चैत्र नवरात्रि का शुभ मुहूर्त, जानें- कलश स्थापना का तरीका और महत्व

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maa durga

हिन्दू कलेंडर के मुताबिक साल में दो बार नवरात्र‍ि (Navratri) पड़ती हैं, जिन्‍हें चैत्र नवरात्र (Chaitra Navaratri) और शारदीय नवरात्र (Sharad Navaratri) के नाम से जाना जाता है। 6 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि (Navaratri) शुरू हो रहे हैं। नवरात्र 14 अप्रैल तक चलेंगे। साल में सबसे पहले आने वाले इस नवरात्रि (Chaitra Navratri) के साथ-साथ हिंदू नव वर्ष भी मनाया जाता है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस पर्व को उगादि (Ugadi) के रूप में मनाया जाता है तो महाराष्ट्र में गुड़ी पर्वा कहा जाता है। हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार हर साल चैत्र (Chaitra) महीने के पहले दिन से ही नव वर्ष की शुरुआत हो जाती है। साथ ही इसी दिन से चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navaratri 2019) भी शुरू हो जाते हैं। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा (Durga) के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि कब हैं?
मां के नौ रूप

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हर साल चैत्र (Chaitra) महीने के पहले दिन से ही चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) मनाई जाती है. चैत्र महीने की शुरुआत होते ही नौ दिनों तक चैत्र नवरात्रि की धूम रहती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक यह त्‍योहार हर साल मार्च या अप्रैल महीने में आता है. इस बार चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल से 14 अप्रैल तक चलेंगे.

चैत्र नवरात्रि का शुभ मुहूर्त

इस बार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 4 घंटे 7 मिनट तक चलेगा.
सुबह – 06:19 से 10:26 तक
कलश स्थापना के लिए सामग्री
मिट्टी का पात्र, लाल रंग का आसन, जौ, कलश के नीचे रखने के लिए मिट्टी, कलश, मौली, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, चावल, अशोका या आम के 5 पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, माता का श्रृंगार और फूलों की माला.

ऐसे करें कलश स्थापना
  1. नवरात्रि के पहले दिन नहाकर मंदिर की सफाई करें या फिर जमीन पर माता की चौकी लगाएं.
  2. सबसे पहले भगवान गणेश जी का नाम लें.
  3. मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योत जलाएं और मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालें. उसमें जौ के बीच डालें.
  4. कलश या लोटे पर मौली बांधें और उस पर स्वास्तिक बनाएं.
  5. लोटे (कलश) पर कुछ बूंद गंगाजल डालकर उसमें दूब, साबुत सुपारी, अक्षत और सवा रुपया डालें.
  6. अब लोटे (कलश) के ऊपर आम या अशोक 5 पत्ते लगाएं और नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर रखें.
  7. अब इस कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीचोबीच रख दें.
  8. अब माता के सामने व्रत का संकल्प लें
  9. कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
  10. 6 अप्रैल की सुबह 06:19 से 10:26 तक कलश की स्थापना करें.
जानिए क्यों की जाती है कलश स्थापना

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कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है. मान्यता है कि कलश स्थापना मां दुर्गा का आह्वान है और शक्ति की इस देवी का नवरात्रि से पहले वंदना शुभ मानी जाती है. मान्यता है कि इससे देवी मां घरों में विराजमान रहकर अपनी कृपा बरसाती हैं.