे हुए हैं। निगम को हाल ही में हरियाणा सरकार की ग्रुप डी की भर्तियों में भी 80 से अधिक स्थायी कर्मचारी मिले थे और 150 से अधिक कर्मचारी सेक्टर स्थानतरण के समय एचएसवीपी विभाग से ट्रांसफर हुए थे।

सिविल अस्पताल में मची खलबली

अम्बाला शहर सिविल अस्पताल में जब से विजिलेंस ने रिश्वत लेते सुपरवाइजर को पकडा है तभी से यहां खलबली है। पैसे के बदले जॉब देने का मास्टर माइंड फील्ड आफिसर राजकुमार अभी फरार है। विजिलेंस उसकी तलाश कर रही है। विश्वनीय सूत्रों से पता चला है कि राजकुमार इस समय डेरा सच्चा सौदा ब्यास में है और वहां उसने शरण ले रखी है। सिविल अस्पताल की ही एक महिला सिक्योरिटी गार्ड उसके निरंतर संपर्क में है और अस्पताल में विजिलेंस की चल रही गतिविधियों की जानकारी दे रही है। विजिलेंस उसे भी कभी भी हिरासत में ले सकती है।

सीएम कहते हैं अब नहीं चलती पर्ची…

सीएम मनोहर लाल खट्टर अपनी जनसभाओं में एक बात अकसर करते हैं कि प्रदेश में अब बिना पर्ची और खर्ची के नौकरी दी जाती है। लेकिन अम्बाला और गुरुग्राम में दोनों ही बातें गलत निकली। अम्बाला सिविल अस्पताल में पैसों के दम पर लोगों ने नौकरियां पाई, जबकि गुरूग्राम नगर निगम में सिफारिश के बाद युवाओं को नौकरी दी गई। अब जनता ही सीएम से विधानसभा चुनाव में इसका हिसाब चुकाएगी।